Pregnancy and relationship : ‘बौयफ्रैंड, प्रैगनैंट गर्लफ्रैंड को छोड़ कर भागा…’ इस तरह की घटनाएं आएदिन देखनेसुनने को मिलते हैं। अखबारों और सोशल मीडिया में इस तरह की घटनाएं लगभग हर रोज दिख ही जाती हैं. मगर इस के बाद लड़की की असली मुसीबत आती है. तब तो मजेमजे में सैक्स कर लिया लेकिन अब मुसीबत गले पङ गई, बौयफ्रैंड भाग गया। घर वालों को बता नहीं सकती। हौस्पिटल अकेली जाते डर लगे, तो फिर ऐसे में करें तो क्या करें?
अनचाहे गर्भ के बारे में पता चलते ही हर लड़की के मन में कई सवाल उठते हैं- जैसेकि अब मैं इस बच्चे से छुटकारा कैसे पाऊं? क्या इस समय गर्भपात की गोली खाना सुरक्षित है या फिर मैडिकल टर्मिनेशन औफ प्रैगनैंसी (एमटीपी) कराने की जरूरत है? गर्भपात की गोली के साइड इफैक्ट्स क्या हैं? ऐसे में बौयफ्रैंड की जरूरत सब से ज्यादा होती है.
अगर आप भी अनचाहे गर्भ के बारे में सोच कर परेशान हैं, तो यहां गर्भपात से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
बौयफ्रैंड ऐसा हो जो प्रैगनैंसी में साथ दें
आप कितना भी कुछ कंडोम वगैरह यूज कर लें लेकिन एक्सिडेंट कभी हो सकता है. इसलिए ध्यान रखें कि अगर आप प्रैगनैंट हो गईं तब क्या आप का बौयफ्रैंड इस में आप का साथ देगा? इस सवाल का जवाब खुद से भी पूछें और बौयफ्रैंड से भी पूछें? क्योंकि ऐसा हुआ तो आप बहुत बड़ी मुश्किल में पङ जाएंगी। बगैर शादी के बच्चा रखने का तो सवाल ही नहीं है, लेकिन इस बच्चे से छुटकारा पाने के लिए भी आप को बौयफ्रैंड की जरूरत होगी।
अगर आप किसी हौस्पिटल में यह सब करवाती हैं तब भी और अगर खुद दवाइयां ले कर खाती हैं तब भी मैंटली और फिजिकली दोनों ही तौर पर साथी चाहिए। इसलिए यह सब करने से पहले तय कर लें और ऐसे समय बौयफ्रैंड साथ देगा तभी आगे बढ़ें।
प्रैगनैंट हो गई हैं, तो जान लें क्या होता है :
सर्जिकल अबौर्शन (Surgical Abortion)
डाक्टर द्वारा एक छोटी सी सर्जिकल प्रक्रिया या औपरेशन के जरीए गर्भ को बाहर निकालना सर्जिकल अबौर्शन कहलाता है.
मैडिकल अबौर्शन
मैडिकल अबौर्शन को अगर एक लाइन में परिभाषित करें तो यह अबौर्शन पिल्स की मदद से होने वाला अबौर्शन है जिस में ये गोलियां गर्भाशय की लाइनिंग को खत्म कर देती हैं। इस से भ्रूण गर्भाशय से अलग हो कर नष्ट हो जाता है।
मैडिकल अबौर्शन की प्रक्रिया
पहला दिन : मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone)
-डाक्टर पहले अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट करते हैं।
-मिफेप्रिस्टोन (200 एमजी) की गोली दी जाती है।
-यह दवा गर्भावस्था को बनाए रखने वाले हारमोन (Progesterone) को रोकती है।
-गोली लेने के बाद घर जा सकती हैं।
दूसरा-तीसरा दिन : मिसोप्रोस्टोल (Misoprostol)
-24 से 48 घंटे बाद मिसोप्रोस्टोल दी जाती है (मुंह से या योनि में)
-यह दवा गर्भाशय को सिकोड़ती है।
-1 से 4 घंटे में ऐंठन और रक्तस्राव शुरू होता है।
-भ्रूण की ऊतकें योनि मार्ग से बाहर निकल जाती हैं।
-प्रक्रिया 7–10 दिनों में पूरी होती है।
2 सप्ताह बाद :
-अल्ट्रासाउंड से पुष्टि होती है कि गर्भपात पूर्ण हुआ।
गर्भपात की गोली खाने के बाद क्या होता है? आइए, जानते हैं कि यह दवा किस तरह काम करती है :
-प्रोजेस्टेरोन हारमोन को बनने से या उस के क्रियाविधि को रोकती है।
-मायोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरुनी मध्य परत) को संकुचित करती है।
-ट्रोफोब्लास्ट (Trophoblast) को बढ़ने से रोकती है। ट्रोफोब्लास्ट वे कोशिकाएं होती हैं, जो भ्रूण को पोषण देती हैं और प्लेसेंटा को विकसित करती हैं।
अबौर्शन पिल्स से गर्भपात करना कितना सफल रहता है
अगर यह अबौर्शन पिल्स की मदद से डाक्टर की देखरेख में किया जाता है, तो इस का सक्सैस रेट 95 से 98% तक रहता है। लेकिन अगर किसी वजह से कोई प्रौब्लम हो जाती है तो मैडिकल अबौर्शन के बाद सर्जिकल अबौर्शन की जरूरत पड़ती है, लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है।
ध्यान दें
गर्भपात की गोली या अबौर्शन पिल्स हमेशा डाक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए क्योंकि कई बार पूरी तरह से पिल्स से नहीं होता इसलिए अल्ट्रासाउंड कर के देखना पड़ता है कि पूरा अबौर्शन हो गया है या कुछ अभी बचा है ताकि बाद में कोई इन्फैक्शन या परेशानी न हो.
लेकिन अगर आप घर पर खुद ही ये पिल्स लेने की सोच रही हैं तो इस के बारे में आप को पूरी जानकारी होनी चाहिए और साथ ही बाद में एक अल्ट्रासाउंड जरूर करा लें. अगर टिश्यूज पूरी तरह बाहर नहीं निकल रहे हों, तो डाक्टर दवाएं दे सकते हैं जो गर्भाशय को साफ करने में मदद करती हैं और अगर पिल्स लेने के बाद तबियत ज्यादा बिगड़ रही हो तो तुरंत डाक्टर के पास जाएं।
तुरंत डाक्टर से मिलें
जितनी जल्दी मिलें, उतना बेहतर। 9 सप्ताह तक मैडिकल अबौर्शन संभव है जो सब से आसान तरीका है।
देरी न करें
जितना अधिक समय बीतेगा, प्रक्रिया उतनी जटिल होगी।
गोपनीयता की चिंता न करें
कानून के तहत डाक्टर को आप की जानकारी गोपनीय रखनी होती है।
(किसी भी तरह की दवा लेने से पहले चिकित्सकीय जांच व सलाह बेहद जरूरी है)
