Online safety tips : काम  कोई भी हो जो हम रोज करते हैं वह हमारी आदत बन जाता है फिर वह आदत अच्छी हो या बुरी, हमारी यही आदत हमारी जिंदगी, दिनचर्या को बहुत प्रभावित करती है, यही हमारी परेशानी को बढ़ाती, कम और आसान भी बनाती है इसलिए उन आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं जो हमें सुकून दें न कि हमारी परेशानी को बढ़ाएं. इसलिए आदतों में बदलाव के लिए जरूरी है उन की शुरुआत करना, उन को अपनाना एवं उन्हें दोहराना आसान हो लेकिन ध्यान रहे उन की निरंतरता बनी रहे.

आज का युग इंटरनैट तकनीक का है. हम अपने रोजमर्रा के कामों के लिए जैसे व्यायाम, कुकिंग, औनलाइन क्लास, टैलीफोन, लाइट आदि के बिलों का भुगतान, बैंक से संबंधित कार्य, गेम्स एवं मनोरंजन आदि सभी के लिए औनलाइन भुगतान कर रहे हैं और इस के साथ ही इंटरनैट पर हमारी निर्भरता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. मगर इंटरनैट की यह सुविधा हमारे लिए तब मुसीबत बन जाती है जब हम कोई एक गलती कर बैठते हैं और साइबर अपराध के शिकार हो जाते हैं.

इस के लिए यह जानना आवश्यक है कि यदि हम इंटरनैट का उपयोग सुरक्षित तरीके से न करें तो साइबर अपराध का शिकार बन जाते हैं क्योंकि यह कहीं न कहीं हमारी गलत आदतों के कारण होता है, इसलिए आदत डाल इंटरनैट के सुरक्षित इस्तेमाल की ताकि आप दिनोंदिन बढ़ रहे साइबर अपराधों के शिकार होने से बचे रहें.

इस के लिए आप को इन 12 बातों को अपनी आदतों का हिस्सा बनाना होगा:

प्राइवेट मोड में करें सर्फिंग

जब भी हम इंटरनैट पर कुछ सर्च करते हैं या सर्फिंग करते हैं तो यह ब्राउजर की हिस्ट्री में सेव या स्टोर हो जाता है जिसे बाद में कोई भी देख सकता है, यदि आप चाहते हैं कि इंटरनैट पर सर्फिंग करते समय आप के द्वारा देखी गई वैब साइट्स गोपनीय रहे जिसे कोई ट्रेस न करे तो आप वैब ब्राउजर को प्राइवेट मोड या इन्कौग्निटों मोड औन कर सकते है.

कैसे इस मोड को औन करें: क्रोम ब्राउजर पर ऐड्रैस बार के दाईं (लैफ्ट) तरफ 3 डौट वाले मेनू पर क्लिक करें. इस में आप न्यू इन्कौग्निटों विंडो पर क्लिक करेंगे तो एक नई विंडो ओपन हो जाएगी.

लाभ

यह मोड औनलाइन गतिविधियों को स्टोर करने से रोकता है

यदि कोई आप के डिवाइस को ऐक्सैस करता है तो वह यह पता नहीं लगा पाएगा कि इंटरनैट पर आप क्या कर रहे थे.

इस फीचर का इस्तेमाल आप मोबाइल ऐप्स के साथ भी कर सकते हैं.

सिक्योर नैटवर्क का करें उपयोग

आजकल हम अधिकतर कामों के लिए जैसे टैलीफोन या बिजली का बिल भरना हो, शौपिंग करनी हो, ई कौमर्स, भुगतान एवं बैंकिंग से संबंधित सभी के लिए ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं और हमारी निर्भरता दिनोंदिन ऐप्स पर बढ़ती जा रही है. इन की मदद से काम काफी जल्दी एवं आसानी से हो जाते हैं पर ध्यान रहे इन की यह सुविधा हमारे लिए नुकसानदेह न बन जाए इसलिए हमेशा ध्यान रहे :

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कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में थोड़ा सा शोध कर ले या जानकारी जुटा लें.

