Healthy lifestyle  : 32 साल की निशा को अचानक औफिस से आते समय चक्कर आने लगे. उस ने डाक्टर से कंसल्ट किया तो पता चला कि उसे विटामिन डी की डैफिशिएंसी है. उसे बाद में विटामिन डी के शौट्स और गोलियां लेनी पड़ीं, जिस से उस का चक्कर आने कम हुए. आज भी उसे साल में एक बार मैडिकल टैस्ट करवाना ही पड़ता है ताकि डैफिशिएंसी का पता चल सके.

कई रिसर्च में भी यह बात सामने आई है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कुपोषण का प्रतिशत लगभग 2.5 से 3 प्रतिशत अधिक है. इस में ऐनीमिया के मामले में महिलाएं पुरुषों से दोगुनी से भी अधिक संख्या में ग्रस्त होती हैं.

इस बारे में गुरुग्राम मदरहुड अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञा, लैप्रोस्कोपिक सर्जन, डा. प्राची सारिन सेठी कहती हैं कि मैं अकसर 30 साल की लड़कियों को देखती हूं जो अपने कैरियर, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए खुद के स्वास्थ्य को नजरअंदाज करती हैं. इस उम्र में शरीर को सही पोषण की बहुत जरूरत होती है लेकिन ध्यान न देने पर कई जरूरी पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि 30 के बाद स्त्रियों को पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है.

पोषण में कमी की वजह

30 साल के बाद स्त्रियों में पोषण की कमी के कई कारण हो सकते हैं:

हारमोन में बदलाव: इस उम्र में शरीर के हारमोन बदलते हैं. इस का असर शरीर में पोषक तत्त्वों के इस्तेमाल पर पड़ता है खासकर कैल्शियम और विटामिन डी की जरूरत बढ़ जाती है जो हड्डियों के लिए जरूरी होते हैं.

शरीर की बढ़ती जरूरतें: प्रैगनैंसी, स्तनपान और हर महीने होने वाले पीरियड्स के कारण शरीर में आयरन, फोलेट और कैल्सियम की ज्यादा मात्रा होनी जरूरी है. कई बार महिलाएं इस कमी को संतुलित भोजन से पूरा नहीं कर पातीं.

लाइफस्टाइल और खानपान: आजकल की व्यस्त जिंदगी में स्त्रियां जल्दी बनने वाला और बाहर का खाना ज्यादा खाती हैं ऐसे में खाने में पोषण कम और कैलोरी ज्यादा होती है.

पीरियड्स में खून की कमी: हर महीने पीरियड्स के दौरान खून की कमी होती रहती है, जिस से शरीर में आयरन की कमी होने लगती है खासकर जब पीरियड्स लंबे समय तक चलते हों.

पोषण की कमी और उन के लक्षण

30 की उम्र के बाद खास पोषक तत्त्वों की कमी अधिक देखने को मिलती है, जो निम्न है:

शरीर में आयरन की कम के कारण थकान, कमजोरी, चक्कर आना, चेहरा फीका पड़ना और बाल झड़ना जैसी समस्याएं होती हैं, ज्यादा कमी होने पर ऐनीमिया का खतरा बढ़ता है.

कैल्सियम की कमी की वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आगे चल कर फ्रैक्चर या औस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है.

विटामिन डी हड्डियों, इम्युनिटी और मूड के लिए काफी जरूरी है. इस की कमी से शरीर दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और बारबार बीमार पड़ना हो सकता है.

फोलेट की कमी के कारण थकान होती है और जो स्त्रियां प्रैगनैंसी प्लान कर रही हैं उन में बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है.

पोषण की कमी से जुड़ी स्त्रीरोग समस्याएं

डाक्टर प्राची कहती हैं कि अगर शरीर में न्यूट्रिशन की कमी हो तो कई स्त्रीरोग समस्याएं भी बढ़ सकती हैं:

पीसीओएस: खराब खानपान और विटामिन डी की कमी से हारमोनल समस्या और इंसुलिन रिजिस्टैंस बढ़ सकता है.

ऐंडोमीट्रिओसिस: सही पोषण न मिलने से शरीर में सूजन और दर्द बढ़ सकता है.

पीरियड्स में गड़बड़ी: आयरन, विटामिन बी12 और मैग्नीशियम की कमी से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ज्यादा दर्द हो सकता है.

प्रैगनैंसी में दिक्कत: फोलेट, आयरन और जिंक की कमी से गर्भधारण में समस्या आ सकती है.

इस के अलावा शरीर में पोषण के कमी के कारण स्वास्थ्य को कई अन्य बीमारियों का खतरा भी बन सकता है, जिन में हड्डियों का कमजोर होना (औस्टियोपोरोसिस), ऐनीमिया, दिल की बीमारी (जैसे हाई ब्लड प्रैशर, हाई कोलैस्ट्रौल), कुछ तरह के कैंसर भी हो सकते है.

ध्यान देना जरूरी

सही पोषण लेने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है, वजन कंट्रोल रहता है, हारमोन संतुलित रहते हैं और मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है. ऐसे में छोटीछोटी अच्छी आदतें लंबे समय में बड़ा फायदा देती हैं.

रोज संतुलित और घर का खाना

खाने की कोशिश करें. खाने में फल, सब्जियां, दालें, अनाज और प्रोटीन जरूर शामिल करें.

पोषण के लिए खास चीजें हैं आयरन के लिए, पालक, दाल, बींस, कैल्सियम के लिए दूध, दही, हरी सब्जियां, विटामिन डी के लिए धूप, अंडे, मछली, फोलेट के लिए हरी सब्जियां, फल, साबूत अनाज आदि.

मगर समयसमय पर डाक्टर से नियमित जांच करवाती रहें ताकि आप को किसी भी कमी का एहसास पहले से हो सके. इस के अलावा गरमी के मौसम में पानी और तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें ताकि आप हमेशा हाइड्रेटेड रहें.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...