Dhurandhar 2 controversy : पिछले दिनों जब फिल्म ‘धुरंधर’ रिलीज हुई तो अति हिंसक व मारकाट से भरपूर फिल्म होने के बावजूद दर्शकों द्वारा सराही गई क्योंकि फिल्म पूरी तरह से देशभक्ति पर आधारित थी और दुश्मन देश को परास्त करने की कहानी पर केंद्रित थी.
इस के बाद मौके पर चौका मारते हुए ‘धुरंधर 2’ भी 19 मार्च को रिलीज हुई क्योंकि ‘धुरंधर’ की सफलता का नशा लोगों के दिमाग पर चढ़ा हुआ था, इसलिए ‘धुरंधर 2’ देखने के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ पड़ी. फिल्म रिलीज से पहले ही सारे टिकट बिक गए, जिस के चलते 19 मार्च के सुबहसुबह ही दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म देखने पहुंचे गए.
फिल्म को ले कर गुस्सा
जहां एक और ‘धुरंधर 2’ में फिल्म की कास्टिंग, बैकग्राउंड, म्यूजिक, डाइरैक्शन और रणवीर सिंह की अभिनय की तारीफ हुई, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों में गुस्सा है. दर्शकों ने हौल से बाहर निकल कर फिल्म को पूरी तरह से बीजेपी सरकार की तारीफ का प्रोपेगैंडा बताया. कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि गोदी मीडिया कम थी क्या बीजेपी का प्रचार करने के लिए जो डाइरैक्टर आदित्य धर ने भी बीजेपी की तारीफ में पूरी फिल्म बना डाली और इस फिल्म के जरीए मोदी सरकार की गुणगान करने का जिम्मा उठा लिया.
बीजेपी का प्रोपेगैंडा
जहां एक ओर लोग फिल्म मेकिंग की तारीफ करते नहीं थक रहे थे, वहीं दूसरी ओर इस फिल्म को पूरी तरह बीजेपी प्रोपेगैंडा फिल्म बोल कर डाइरैक्टर आदित्य धर को बीजेपी का सपोर्टर कहते हुए जनता के कटघरे में ला खड़ा किया है.
हालांकि इस से पहले भी कई फिल्में ऐसी बनी हैं जो मौजूदा सरकार को समर्थन देते हुए बनी हैं, लेकिन इस बार फिल्म में कई बातें ऐसी हैं जो मौजूदा सरकार की गलतियों पर परदा डालने के लिए कही गई हैं, जिस वजह से सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ‘धुरंधर 2’ में छिपी खामियों की बखिया उधेड़ना शुरू कर दिया है.
मोदी की तारीफ क्यों
एक फिल्मप्रेमी के अनुसार, जब फिल्म को शुरुआत में फिक्शन फिल्म बताते हुए सारे पात्र काल्पनिक कहे गए हैं तो फिर फिल्म में नरेंद्र मोदी को कैसे दिखाया गया? उन का नाम तक नहीं बदल गया और तो और ‘चायवाला जब से आया है…’ जैसे डायलौग फिल्म में क्यों रखे गए?
कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि डाइरैक्टर आदित्य धर को बीजेपी का टिकट चाहिए इसलिए उन्होंने ऐसी फिल्म बना कर फिल्म का प्रोपेगैंडा किया है.
चापलूसी की हद
गौरतलब है कि रणवीर सिंह की आउटस्टैंडिंग ऐक्टिंग, फिल्म मेकिंग, कास्टिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक व संजय दत्त, राकेश बेदी और अर्जुन रामपाल की बेहतरीन परफौर्मेंस की तारीफ को साइड में रख कर मौजूदा सरकार की तारीफों के पुल बांधे गए हैं. तारीफ करने के चक्कर में फिल्म की लंबाई जो आसानी से 3 घंटे में पूरी हो सकती थी वह 4 घंटे से ज्यादा की कर दी गई.
पिछले कई सालों में भाजपा ने जो गलतियां कीं उसे फिल्म में एक अलग वजह के साथ, जो मीडिया और सरकार को भी नहीं पता थी उसे सही ठहराया गया, जैसे नोटबंदी को आतंकवाद रोकने के लिए, पाकिस्तान से आने वाले नकली नोट को रोकने के लिए नोटबंदी की गई जैसे कारण बताए गए. इतने सारे फायदे खुद सरकार और मीडिया को भी नहीं पता थी जितना आदित्य धर ने फिल्म में दिखा दिए.
सिर्फ बीजेपी पैड
इतना ही नहीं, फिल्म में अपोजिट पार्टी कांग्रेस को आतंकवादी पार्टी तक बता दिया गया. अंडरवर्ल्ड डौन दाऊद इब्राहिम को अधमरा दिखा दिया गया जबकि इस में कहीं भी सचाई नजर नहीं आती, सिर्फ बीजेपी पैड पीआर नजर आता है, जिसे देख कर दर्शकों ने फिल्म की राजनीति को ले कर बुराई करनी शुरू कर दी. खास बात यह है कि 2026 के जून में ‘धुरंधर 3’ भी रिलीज हो रही है.
अपना काम बनता भाङ में जाए जनता
अब ‘धुरंधर 3’ में और क्या देखना बाकी है यह तो जून में ही पता चलेगा. बहरहाल, चुनाव में अपना पलड़ा भारी रखने के लिए ‘धुरंधर 2’ फिल्म बीजेपी के लिए मील का पत्थर जरूर साबित हो सकती है. हो सकता है कि उस वक्त स्लोगन हो ‘अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता.’