ऐप के बारे में लोगों के व्यूज पढ़ लें, उस के फायदे और नुकसान के बारे में जान लें.

साइबर सुरक्षा के लिहाज से वह ऐप कितनी जानकारी सुरक्षित रखने में सक्षम है सबकुछ शोध करने के बाद ही उसे डाउनलोड करें.

कोई भी मोबाइल ऐप्स (एप्लिकेशन) का इस्तेमाल अपने सिक्योर नैटवर्क में ही करें. तभी आप अपने को इस डिजिटल दुनिया में हो रहे साइबर अपराधों से बचा पाएंगे.

मालवेयर और स्पाइवेयर ऐप्स

कई ऐप्स मालवेयर और स्पाइवेयर का काम करते हैं जो आप के मोबाइल का जरूरी डाटा चुरा भी सकते हैं और आप हैकर्स का निशाना भी बन सकते हैं, इसलिए कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उस के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित कर लें. ऐप हमेशा संभल कर इस्तेमाल करें. केवल उन्हीं ऐप्स को अपने मोबाइल में डाउनलोड एवं इनस्टौल करें जिन की आप को आवश्यकता है. अनुपयोगी ऐप्स को तुरंत अपने मोबाइल से हटा दें यानी डिलीट कर दें.

निजी जानकारी शेयर नहीं

फिशिंग इंटरनैट चोरी का एक सामान्य रूप है, फिशिंग आमतौर पर ईमेल या विज्ञापनों से की जाती है. भ्रामक ईमेल और वैबसाइटों का उपयोग कर के व्यक्तिगत एवं गोपनीय जानकारी जैसे बैंक खाता संख्याएं, नैट बैंकिंग पासवर्ड, क्रैडिट कार्ड संख्या, व्यक्तिगत पहचान विवरण आदि चुराने के लिए किया जाता है. इस जानकारी का उपयोग प्रभावित व्यक्तियों के खातों से धन निकालने या प्रभावित व्यक्तियों के क्रैडिट कार्ड से बिलों का भुगतान करने में करता है.

उदाहरण के लिए फिशिंग कर रहा कोई व्यक्ति आप को ऐसा ईमेल भेज सकता है जो देखने में आप के बैंक की तरफ से भेजा गया लगे. इस का मकसद आप से बैंक खाते की जानकारी हासिल करनी होती है.

फिशिंग हमलों से बचने के लिए जब तक आप इस बात की पूरी तरह पुष्टि न कर लें कि ईमेल सही है, तब तक न तो किसी लिंक पर क्लिक करें और न ही कोई निजी जानकारी जैसे पिन, क्रैडिट कार्ड नंबर, व्यक्तिगत एवं बैंक से संबंधित जानकारी आदि शेयर न करें.

करें ऐंटीवायरस का इस्तेमाल

अपने डिवाइस को साइबर अपराधों से बचाने के लिए ऐंटीवायरस का इस्तेमाल करना आवश्यक है. इंटरनैट पर फ्री ऐंटीवायरस भी उपलब्ध हैं लेकिन इस में लिमिटेड फीचर्स ही होते हैं और वे हमें पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रखते. लेकिन यदि आप पेड ऐंटीवायरस लेंगे तो उस में बेहतर फीचर्स होते हैं एवं यह हमें स्पाइवेयर से बचाता है और हमें सुरक्षित रखता है.

सोशल मीडिया

कोरोना काल से हमारी सक्रियता डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप में कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है.

कुछ भी जानकारी शेयर करने से पहले उस की प्राइवेसी सैटिंग्स को चैक कर लें. यदि वह पब्लिक है तो उसे कोई भी देख सकता है, इसलिए कोई भी जानकारी शेयर करने से पहले सुनिश्चित कर लें कि उसे किस मोड में रखना है पब्लिक, फ्रैंड्स या प्राइवेट ताकि केवल वही लोग आप की पोस्ट को देख सकें जिन के साथ आप शेयर करना चाहते हैं.

