मौनसून में नमी का लैवल ज्यादा होता है, जिस का मतलब है कि हवा में ज्यादा मौइस्चर होता है. इस से आप की स्किन चिपचिपी और असहज महसूस हो सकती है लेकिन यह आप की स्किन के व्यवहार पर भी असर डाल सकता है.
जब स्किन लंबे समय तक नमी वाले माहौल में रहती है तो पसीना और मौइस्चर दोनों सतह पर जमा हो सकते हैं. इस से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं (कंजैशन) खास कर जब स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, सनस्क्रीन, मेकअप या पर्यावरण के प्रदूषक तत्त्व भी साथ हों. भले ही आप की स्किन औयली न दिखे, फिर भी आप के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं.
पसीने से ब्रेकआउट्स हो सकते हैं
पसीना उन मुख्य कारणों में से एक है जिन की वजह से मौनसून में आप की स्किन अलग तरह से व्यवहार कर सकती है. पसीना अपनेआप में मुंहासों का सीधा कारण नहीं है लेकिन लंबे समय तक स्किन पर पसीना रहने से ऐसा माहौल बन सकता है जिस में जलन और रोमछिद्र बंद होने की संभावना बढ़ जाती है.
जब पसीना इन के साथ मिलता है :
धूलमिट्टी और पर्यावरण के प्रदूषक तत्त्व
सनस्क्रीन और मेकअप.
डैड स्किन सैल्स.
स्किनकेयर प्रोडक्ट्स.
तो इस से आप की स्किन असहज महसूस हो सकती है और रोमछिद्र बंद हो सकते हैं.
