Sara Arjun : फिल्म ‘धुरंधर’ की बौक्स औफिस पर शानदार सफलता के मद्देनजर यंग ऐक्ट्रैस सारा अर्जुन लगातार कई प्रोजैक्ट्स पर काम करने की तैयारी में जुटी हैं. हालांकि, हिंदी सिनेमा देखने वालों के लिए सारा अर्जुन का चेहरा नया नहीं है. फर्क इतना है कि कभी वे मासूम सी बच्ची के रोल में दिखती थीं, आज एक लीड ऐक्ट्रैस के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं. सवाल यही है कि क्या बचपन की लोकप्रियता बड़े होने पर भी टिक पाती है या फिर यह चमक कुछ समय बाद फीकी पड़ जाएगी?

बचपन से कैमरे की दुनिया में

सारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में ही कैमरे का सामना करना शुरू कर दिया था. उन्होंने सैकड़ों विज्ञापनों में काम किया और जल्दी ही एड फिल्म्स की स्टारकिड बन गईं. कुछ लोग सारा को ‘धुरंधर’ फिल्म के बाद से जानने लगे हैं. औडियंस का रक समूह ऐसा भी है जो सारा को क्लिनिक प्लस शैंपू की स्टारगर्ल के तौर पर देखता है. अपनी ऐक्टिंग के जरिए सारा ने हर बार लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ी है.

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तमिल फिल्म ‘देइवा थिरुमगल’ में उन्होंने विक्रम की बेटी का किरदार निभाया. इस फिल्म में उन की मासूमियत और भावनात्मक अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया. कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि इतनी छोटी उम्र में इतना नैचुरल अभिनय कम ही देखने को मिलता है.

इस के बाद हिंदी सिनेमा में उन्होंने ‘एक थी डायन’ (2013), ‘जय हो’ (2014) जैसी फिल्मों में अभिनय किया और बाद में ‘सांड की आंख’ जैसी फिल्मों में दिखाई दीं.

टैलेंट की कोई कमी नहीं

सारा अर्जुन की सब से बड़ी ताकत उन की स्क्रीन प्रेजैंस रही है. बचपन में ही उन्होंने जो आत्मविश्वास दिखाया, वह किसी अनुभवी कलाकार से कम न था. कई साउथ फिल्मों में भी उन्होंने मजबूत किरदार निभाए और क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई.

उन की एक खास बात यह भी रही कि उन्होंने ओवरऐक्टिंग से बचते हुए सहज अभिनय किया. यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ क्यूट बच्ची नहीं, बल्कि अच्छी कलाकार के रूप में देखते थे.

लेकिन हर कैरियर में उतारचढ़ाव आते हैं. जैसेजैसे सारा बड़ी हुईं, उन के लिए रोल चुनौतीपूर्ण होते गए. बचपन का क्यूट फैक्टर धीरेधीरे खत्म हो जाता है और फिर असली परीक्षा शुरू होती है.

कई चाइल्ड आर्टिस्ट बड़े हो कर इंडस्ट्री में अपनी जगह नहीं बना पाते. उन के सामने नई ऐक्ट्रैसेस की भीड़ होती है, जिन में से कुछ के पास बड़ा बैकग्राउंड या मजबूत पीआर टीम होती है. सारा के साथ भी यही चुनौती है.

लेकिन फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ के बाद एक बार फिर सारा लाइमलाइट में आ चुकी हैं. वैसे तो इस फिल्म के हर किरदार ने वाहवाही लूटी लेकिन अपने चार्म और उम्र से बड़े रणवीर सिंह के साथ रोमांस को ले कर सारा ने सब का ध्यान अपनी ओर खींचा. ऐसे में यही कयास लगाए जा रहे हैं कि उन के लिए आगे के रास्ते खुल सकते हैं.

आप को बता दें कि ‘धुरंधर’ के बाद अब सारा तेलुगू की एक फिल्म ‘यूफोरिया’ में लीड रोल में नजर आईं और यहां भी उन्होंने नेटिजंस की वाहवाही लूटी. इस के बाद अब मार्च में रिलीज होने जा रही ‘धुरंधर 2’ में भी सारा नजर आई.

क्या आगे भी दिलों में जगह बना पाएंगी

सारा के पास टैलेंट है, लुक्स है, चार्म है, यह बात उन के शुरुआती काम से साबित हो चुकी है लेकिन आज का बौलीवुड और साउथ इंडस्ट्री दोनों ही बहुत प्रतिस्पर्धी हैं. यहां सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्रेजैंस, ग्लैमर, पब्लिक इमेज और सही प्रोजैक्ट चुनना भी मायने रखता है.

अगर उन्होंने एकजैसी भूमिकाओं में खुद को सीमित रखा तो हो सकता है कि उन का कैरियर भी कई ऐक्ट्रैसेस की तरह ठंडा पड़ जाए, जो एकदो फिल्मों के बाद गायब हो गईं.

सारा के पास अभी उम्र है और मौके भी. अगर वे स्क्रिप्ट को समझदारी से चुनें, ओटीटी प्लेटफौर्म्स पर मजबूत किरदार निभाएं और खुद को सिर्फ ग्लैमर तक सीमित न रखें तो वे लंबी रेस की खिलाड़ी बन सकती हैं.

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