Darjeeling girls : पश्चिम बंगाल की उत्तर में बसा दार्जिलिंग (Darjeeling) अपनी शानदार भौगोलिक स्थिति, कंचनजंगा के दृश्य, औपनिवेशिक आकर्षण और हरे-भरे चाय के बागानों के कारण “पहाड़ों की रानी” कहलाती है. 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से यहाँ गर्मियों में भी मौसम बहुत सुखद और ठंडा रखता है. यह यूनेस्को विश्व धरोहर (दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे) और यहां के चाय बागान विश्व प्रसिद्ध है. इतना ही नहीं, दार्जिलिंग दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा के बेहद करीब से मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जिसे आसमान के साफ रहने पर दार्जिलिंग से आप आसानी से देख सकते है.

पहाड़ी जीवन है खास

इन खूबसूरत स्थानों की सुंदरता यहां की नागरिकों की वजह से खास है, क्योंकि यहां के लोग काफी शांत और ऐक्टिव होते है, खासकर यहां की लड़कियां जो इतना एक्टिव और मेहनती होने के पीछे कई भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण होते है. यहां के पहाड़ी जीवन की बनावट ही ऐसी है कि यहाँ की लड़कियां हर क्षेत्र में आगे रहती हैं. इतना ही नहीं, यहां की लड़कियां अपनी शारीरिक सक्रियता, मेहनत और आत्मनिर्भरता के लिए जानी जाती हैं. इसका मुख्य कारण पहाड़ी जीवनशैली, चाय के बागानों में सक्रिय भागीदारी, उच्च साक्षरता दर और सशक्तिकरण, जो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, कुछ खास वजह निम्न है,

पहाड़ी इलाका

असल में दार्जिलिंग एक पहाड़ी इलाका है. यहां एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए काफी पैदल चलना पड़ता है और चढ़ाई चढ़नी होती है. बचपन से ही इस तरह के वातावरण में रहने के कारण लड़कियां शारीरिक रूप से बहुत फिट और सहनशील होती हैं.

चाय बागान और अर्थव्यवस्था

दार्जिलिंग की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा चाय बागानों पर टिका है. इन बागानों में चाय की पत्तियां चुनने का काम मुख्य रूप से स्त्रियाँ ही करती हैं.  यह काम बहुत मेहनत वाला होता है, जिसमें घंटों खड़े रहकर ढलानों पर काम करना पड़ता है, जो उन्हें कार्यकुशल बनाता है, क्योंकि इसमें चाय के पौधे की सबसे ऊपरी कोमल कली और उसके नीचे की दो पत्तियों को ही तोड़ना पड़ता है. इसे ‘फाइन प्लकिंग’ कहा जाता है.

कई बार स्त्रियां अपने छोटे बच्चे को पीठ पर लादकर चाय की पत्तियां चुनती है. चाय की पत्तियां तोड़ने से लेकर बागान प्रबंधन तक, महिलाएं शारीरिक मेहनत करती हैं, जिससे वे एक्टिव रहती हैं.

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गोरखा संस्कृति

यहां की मुख्य आबादी गोरखा समुदाय की है, जहाँ महिलाओं को समाज में बहुत सम्मान और आजादी दी जाती है. यहां ‘मैट्रिआर्कल’ (Matriarchal) प्रभाव भी देखने को मिलता है, जहां महिलाएं घर के साथ-साथ बाहर के कामकाज और छोटे व्यवसायों को भी बखूबी संभालती हैं. परिवार की संपत्ति की हकदार लड़कियां ही होती है, जिससे वे कम उम्र में पारिवारिक जिम्मेदारियाँ सम्हालती रहती है. ऊबड़ – खाबड़ रास्तों पर चलने और कठिन मौसम में काम करने से उनका शारीरिक स्टैमिना (stamina) बेहतर होता जाता है. ये लड़कियां कम उम्र से ही शिक्षा के साथ काम सीखती जाती है. इसके अलावा बौद्ध धर्म को अपनाने वाली ये संस्कृति दान – दक्षिणा पर समय बर्बाद नहीं करती.

darjeeling

पर्यटन और उद्यमिता

पर्यटन दार्जिलिंग का मुख्य आकर्षण है. यहां की महिलाएं होटल, होमस्टे, दुकानों और स्थानीय हस्तशिल्प के व्यापार में बहुत सक्रिय भूमिका निभाती हैं.  वे पर्यटकों के साथ बातचीत करने और स्वतंत्र रूप से काम करने में काफी कुशल होती हैं. खूबसूरत परिधान में वे हर पर्यटक को उनके मन मुताबिक चीजों से परिचय करवाती है, वे आलस नहीं करती, बल्कि फुर्ती से हर काम को करती जाती है.

शिक्षा और जागरूकता

दार्जिलिंग शिक्षा के मामले में हमेशा से आगे रहा है. बेहतर शिक्षा और आधुनिक विचारों के कारण यहां की लड़कियां अपने करियर और अधिकारों के प्रति बहुत जागरूक और एक्टिव रहती हैं. वे न केवल स्थानीय पर्यटन और सेवा क्षेत्र में काम कर रही हैं, बल्कि रेलवे जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं मसलन सरिता योल्मो, जो टॉय ट्रेन की पहली महिला टीटीई बनीं.

सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी

महिलाएं यहां पर सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी काफी जागरूक हैं.  चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत अक्सर पुरुषों से अधिक रहता है. वे सामाजिक मुद्दों पर भी कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करती हैं. यहां मुख्य रूप से नेपाली (गोरखा) समुदाय की लड़कियां और स्त्रियाँ अधिक संख्या में हैं, जिनमें राय, लिंबू, मगर, तमांग, शेरपा और नेवार जातियां प्रमुख हैं. वे चाय बागानों, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में सक्रिय हैं.  सामाजिक जुड़ाव काफी मिश्रित और मिलनसार है, जहां नेपाली के अलावा हिंदी और बांग्ला भाषा का प्रयोग होता है. तिब्बती महिलाएं भी यहाँ कुछ है, जो आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं

सुरक्षित वातावरण

दार्जिलिंग को महिला यात्रियों और स्थानीय लड़कियों के लिए अपेक्षाकृत एक सुरक्षित स्थान माना जाता है, जिससे उन्हें बाहर निकलने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने की स्वतंत्रता मिलती है.

इस प्रकार दार्जिलिंग की स्त्रियां न केवल घर संभालती हैं, बल्कि वे समाज की आर्थिक बैकबोन की तरह काम करती हैं, जो उन्हें स्वाभाविक रूप से “एक्टिव” बनाता है.

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