Body Shaming: ‘अरे देखो यह लड़की कितनी मोटी है…’ इस लड़के के बूब्स तो लड़कियों जैसे हैं…’ कितनी काली है यह. इस पर तो कोई रंग अच्छा ही नहीं लगता होगा…’ देखो, गिट्ठी चली आ रही है. ऐसा लग रहा है मानो छोटी हाइट की कोई गठरी चली आ रही है…’ किसी पर इस तरह के कमेंट्स कर के उस का अपमान करना और उसे दुख पहुंचाना ही बौडी शेमिंग है. इस बौडी शेमिंग की वजह से कई बार लोग डिप्रैशन तक का शिकार हो जाते हैं.

हाल ही में हुमा कुरैशी और सोनाक्षी सिन्हा की एक फिल्म आई थी, जिस का नाम था ‘डबल एक्सएल.’ इस फिल्म में बहुत अच्छे से यह दिखाया गया था कि कैसे लड़कियों को कदमकदम पर बौडी शेमिंग का शिकार होना पड़ता है. इस से पहले बौडी शेमिंग के खिलाफ एक अभियान भी चला था, जिस में बड़े से बड़े सिलेब्स ने भी भाग लिया था. इस के आलावा भी आएदिन ऐसी खबरें आती रहती हैं जहां बौडी शेमिंग के चलते पीड़ित डिप्रैशन का शिकार हो जाते हैं और आत्महत्या तक कर बैठते हैं.

बौडी शमिंग का शिकार हुए लोग

केस 1 : जून, 2025 में हमीरपुर में एक शिक्षिका ने मोटापे के कारण खुदकुशी कर ली. 90 किलोग्राम वजन और लगातार मजाक उड़ाए जाने से वह डिप्रैशन में थी. सुसाइड नोट में उस ने अपने दर्द का इजहार किया. उस ने खुद को आग लगा कर जान दे दी. लेकिन इस हादसे से पहले वह एक सुसाइड नोट छोड़ गई, जिस में सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि टूटती दिलों की चीखें थीं.

साल्वी का वजन करीब 90 किलोग्राम था, जबकि उस की लंबाई मात्र 5 फीट. चलनेफिरने में कठिनाई, समाज की तिरछी निगाहें और हर मोड़ पर मजाक का शिकार होना… ये सब उस की मानसिक हालत को धीरेधीरे गहरे डिप्रैशन की ओर ले जाने लगी.

परिजनों ने उसे मानसिक तनाव से बाहर लाने के लिए एक निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजा था. लेकिन वहां भी उस के मोटापे को ले कर मजाक उड़ाया गया. हर ताने और हंसी की चोट उस के आत्मविश्वास को चीरती रही. अंत में उस ने छत पर जा कर खुद को आग के हवाले कर दिया.

केस 2 : जम्मू कश्मीर के भुवन शर्मा को अपने बढ़े हुए वजन के लिए बहुत जिल्लत झेलनी पड़ी. उस के ब्रैस्ट शर्ट व टीशर्ट पहन कर भी साफ नजर आते थे. साथ पढ़ने वाले लड़के उसे ‘मैन बूब्स’ कह कर चिढ़ाते. किसी लड़की के आगे दोस्ती का हाथ बढ़ाता तो वह भी रिजैक्ट कर देती.

मोटापे के तानों से बचने के लिए भुवन ने सोशल मीडिया पर अपनी तसवीरें शेयर करना बंद कर दिया. फ्रैंड्स के साथ पार्टी में जाना छोड़ दिया. वह खुद को आईने में देखने से बचने लगा. उस का कौन्फिडेंस कम हो गया.

केस 3 : नोएडा की एक बैंक में काम करने वाली युवती ने बौडी शेमिंग और पर्सनल कमेंट्स से परेशान हो कर सुसाइड कर ली. आरोप है कि युवती के सहकर्मी उस की बौडी को ले कर भद्दे कमेंट्स करते थे. इस से युवती मानसिक रूप से परेशान हो गई और कई बार उसे डाक्टर के पास जाना पड़ा. कई बार परेशानी से नजात पाने के लिए दवाइयों का सहारा भी लेना पड़ा, लेकिन इन सब के बावजूद वह इन सब चीजों से उबर नहीं पाई.

लड़कियों की शादी में सुंदरता के पैमाने भी बड़ी वजह

महिलाओं को अकसर उन के रंगरूप के आधार पर महत्त्व दिया जाता है, जबकि पुरुषों की मस्कुलर या लंबे कद वाला होने के आधार पर प्रशंसा की जाती है. कई भारतीय घरों में लड़कियों को शादी के अच्छे रिश्ते के लिए वजन कम करने या गोरा होने का सुझाव दिया जाता है. काले रंग या अधिक वजन को आकर्षक नहीं समझा जाता, जोकि पूरी तरह गलत एवं भेदभावपूर्ण है. यही गलत मैसेज समाज में जाता है कि अगर सुंदर लड़की है तो उस के लिए हजार रिश्ते हैं और अगर कोई सुंदर नहीं है तो उस में कमी है. यह सरासर गलत है.

