Sameer lyricist : समीर बौलीवुड के जानेमाने गीतकार हैं, जिन्होंने 640 से अधिक फिल्मों में 4,500 से ज्यादा गाने लिखे हैं. वाराणसी में जन्में समीर मशहूर गीतकार अनजान के पुत्र हैं और उन्होंने फिल्म ‘आशिकी’ और ‘दिल’ जैसी फिल्मों से प्रसिद्धि पाई है. 3 से अधिक फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाले समीर के नाम सब से ज्यादा फिल्मी गाने लिखने का गिनीज वर्ल्ड रिकौर्ड दर्ज है.
उन्होंने शुरुआत में बैंक की नौकरी की, लेकिन गीतकार बनने के सपने के कारण उसे छोड़ दिया. वर्ष 1983 में ‘बेखबर’ फिल्म से उन्होंने कैरियर शुरू किया, लेकिन सफलता के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा. साल 1990 में फिल्म ‘दिल’ और ‘आशिकी’ फिल्मों के गानों ने उन्हें बौलीवुड के टौप गीतकार बना दिया.
फिल्म ‘बेटा’, ‘साजन’, ‘राजा बाबू’, ‘कुली नंबर 1’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘धड़कन’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘दबंग 2’ आदि फिल्मों के गीत को लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं.
समीर अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं. समीर फिल्मों में रोमांटिक और इमोशनल गीतों के लिए खास रूप से पहचाने जाते हैं.
नए टैलेंट को मौका देना जरूरी
अभी उन्होंने एक संगीत का प्लेटफौर्म ‘औमोरा म्यूजिक’ को लौंच किया है, जिस का उद्देश्य नई प्रतिभाओं को इस में शामिल कर नएनए रोमांटिक और इमोशनल गानों को लोगों तक पहुंचाना है।
वे कहते हैं कि संगीत की जो दुर्दशा हो रही है, वह अच्छा काम करने वालों के लिए तकलीफदेय है। फिल्मों की कहानियां कमजोर हो चुकी हैं, गाने अब डाले नहीं जा रहे, परिस्थितियां भी फिल्मों में गानों की नहीं बन रही हैं। ऐसे में जो प्रतिभावान नए गीतकार हैं, वे इधरउधर भटक रहे हैं। उन्हें अपनी प्रतिभा को दिखाने का मौका नहीं मिल रहा है।
वे कहते हैं कि यह सब बातें दिमाग में आने की वजह से मैं ने एक म्यूजिक प्लेटफौर्म क्रिएट करने के बारे में सोचा, जिस पर मैं ने केवल यहां ही नहीं, पूरी दुनिया के टैलेंट को आमंत्रित किया है. अगर उन में मुझे टैलेंट दिखता है, तो मैं उन्हें प्रमोट कर पूरे विश्व में सिंगिंग के मंच पर प्रस्तुत करूंगा और एक अच्छा संगीत क्रिएट करना जहां क्रिएटिव फ्रीडम होगा, जिस में आप वह काम करेंगे, जिसे आप करना चाहते हैं और जो पहले हुआ करता था.
वे कहते हैं कि इस में अगर कोई टैलेंटेड व्यक्ति है, जिस के गाने अच्छे हैं और आप का एक सपना आगे बढ़ने का है, तो आप के गाने को जनजन तक पहुंचाने का वादा मैं कर सकता हूं. इस में जो लोग इच्छा रखते हैं, वे अपने काम के साथ मुझ से आ कर मिल सकते हैं. उस के हिसाब से मैं उन के संगीत को सुन कर आगे बढ़ाऊंगा. यह करना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि मैं ने 40 साल इंडस्ट्री में बिताए हैं और एक सुर से ही सब समझ में आ जाता है. उस के हिसाब से ही उन्हें प्रमोट किया जाएगा.
मेहनत से कतराते हैं फिल्ममेकर
पुराने गानों को रीक्रिएट कर नए रूप में फिल्मों में डालने को ले कर गीतकार समीर नाखुश हैं। उन का कहना है कि कहानियां और उन के सिलैक्टर नहीं हैं, किरदार नहीं हैं, इसलिए पुराने हिट गानों को किसी तरह ‘फिल इन द ब्लैंक’ की तरह रीक्रिएट कर कैसे भी डाल दिया जाता है. उन्हें पता है कि गाना हिट था, लोग उस से जुड़ चुके हैं, तो वह चल ही जाएगा.
समीर बताते हैं कि फिल्ममेकर की सोच ऐसी है कि वे मेहनत नहीं करना चाहते और 3-4 घंटे किसी संगीत निर्देशक के पास बैठ कर फिल्म की सिचुऐशन के हिसाब से गाना लिखवाने का धैर्य उन के पास नहीं है. उन को फिल्म नहीं प्रपोजल बनाना है.
अभिनेता शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान मिल गए, बस हो गया। संगीत में कुछ करने की जरूरत नहीं है, उसी का हश्र आज देखने को मिल रहा है. इंडस्ट्री खत्म होती जा रही है. अगर आप अच्छा काम नहीं करेंगे, तो आप की शक्ल और ब्रैंड से दर्शक खुश नहीं हो सकते क्योंकि दर्शकों को अच्छा काम चाहिए. अच्छी फिल्म न हो तो दर्शक उसे देखने नहीं जाएंगे. इसलिए ऐसी फिल्में नहीं चल सकतीं.
