Tattoo safety tips : आजकल टैटू बनवाना ट्रेंड में है. फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकार, खिलाड़ियों में टैटू का क्रेज कुछ ज्यादा ही है. वहीं, युवाओं को भी अपने शरीर में टैटू बनवाना काफी अच्छा लग रहा है. लेकिन, क्या आप को पता है कि टैटू बनवाने में की गई लापरवाही आप की स्किन को खराब कर सकती है? आप को स्किन इन्फैक्शन जैसी बीमारियां हो सकती हैं? इसलिए टैटू बनवा रहे हैं तो कुछ बातों की जानकारी जरूरी है.

टैटू कैसे बनाया जाता है

स्थायी टैटू (permanent Tattoo) : स्थायी टैटू मशीन द्वारा बनाया जाता है जिस से दर्द भी होता है. शरीर के जिस स्थान पर यह टैटू बनाना है उस स्थान को अच्छे से साफ कर के बाल हटाए जाते हैं फिर उस स्थान को सर्जिकल स्प्रिट लगा कर जीवाणुरहित किया जाता है. फिर टैटू बनवाने वाले की इच्छा के अनुसार डिजाइन तय कर उस डिजाइन की आउटलाइन की जाती है.

इस के बाद स्किन कलर का ध्यान रखते हुए मशीन में नीडल लगा कर उसे इंक मे डूबो कर डिजाइन के अंदर रंग भरा जाता है.

लिमिटिड टाइम के लिए भी अस्थायी (Temporary Tattoo) टैटू कराया जा सकता है

जगुआ टैटू (Jagua Gel Tattoo) : यह दक्षिण अमेरिका के एक फल के रस से बनाया जाता है. यह दिखने में बिलकुल असली परमानैंट टैटू की तरह गहरा नीला या काला रंग देता है. यह लगभग 2 से 3 हफ्ते तक चलता है.

यह त्वचा के अंदर नहीं जाता, केवल ऊपरी सतह को रंगता है, जिस से यह बिलकुल असली टैटू जैसा दिखता है.

वाटर ट्रांसफर स्टिकर (Water transfer Stickers) : यह सब से आसान और जल्दी लगने वाला टैटू है. इसे पानी की मदद से लगाया जाता है और यह कुछ दिनों तक ही चलता है.

मेटैलिक टैटू (Metallic Tattoo) : यह सुनहरे या चांदी के रंग के होता है, जो पार्टियों में एक शानदार ऐज (edge) देता है.

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एअरब्रश टैटू (Airbrush Tattoo) : इस में स्टैंसिल का उपयोग कर के त्वचा पर खास तरह की स्याही स्प्रे की जाती है. यह बहुत कम समय यानि 2 से 7 दिन तक ही टिकता है.

अकसर पार्टियों, फिल्म शूटिंग या किसी खास इवेंट के लिए इस का इस्तेमाल किया जाता है. इसे साबुन और पानी से आसानी से साफ किया जा सकता है.

मेहंदी या हीना (Henna Tattoo) : यह भारत में बहुत लोकप्रिय है, जो 2-3 सप्ताह तक चल सकता है और शादियों या त्योहारों के लिए एकदम सही है.

सेमी परमानैंट टैटू (Semi-Permanent Tattoo) : आजकल कुछ ऐसी स्याही (जैसे Inkbox) आती हैं जो त्वचा की एपिडर्मिस (ऊपरी परत) में बैठ जाती हैं. यह 2 से 4 हफ्ते तक चलते हैं और वास्तविक टैटू जैसे दिखते हैं. यह धीरेधीरे त्वचा के प्राकृतिक रूप से साफ होने के साथ फीके पड़ जाते हैं और वास्तविक टैटू जैसे दिखते हैं.

इन बातों का ध्यान रखें

प्रोफैशनल टैटू आर्टिस्ट चुनें : किसी अनुभवी टैटू आर्टिस्ट से ही टैटू बनवाएं. इस का चुनाव भी बहुत सोचसमझ कर और रेटिंग देखने के बाद ही करें. स्टूडियो भी ऐसा सिलेक्ट करें जहां हाइजीन का पूरा ध्यान रखा जाता हो.

ध्यान दें, आर्टिस्ट नई सुई और स्टेरलाइज्ड टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है. सस्ते और अनहाइजीन जगहों से टैटू न बनवाएं क्योंकि इस से स्किन इन्फैक्शन या एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है.

जांच लें कि टूल्स या इक्विपमैंट्स स्टरलाइज किए गए हैं. सभी अच्छे स्टूडियो में औटोक्लेव होता है जो एक हीट स्टरलाइजेशन मशीन होती है, जो टूल औटोक्लेव द्वारा स्टरलाइज नहीं किए जा सकते उन को नियमित रूप से और हर बार उपयोग के बाद डिसइन्फेक्टेंट्स द्वारा साफ किए जाने की जरूरत होती है.

टैटू बनाने में सुई का दोबारा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. निडल का दोबारा उपयोग करने से त्वचा संबंधित बीमारियां हो सकती हैं.

इस के साथ ही टैटू बनाने से पहले इंक की जानकारी अपने टैटू आर्टिस्ट से जरूर लेनी चाहिए. बाजार में टैटू बनाने के लिए कई तरह की नकली इंक का भी प्रयोग किया जाता है. इस से आप की त्वचा और शरीर को नुकसान पहुंच सकता है. हमेशा प्रोफैशनल इंक से ही टैटू बनवाना चाहिए.

