Relationship advice : पुलिस जांच के मुताबिक, 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश उन की मंगेतर सिया गोयल ने अपने बौयफ्रैंड चेतन चौधरी के साथ मिल कर रची थी.

केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और दोनों इस साल नवंबर में शादी करने वाले थे. पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं.

इसी तरह की घटना में सोनम रघुवंशी भी पकड़ी जा चुकी है. सोनम ने अपने बौयफ्रैंड के साथ मिल कर हनीमून पर अपने पति को मार डाला. नीले ड्रम की कहानी भी आप सभी को पता है.

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क्या करें

दरअसल, अब बौयफ्रैंड 14-15 साल में ही बनने लगे. लेकिन इस को 28 साल तक की उम्र तक निभाना काफी मुश्किल काम है. अब बहुत सारे लड़कों में से एक लड़के को ढूंढ़ते हो, इस को निभाना और छोड़ना दोनों ही मुश्किल है.

ये जो भी हाल ही में 2-3 घटनाएं हुई हैं- सिया, सोनम और नीले ड्रम वाली, इन में न लड़की इतनी सक्षम थी कि अपने पैरों पर खड़ी हो सके और न बौयफ्रैंड इतना सक्षम था कि वह कमा कर खिला सके और एक अच्छा लाइफस्टाइल दे सके.

आज शहरों में रहना बहुत मुश्किल हो गया है. जिस तरह की लाइफस्टाइल इन जोड़ों को अपने घर में आसानी से मिल जाएगी उतना वे खुद से नहीं कर सकते. आज जिस लाइफस्टाइल को वे जी रहे हैं क्या बौयफ्रैंड सेम लाइफस्टाइल अपने सैलेरी से दे सकता है? शायद नहीं क्योंकि आज सिंपल घर चलाने के लिए भी बहुत पैसा चाहिए. इसलिए बच्चों के नजर मांबाप के पैसों पर भी होती है. पेरैंट्स का पैसा भी उन्हें चाहिए. इसलिए लड़की मांबाप को भी नाराज नहीं करना चाहती और अपने बौयफ्रैंड को भी नहीं छोड़ना चाहती. ऐसे में उसे सब से आसान रास्ता मंगेतर को बीच से हटाना लगता है.

इन घटनाओं के पीछे का काला सच क्या है? इस तरह की घटनाओं की पीछे इन के पेरैंट्स की सोच क्या है, हमें नहीं मालूम मगर सब के मन में एक ही सवाल है कि जब शादी नहीं करनी थी तो रिश्ता तोड़ भी सकते थे. यह कोई गुड्डेगुङिया का खेल नहीं है. किसी के बच्चे को क्यों मारा?

आखिर जिम्मेदार कौन

भावनात्मक परिपक्वता और मानसिक स्थिति : अकसर ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों में ‘इंपल्स कंट्रोल’ (आवेग पर नियंत्रण) की कमी होती है. जब कोई व्यक्ति किसी और के प्रति जनूनी (obsessive) हो जाता है, तो वह सही और गलत का अंतर भूल जाता है. ऐसे लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

शौर्टकट मानसिकता : आज के समय में रिश्तों में धैर्य और संवाद की कमी हो रही है. यदि कोई समस्या आती है (जैसे सगाई या शादी का दबाव), तो लोग शांतिपूर्ण तरीके से (रिश्ता तोड़ कर) बाहर निकलने के बजाय हिंसक रास्ता अपनाते हैं. यह शौर्टकट मानसिकता है, जहां सामने वाले को रास्ते से हटा कर अपनी बाधाएं खत्म करने की कोशिश की जाती हैं.

समाज की बदनामी का दबाव : कई बार लड़की चाहते हुए भी रिश्ता नहीं तोड़ पाती क्योंकि परिवार की बदनामी और सामाजिक दबाव के चलते वह डर जाती है. उसे लगता है कि अगर वह शादी तोड़ती है तो सामाजिक बदनामी होगी. इस डर और दबाव के बीच वह अपने पुराने साथी के साथ मिल कर खौफनाक कदम उठा लेती है.

