Smart cooking tips : हम  सभी डस्टबिन का उपयोग उस सामान को रखने या डालने के लिए करते हैं जिस की हमें आवश्यकता नहीं होती या जो हमारे लिए बेकार होता है तो फिर पेट भर जाने के बाद बचा हुआ खाना आप पेट में क्यों रखना चाहते है, फ्रिज या फ्रीजर में क्यों नहीं या रीसाइकल, रियूज क्यों नहीं?

संडे यानी छुट्टी का दिन. आज सक्सेना परिवार एकसाथ दोपहर के खाने के लिए टेबल पर बैठा, जब टेबल पर खाना आया तो सामने स्वादिष्ठ भोजन देख कर सभी खाना खाने लग गए.

सभी ने अपनीअपनी पसंद का भर पेट खाना खाया लेकिन जैसे ही मिसेज सक्सेना की नजर टेबल पर बचे खाने पर पड़ी तो उन्होंने बच्चों से उसे खत्म करने का यह कहते हुए आग्रह किया कि देखो मैं ने कितनी मेहनत से यह डिश बनाई है, अब इतना सा खाना किसे देंगे? खाना कहां फ्रिज में रखूंगी, कल तो मेड भी नहीं आएगी वैगरहवैगरह. इतना सा तो है.

चलिए जल्दी से सब मिल कर खत्म कर देते हैं. तब सब ने वह खाना जबरदस्ती इच्छा न होते हुए भी खाया.

अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या सक्सेना परिवार का बचा खाना खाना चाहिए था या फिर फ्रिज या फ्रीजर में रखना चाहिए था या फिर उसे रीसाइकल, रियूज करने के बारे में सोचना चाहिए था न कि पेट में जबरजस्ती डालना चाहिए था?

कहीं ऐसा न हो जाए कि बचे खाने को खत्म करने के चक्कर में आप अपने पेट को डस्टबिन बना लें और ओवरईटिंग के शिकार हो जाए और फिर शरीर को बीमारियों का घर बना लें. इसलिए ऐसा करने के पहले सतर्कता और सावधानी आवश्यक है.

इस से बचने के लिए जैसे हम जीवन में बाकी महत्त्वपूर्ण कामों और फैसलों को लेने में सावधानी बरतते हैं, ठीक वैसे ही अपने पेट में कुछ डालने से पहले विचार करना और सावधानी बरतना आवश्यक है क्योंकि जो भी हम खा रहे हैं वह शरीर के साथ कैसा व्यवहार करने वाला है, साथ ही शरीर उस चीज के साथ कैसा व्यवहार करेगा.

क्या वह फूड शरीर को पोषण देगा या उसे नुकसान पहुंचाएगा यह सोचना और समझना आवश्यक है ताकि आप का पेट डस्टबिन न बने और आप ओवरईटिंग के शिकार होने से बच सकें.

इस के लिए इन तरीकों को अपना सकते हैं:

तरीका 1: खाने को करें रीसाइकल: घर पर बचे हुए भोजन को एक गड्ढे में डाला जा सकता है और खाद में परिवर्तित किया जा सकता है जिस का उपयोग घर के बगीचे में खाद की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं और रासायनिक खाद के उपयोग से बचा जा सकता है इस तरह घर पर बचे भोजन को जबरदस्ती खाने के बजाय बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकता है एवं ओवरईटिंग के शिकार होने से भी बचा जा सकता है.

तरीका 2: खाने को करे रियूज कुछ इस तरह: बचे खाने का उपयोग कुछ टेस्टी डिशेज बना कर किया जा सकता है जैसे:

सब्जियों का बनाएं सूप

बची सब्जियों को फेंकने के बजाय उन का सूप बना सकते हैं. इस के लिए सब्जियों को पानी में डाल कर पकाएं और फिर सूप के लिए प्यूरी तैयार करें.

अब प्यूरी और सब्जियों को मिक्स करें. इस में कालीमिर्च व स्वाद के लिए चाट मसाला, धनियापत्ती डालें. यह पूरी तरह से पौष्टिक सूप बन जाएगा.

रोटी से बनाएं क्रिस्पी चिप्स

द्य अगर रात की रोटियां बच जाती हैं और आप उन्हें रियूज करना चाहती है तो इस के लिए रोटियों को छोटेछोटे टुकड़ों में काट लें. इस के बाद कड़ाही में तेल गरम कर के इन्हें डीप फ्राई करें. अब इस में कालीमिर्च, चाट मसाला व हलका नमक बुरक कर पापड़ या चिप्स की जगह खाएं.