पहले त्वचा पर टैटू की इंक का टेस्ट करवाएं जिस से आप को पता पड़ जाए कि कहीं टैटू से आप की त्वचा पर कोई एलर्जी तो नहीं होगी. कई बार लोग पैचटेस्ट को तवज्जो नहीं देते जिस की कीमत उन्हें अपनी त्वचा पर हुई एलर्जी से चुकानी पड़ सकती है.

टैटू बनवाने के बाद इसे कुछ दिनों तक सूरज की रोशनी से बचाना चाहिए. साथ ही टैटू को धोने और शरीर के उस भाग से वजन उठाने से बचना चाहिए.

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टैटू के लिए स्किन को करें तैयार

टैटू बनवाने से पहले स्किन को तैयार करना भी बेहद जरूरी है क्योंकि ड्राई, डैमेज या इंफ्लेम्ड स्किन पर टैटू बनवाना खतरनाक हो सकता है.

ऐसे में 24 घंटे पहले से ही अल्कोहल, कैफीन या पेनकीलर से परहेज करें. ये ब्लड को पतला करते हैं और टैटू बनवाते समय ब्लीडिंग बढ़ा सकते हैं. 1 दिन पहले से ही खूब सारा पानी पीएं. इस से शरीर हाइड्रेट रहता है.

दर्द सहने के लिए मैंटली तैयार रहें

टैटू बनवाने के लिए नीडल को स्किन में चुभोया जाता है जिस से दर्द होता है. इसलिए इस दर्द को सहने के लिए तैयार रहें. अगर आप दर्द को नहीं सह सकते तो टैटू बनवाने का विचार छोड़ दें.

टैटू बनवाने जा रहे हैं, तो अच्छे से खापी कर जाएं नहीं तो कमजोरी हो सकती है. प्रोसेस के दौरान खुद को डिस्ट्रेक्ट रखें. इस से दर्द का एहसास कम होगा.

टैटू में अपनी बीवी या गर्लफ्रैंड का नाम न खुदवाएं

टैटू बनवाते समय ध्यान रखें कि अपने हसबैंड, बीवी, गर्लफ्रैंड या फिर बौयफ्रैंड का नाम न लिखवाएं. कोई भरोसा नहीं कि वह नाम कब आप की जिंदगी से बदल जाएं.

अगर आप ॐ, राम, कृष्ण का चेहरा, बांसुरी जैसी टैटू बनवा रहे हैं तो ये चीजें बताती हैं कि आप कितने धर्मभीरु हैं. धर्मभीरु हैं भी तो भी उस का विज्ञापन न करें.

जब भी टैटू बनवाएं बहुत छोटा बनवाएं. कई लोग पूरे हाथों और गरदन आदि पर परमानैंट टैटू बनवा लेते हैं, जो कुछ समय बाद ही बेकार लगने लगता है. लेकिन तब आप के पास उसे रिमूव करने का कोई औप्शन नहीं होता. इसलिए सोचसमझ कर ही टैटू का डिजाइन सिलेक्ट करें.

टैटू हमेशा पर्सनैलिटी, सोच और इमोशंस से भरा होता है. ऐसे में किसी भी ट्रैंडी टैटू की कौपी न करें बल्कि अपनी सोच और फिलिंग से जुड़ा टैटू ही बनवाएं. साथ ही छोटे टैटू से शुरुआत करें ताकि दर्द का एहसास कम हो सके. अगर आप को कोई टैटू पसंद आ रहा है तो पहले डिजिटल ट्रायल ऐप के जरीए ट्राई कर के देखें.

टैटू बनवाने के बाद लापरवाही न करें

टैटू बनवा कर केवल शौक पूरा करना कई बार खतरनाक हो जाता है क्योंकि अगर इस की अच्छे से केयर न की जाए तो इन्फैक्शन भी हो सकता है. आर्टिस्ट द्वारा लगाई गई पट्टी को कम से कम 2-4 घंटे तक न हटाएं. टैटू बनवाने के बाद जब तक टैटू आर्टिस्ट मना करे इस पर पानी न लगाएं.

टैटू सूखने पर उस पर पपड़ी जम सकती है, उसे हाथ से न निकालें और न ही खुजली करें. आर्टिस्ट द्वारा दिया गया हीलिंग ओइटमेंट या मोइस्चराइजर लगाते रहें. धूप में जाने से भी बचें. किसी तरह की कोई एक्सरसाइज न करें. आर्टिस्ट द्वारा दिया गया हीलिंग ओइटमेंट या मोइस्चराइजर लगाते रहें.

टैटू बनवाने के बाद त्वचा को नौर्मल होने में 2 हफ्ते लग जाते हैं. टैटू के बाद त्वचा को खुजलाने से बचें. अगर आप जिम जाते हैं तो भी इस बात का खास खयाल रखें कि टैटू वाले जगह पर गलती से भी कोई चोट न लगे.

टैटू बनवाने के साइड इफैक्ट्स

टैटू बनवाने के साइड इफैक्ट्स आप को जिंदगीभर झेलने पड़ सकते हैं. जीवन में कभी भी एमआरआई करवाने के दौरान आप को त्वचा में जलन और दर्द की समस्या से जूझना पड़ सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टैटू बनाने में जिस इंक का इस्तेमाल होता है उस में आयरन औक्साइड होता है. एमआरआई मशीन में यह गरम होने लगता है. इस के अलावा सूर्य की किरणों से भी उस जगह का बचाव करना जरूरी हो जाता है. इसलिए आप सोचसमझ कर फैसला लें कि आप को परमानैंट टैटू बनवाना है या आप टैंपररी टैटू से काम चला लेंगे.

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