किताब छोङ मोबाइल का साथ : पहले लड़कियां मैगजीन व उपन्यास पढ़ती थीं. उन की नौलेज अच्छी होतो थी. लेकिन अब 2007 के बाद की लड़कियां सिर्फ मोबाइल देख कर बड़ी होती हैं. उन के पास कोई नैतिक ज्ञान नहीं है.

पहले के समय में जब लड़कियां किताबें, उपन्यास या मैगजीन पढ़ती थीं, तो उन्हें हर चीज को समझने के लिए समय देना पड़ता था. किताब पढ़ने में धैर्य लगता है, कल्पना शक्ति (Imagination) बढ़ती है और भाषा पर पकड़ मजबूत होती है.

इस के विपरीत, आज का मोबाइल कल्चर ‘इंस्टेंट’ है. रील्स और शौर्ट वीडियो के दौर में दिमाग को बहुत कम समय में जल्दीजल्दी ‘डोपामाइन’ (खुशी का एहसास) चाहिए होता है. इस वजह से लंबे समय तक किसी गंभीर विषय पर सोचना या पढ़ना कम हो गया है.

समाज से नैतिक शिक्षा अब नहीं मिल रही : जो एजुकेशन समाज की तरफ से मिलती थी वह भी कास्ट में बंट गया. सिर्फ धर्म और जाति का पाठ पढ़ाया रहा है और जो किताबों से मिलती थीं वह पढ़ना छोड़ दिया गया.

पहले नैतिक शिक्षा का मतलब था सही को सही और गलत को गलत कहना, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो. लेकिन आज के समय में ‘वफादारी’ को नैतिकता मान लिया गया है. लोग ‘सच’ के साथ नहीं, बल्कि ‘अपनी साइड’ के साथ खड़े होना पसंद करते हैं. इस वजह से जब समाज में कोई गलत घटना होती है, तो भी लोग उस पर जातिगत चश्मे से प्रतिक्रिया देते हैं, न कि मानवीय संवेदना से.

दोस्तों की इमोशनल सलाह की जगह अब वर्चुअल रिएक्शन

पहले जब हम दोस्तों के घर जाते थे, तो केवल ‘बातचीत’ नहीं होती थी. उस में एक ‘स्पर्श’ था, आंखों में देख कर बात करने का विश्वास था और एकदूसरे की खामोशी को समझने की फुरसत थी. अब, एक ‘टैक्स्ट’ या ‘वौयस नोट’ ने उस पूरी ऊर्जा को खत्म कर दिया है.

मोबाइल पर हम बात तो करते हैं, लेकिन हम एकदूसरे के पास नहीं होते. पहले दोस्त समस्या का हल निकालते थे. जब हम किसी के घर जा कर अपनी परेशानी साझा करते थे, तो सामने वाला व्यक्ति पूरी गंभीरता से उसे सुनता था. वह अपने अनुभव की रोशनी में हमें सलाह देता था. आज मोबाइल पर हम अपनी समस्या का हल ढूंढ़ने के बजाय, उसे पोस्ट कर देते हैं, लाइक्स और कमैंट्स की उम्मीद में. एक इमोशनल सलाह की जगह अब वर्चुअल रिएक्शन ने ले ली है.

अगर मंगेतर का बौयफ्रैंड निकल आएं

मंगेतर से बात करें : अगर थोड़ा भी शक है कि वह किसी और में इंट्रेस्टेड है और आप से न मिलने और साथ न घूमने जाने के बहाने खोज रही है, तो आप अलर्ट हो जाएं और अपने इस शक के बारे में शांति से बैठ कर मंगेतर से बात करें और सच जानने की कोशिश करें. साथ ही अपने घर वालों को भी इस बारे में बताएं कि आप को कुछ ठीक नहीं लग रहा है.