अपने डिवाइस को करें ऐन्क्रिप्ट

आजकल हम अपनी बहुत सी महत्त्वपूर्ण जानकारी अपने मोबाइल, लैपटौप, मैमोरी कार्ड, फ्लैश ड्राइव में स्टोर करते हैं. क्या आप ने सोचा है कि यदि इन में से कुछ भी चोरी हो जाए तो आप की महत्त्वपूर्ण जानकारी का क्या होगा, इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आप की जानकारी सुरक्षित रहे तो अपने डिवाइस का ऐन्क्रिप्ट फीचर औन रखें ताकि कोई भी इस जानकारी का गलत इस्तेमाल न करे.

बदलते रहे पासवर्ड

अपने एटीएम का पिन नंबर समयसमय पर बदलते रहें, डिजिटल बैंकिंग और वौलेट के लिए अलगअलग पासवर्ड रखें. जिस अकाउंट का उपयोग आप औनलाइन पेमैंट के लिए करते हैं उस में कम से कम बैलेंस रखें.

फाइंड माई डिवाइस फीचर

फोन चोरी या गुम होना आम बात है लेकिन यदि आप चाहते हैं कि इस में रखे आप के फोटोज, संवेदनशील डाटा, वीडियोज आदि सुरक्षित रहें तो आप फाइंड माई डिवाइस या फोन फीचर को टर्न औन रखें. यह फीचर आप के फोन को रिमोट ऐक्सैस प्रदान करता है ताकि आप अपने फोन के डाटा को दूर से भी डिलीट कर सके और अपने फोन को आसानी से खोज सकें.

लेते रहें बैकअप

कई बार हैकर्स आप के कंप्यूटर को लौक कर देते हैं और उन की डिमांड पूरी न करने पर डाटा को डिलीट कर देते हैं. इसलिए अपने डिवाइसेज का बैकअप समयसमय पर लेते रहें ताकि डाटा डिलीट होने के बाद भी आप का डाटा आप के पास सुरक्षित रहे.

अपना ईमेल इनबौक्स साफ करें

अधिकतर हमारे ईमेल इनबौक्स में कई सारे जंक, स्पैम मेल पड़े रहते हैं. इन्हें कट करें और नियमित रूप से अपने इनबौक्स से पुराने संदेशों को हटाते रहें और उन न्यूजलैटर्स को अनसब्सक्राइब करें जिन्हें आप कभी नहीं पढ़ते हैं.

बदलें सोशल मीडिया का पासवर्ड

हमारी सक्रियता डिजिटल दुनिआ में कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप आदि एवं अपने ईमेल अकाउंट का पासवर्ड समयसमय पर बदलते रहें ताकि आप के फोन अकाउंट से कुछ गलत जानकारी, ईमेल या मैसेजेस आदि न जाएं.

फोन रखें हमेशा लौक

अपने फोन की स्क्रीन लौक करने के लिए फिंगर या फेस रिकग्निशन का इस्तेमाल करें ताकि आप का फोन अनलौक होने से बच सके और उस में सेव की गई जानकारी सुरक्षित रहे.

आजकल हैकर्स की नजर आप के मोबाइल में रखी गोपनीय जानकारी पर होती है और आप की एक चूक से यह महत्त्वपूर्ण जानकारी को है करने के लिए हैकर्स तरहतरह के तरीके अपनाते हैं, इसलिए यदि इंटरनैट की दुनिया में सुरक्षित रहना चाहते हैं तो इन आदतों को अपनाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. अत: आदत डालें इंटरनैट के सुरक्षित इस्तेमाल की ताकि आप आजकल हो रहे साइबर अपराधों से खुद को बचा सकें.

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