या रोटी पोहा

इस के लिए रोटियों को मिक्सर में बारीक पीस लें. अब इसे प्याज, हरीमिर्च, राई आदि से बघार कर इसे पोहे की तरह बनाया जा सकता है.

बची दालसब्जी से बनाएं परांठे

रात की बची दालसब्जी का इस्तेमाल परांठे बनाने के लिए करें. इस के लिए दालसब्जी को आटे में डालें.

इस में हलदी, लालमिर्च, कटी हरीमिर्च, धनियापत्ती और हलका नमक मिला कर गूंद लें. अब परांठे बना कर दही, आचार के साथ सर्व करें.

चावल से बनाएं कटलेट

अगर चावल बच जाएं तो उन्हें कटलेट, खीर या राइस पापड़ बनाने के लिए रियूज करें.

कटलेट बनाने के लिए चावल मैश करें. इस में मसली दाल या धनियापत्ती और मसाले मिलाएं. इसे कटलेट के आकार दे कर डीप फ्राई करें.

द्य खीर बनाने के लिए आप पैन में चावल, दूध, चीनी व हलकी सी इलायची डाल कर पकाएं.

द्य पापड़ बनाने के लिए चावल को पानी के साथ उबालें, फिर उस में जीरा और नमक मिलाएं और पापड़ की तरह थाली पर फैला कर सुखाएं और सूखने पर उन्हें डीप फ्राई कर खाएं.

खोजें विकल्प

यदि आप के घर पर खाना बच जाए

और आप उसे नहीं खाना चाहते हैं तो इसे जबरदस्ती पेट में डालने की बजाय ये विकल्प अपना सकते हैं:

द्य किसी जरूरतमंद या मेड आदि को दे दें.

द्य खाना उतना ही बनाएं जितना आवश्यक हो. कोशिश करें खाना बचने की नौबत ही न आए.

शुरुआत में थाली में कम ही परोसें या सर्व करें यानी छोटी शुरुआत करें.

जब घर से बाहर जाएं तब कम क्वांटिटी में खाना और्डर करें. साथ ही सब से पूछ कर ही खाना और्डर करें. आराम से खाने का आनंद लें. जल्दी न करें ताकि आप के दिमाग और पेट का कम्युनिकेशन बना रहे.

एक साथ बहुत ज्यादा खाना और्डर करने के बजाय थोड़ाथोड़ा खाना मंगवाएं और आवश्यकता होने पर दोबारा मंगवा लें ताकि खाना न बचे और आप ओवरईटिंग से बच सकें.

ध्यान रहे हमें खाने के मामले में अपने पेट को डस्टबिन नहीं बनाना और समझना चाहिए, बल्कि इसे फ्रिज में रखने और इसे रीसाइकल, रियूज करने के बारे में सोचना चाहिए.

आखिर भोजन तन और मन दोनों को प्रभावित करता है.

बड़े काम का स्मार्ट स्लो कुकर

कहीं एलपीजी गैस की समस्या, तो कहीं फ्यूल की और इन समस्याओं से निबटने की सारी जिम्मेदारी सिर्फ हाउसवाइफ की. अब हाउसवाइफ क्या करें, समय पर बच्चे को और पति को खाना तो देना ही है. एलपीजी की समस्या जब सुल?ोगी तब सुल?ोगी लेकिन तब तक के लिए कुछ स्मार्ट कुकिंग औप्शंस क्यों न ट्राई किए जाएं. आजकल मार्केट में या औनलाइन स्मार्ट स्लो कुकर बहुत पौपुलर हैं. इन कुकर्स के स्मार्ट कुकिंग औप्शंस को सिलैक्ट कर के आप दाल, राइस, सूप और सब्जी के अलावा और भी डिशेज बना सकती हैं. इतना ही नहीं ये ऐनर्जी एफिशिएंट भी होते हैं और इन्हें किचन में रखते ही मौडर्न किचन लुक भी आता है. सब से बड़ी बात कि मनचाहा कुकिंग औप्शन प्रैस कर आप आराम से अपना दूसरा काम निबटा सकती हैं. तो एलपीजी के झंझच और हर समय किचन में रहने की मजबूरी से उबरना है तो ऐसे स्मार्ट कुकिंग गैजेट्स पर इन्वैस्ट जरूर करें. 7 हजार से शुरू हो कर इन की कीमत 10 हजार तक हो सकती है.

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