रिश्ते की गहराई समझने की कोशिश करें : अगर मंगेतर मान लेती है कि वह उस का एक्स है और अब दोनों के बीच कुछ नहीं है तो एकदम विश्वास न करें बल्कि यह जानने की कोशिश करें :

-क्या यह रिश्ता अतीत का हिस्सा बन कर खत्म हो चुका है या अभी भी कोई संपर्क है?

-क्या वर्तमान में उन के बीच कोई भावनात्मक या व्यक्तिगत जुड़ाव तो नहीं है?

-क्या मंगेतर के मन में आप के प्रति वफादारी और पारदर्शिता है?

पारदर्शिता

अगर मंगेतर कहती है कि हां, मेरा बौयफ्रेंड था तो यह समझने की कोशिश करें कि उन्होंने यह बात पहले क्यों नहीं बताई. क्या उन्हें लगा कि यह बताने योग्य नहीं था या वह कुछ छिपाना चाह रही थी?

अपनी फीलिंग्स बताएं

उसे बताएं कि आप को इस बारे में जान कर कैसा महसूस हुआ (असुरक्षा, गुस्सा या हैरानी), लेकिन बातचीत के दौरान आक्रामक न हों. उसे यह भी स्पष्ट बता दें कि आगे चल कर आप इस तरह की कोई बात बरदाश्त नहीं करेंगे इसलिए अगर तुम्हारे मन में एक्स के लिए थोङा भी कुछ है तो मैं अभी पीछे हट जाऊंगा. तुम पर भी कोई बात नहीं आएगी, मैं खुद अपने ऊपर ले कर रिश्ता खत्म कर कर लूंगा. इस तरह उसे कौन्फिडैंस में ले कर सारी बातें क्लियर कर लें.

भरोसा कायम रखें

यदि वह आप को आश्वस्त करती है कि अतीत पीछे छूट चुका है, तो रिश्ते की नींव को मजबूत करने के लिए उस पर भरोसा करना महत्त्वपूर्ण है. लेकिन फिर भी आंख, कान खुलें रखें और कोई भी बात तंग करने लगें तो उस की तह तक जाएं.

किसी अपने को भी ये बात बताएं

समय लें : शादी करने में बहुत जल्दबाजी न करें. अगर सामने वाला ऐसा चाहता है, तो भी उसे समझाएं कि अभी हमें एकदूसरे को समझने के लिए टाइम चाहिए. शादी कहां भागी जा रही है, कुछ समय में कर लेंगे. इस से आप दोनों को एकदूसरे के साथ वक्त बिताने का मौका मिल जाएगा.

पेरैंट्स और बच्चों के बीच गैप न हो : पेरैंट्स भी अपने बच्चों की खुशी का खयाल रखते हुए ही उन का रिश्ता जोड़ें. उन का कहीं और अफेयर है तो जल्दबाजी में जबरदस्ती करते हुए कोई निर्णय न लें बल्कि पहले बच्चे को उस के अफेयर से बहार निकालने में मदद करें और जब वह पूरे मन से तैयार हो तभी कहीं बात चलाएं वरना कहीं भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं.

अपनी मरजी बच्चों पर न थोपें : बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता हो कि वे खुल कर अपनी पसंदनापसंद का इजहार कर सकें.

सीमाएं तय करें : मंगेतर के साथ स्पष्ट चर्चा करें कि आप के रिश्ते के लिए क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं (जैसे- पुराने पार्टनर के साथ बातचीत की सीमाएं).

खुद से सवाल पूछें : बातचीत के बाद खुद से कुछ ईमानदार सवाल पूछें. जैसे-

-क्या मुझे अपनी मंगेतर पर भरोसा है?

-क्या यह जानकारी मेरे लिए ‘डील-ब्रेकर’ (रिश्ता तोड़ने वाली बात) है?

-क्या मेरी असुरक्षा का कारण केवल यह जानकारी है या हमारे रिश्ते में भरोसे की अन्य कमियां भी हैं? इस के बाद ही आगे बढ़ें.

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