बदली है कहानियों का दौर
समीर कहते हैं कि फिल्मों की अच्छी कहानियों का दौर अब खत्म हो गया है क्योंकि समाज, देश, पीढ़ी बदल गई है. आज की नई जैनजी जैनरेशन में इमोशन की कमी है। गलती हमारी है क्योंकि हम ने उन्हें वैसी परवरिश नहीं दी. उन्हें हमारी संस्कृति से परिचय नहीं करवा पाए। उन्हें किताबें और कहानियां पढ़ने की आदत नहीं डलवाई गई। आज के बच्चे मोबाइल और रील्स पर लगे हैं। उसी का असर देखने को मिल रहा है.
वे कहते हैं कि जब फिल्म ‘बागवान’ बनी थी, तो कितने बच्चे अपने पेरैंट्स को ओल्डहोम से घर ले आए थे? आज के बच्चों का इमोशन काफी बदल चुका है. इमोशन को वे मेलड्रामा कहते हैं, उस की बात वे नहीं करना चाहते. अगर आज का पिता कोई बात बेटे से कहना चाहता है तो बेटा तुरंत कह उठता है कि पिताजी, आप समझ नहीं रहे हो. ऐसे में पिता के लिए भी आगे कहने के लिए कुछ नहीं होता. ये सारे बदलाव की वजह से शोर अधिक हो चला है, आबादी बहुत बढ़ चुकी है, ऐसे में साउंड हावी होता जा रहा है और शब्द खोते जा रहे हैं.
पुराने गीत आज भी लोकप्रिय
समीर आगे कहते हैं कि देखा जाए तो आज की जैनरेशन उन पुराने गानों को ही सुनना पसंद करती है क्योंकि सीने में दिल तो सभी के पास है और इन गानों को सुनने से उन्हें सुकून मिलता है. यही सचाई है, जिसे नकारा नहीं जा सकता.
वे कहते हैं कि आज के फिल्ममेकर को लगता है कि केवल सैक्स और वायलैंस बिकता है, जबकि ऐसा नहीं है. आप एक अच्छी फिल्म बनाने का साहस करेंगे, तब जा कर कुछ अच्छा बनेगा.
समीर कहते हैं कि फिल्ममेकर नासिर हुसैन ने एक नए लड़के आमिर खान और नई लड़की जूही को ले कर फिल्म ‘कयामत से कयामत’ तक बनाई जो हिट रही. मैं कहता हूं कि आप कुछ नया बनाने की हिम्मत तो करिए, फिर देखिए क्या होता है. वे घबराए और डरे हुए होते हैं। अभी फिल्म ‘धुरंधर’ चली, तो सभी धुरंधर ही बना रहे हैं. ऐसा थोड़े ही होता है कि आप अपनी गलतियां दर्शकों पर थोप देते हो कि उन्हें यही पसंद है.
समीर कहते हैं कि सिनेमा में बदलाव है। अगर कोई 3-4 घंटे बैठ कर एक फिल्म को देख सकता है तो इस में कुछ बात जरूर होगी क्योंकि दर्शकों को आप बेवकूफ नहीं बना सकते। इस का अर्थ यह हुआ कि पिक्चर अच्छी बनी है. ‘शोले’, ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों को भी 4 घंटे बैठा कर दर्शकों को आप दिखा सकते हैं, लेकिन उस के लिए आप को वैसी फिल्म बनानी पड़ेगी, जिसे देखने में दर्शकों को अच्छा लगे. बिना मेहनत के आप उसे बनाएंगे, तो दर्शक हौल तक देखने नहीं जाएंगे. फिल्ममेकर में कन्वैक्शन की कमी है और वे भेड़चाल में चलने लगते हैं, इसलिए फिल्में फ्लौप होती हैं.
नहीं कमी लेखकों की
लेखकों की कमी के बारे में पूछने पर समीर कहते हैं कि दुनिया वीरों से कभी खाली नहीं होती. लेखकों से काम करवाने वालों की कमी हो गई है. मेरे बच्चे इस फील्ड में अभी आए नहीं हैं, लेकिन मेरा बेटा डाइरैक्टर बनना चाहता है, जो उस की मेहनत और काबिलियत पर निर्भर करेगा.
आज के यूथ का खराब वक्त
कई बड़ेबड़े संगीत निर्देशक, गीतकार, गायक, गायिका अब नहीं रहे, लेकिन उन की जगह बहुत कम लोगों ने पूरी की है. आज के अरिजीत जैसे पौपुलर सिंगर भी सन्यास ले चुके हैं.
समीर कहते हैं कि ऐसे लोगों की कमी को पूरा करना आसान नहीं, ऐसे रत्न एक ही पैदा हो कर पूरी दुनिया को उजाला दे कर चले गए. अच्छी बात यह रही कि उन्होंने कई पीढ़ियों को देखा, गाया, जिया और अपनी छाप छोड़ी. आज के यूथ को बुरे समय से गुजरना पड़ रहा है, ऐसे में वे कैसे आशा भोंसले, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार बन पाएंगे? मेरे लिए अच्छी बात यह रही कि मैं ने 90 के दशक का अच्छा समय जी लिया है, इसलिए आजतक सरवाइव कर पाए. आज भी श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान, अरिजीत सिंह जैसे सिंगर आए, लेकिन उन्हें अच्छा काम नहीं मिल रहा है। कौंसर्ट कर और पुराने गानों को गा कर वे कितने दूर जा सकते हैं. आज कोई मौका नए सिंगर के पास नहीं है, इसलिए वे सन्यास ले रहे हैं.
समीर कहते हैं कि आज इंडस्ट्री में सभी को अच्छे और बुरे दौर में धैर्य से गुजरना पड़ेगा. इसलिए मैं ने औमोरा म्यूजिक प्लेटफौर्म को लौंच किया है क्योंकि आज अच्छे अलबम खूब चलते हैं क्योंकि पूरी दुनिया डिजिटल हो चुकी है. इसलिए अच्छे गाने आज भी सुने और देखे जाएंगे.