यह सोच को सामान्य बना देता है कि किसी के रूपरंग या आकार के आधार पर उसे आंका जाए. यदि हम लोगों को केवल सुंदरता या शरीर के आधार पर पुरस्कृत करते हैं या उन्हें आंकते हैं, तो इस से घमंड, अहंकार और दूसरों को छोटा समझने की भावना पैदा होती है, जो कि नैतिक रूप से दोषपूर्ण है. यही वजह है कि बौडी शेमिंग की घटनाएं  होती रहती हैं और इस से पीड़ित के मन पर बड़ा गहरा असर पङता है जो उस की जिंदगी तक बरबाद कर देता है. यह एक अपराध है.

बौडी शेमिंग का मनोवैज्ञानिक असर

बौडी शेमिंग का मनोवैज्ञानिक असर इतना गहरा होता है कि इस का शिकार व्यक्ति आत्मविश्वास खो देता है. अपने शरीर को ले कर लोगों के ताने उस व्यक्ति को इतना प्रभावित करते हैं कि वह किसी से मिलना नहीं चाहता. उसे अपने शरीर से नफरत होने लगती है. कई लोग डिप्रैशन का शिकार हो जाते हैं.

सोशल लाइफ खत्म हो जाती है

बौडी शेमिंग की वजह से पीड़ित बाहर आनेजाने से कतराने लगता है. वह लोगों से दोस्ती करने में डरता है. फैमिली फंक्शन हो या पार्टी, हर  जगह जाने से बचता है. उसे लगता है कि अगर वह बाहर जाएगा तो हर कोई उसे देख कर बात करेगा और उस पर लोग हंसेंगे.

गर्लफ्रैंड या बौयफ्रैंड से रिजैक्शन

बौडी शेमिंग के शिकार लोग सिर्फ अनजान लोगो से ही परेशान नहीं होते हैं, बल्कि कई बार उन के अपने, बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं, जिस की वजह से वे पूरी तरह से टूट जाते हैं और उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया गंदी है. कोई प्यार नहीं करता और कोई साथ ले कर नहीं चलना चाहता.

ऐनोरेक्सिया, बुलीमिया या बिंज इटिंग जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं

बौडी शेमिंग की स्थिति में निगेटिव बौडी इमेज की वजह से हम ऐनोरेक्सिया, बुलीमिया या बिंज इटिंग जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. ऐनोरेक्सिया में वजन बढ़ने के डर की वजह से कम खाने लगता है. वहीं बुलीमिया में व्यक्ति वेट गेन से बचने के लिए खाने के बाद उलटी करता है. इस से शरीर में न्यूट्रिऐंट्स की कमी हो जाती है. कई लोगों को ज्यादा ऐक्सरसाइज करने की आदत लग सकती है.

बौडी शेमिंग की टिप्पणियां जैसे- “क्या तुम ने वजन घटाया है? तुम पहले से बेहतर दिख रहे हो,” इस तरह की आदतों को बढ़ावा दे सकती हैं और वजन घटाने की और कोशिश करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.

बौडी डिस्मोर्फिक डिसऔर्डर (बीडीडी)

बौडी डिस्मोर्फिक डिसऔर्डर (बीडीडी) या बौडी डिस्मोर्फिया एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिस में व्यक्ति अपने रूपरंग में खामियों को ले कर बहुत समय बिताता है. इस में वे अपनी बौडी को ले कर बहुत सेंसिटिव हो जाते हैं. दिनभर वे कैसे अच्छे दिख सकते हैं, यही सोचते रहते हैं. शीशे के आगे खुद को घंटों निहारते हैं.

डिप्रैशन बढ़ता है

हर रोज बाहर वालों की उपेक्षा और तानों से तंग आ कर मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति डिप्रैशन का शिकार हो जाता है.

कौन्फिडेंस जीरो हो जाना

इस वजह से विश्वास खोने लगता है. उन्हें लगता है कि वे कुछ भी करने लायक नहीं हैं. यहां तक की वे अपने स्कूल कालेज की पढ़ाई तक नहीं कर पाएंगे. जौब जौइन करने में उन्हें डर लगता है.

बौडी शेमिंग से कैसे बचें

हैल्दी शरीर का थैंक्स करें : अगर आप की हाइट कम है या आप मोटी/मोटे हैं, तो क्या हुआ. यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं है. कम से कम आप की हैल्थ तो सही है, आप बीमार तो नहीं हैं. आप के शरीर के सारे अंग सही तो हैं. उन लोगों का सोचिए जो देख नहीं सकते, बोल नहीं सकते, फिर भी वे जी रहे हैं.

पौजिटिव लोगों से करें दोस्ती : अगर आप के दोस्त छोटी सोच वाले होंगे तो इस का प्रभाव सीधा आप की मैंटल हैल्थ पर पड़ेगा. इसलिए हमेशा ऐसे लोगों से दोस्ती करें जो आप के टेलैंट से आप को आंके नकि आप की बौडी से क्योंकि दोस्तों के द्वारा बौडी शेमिंग करना ज्यादा परेशान करता है.

खुद को स्वीकार करें : चाहे आप मोटी हों, काली हों या छोटी हों, यह आप का शरीर है और अगर आप को इस से फर्क नहीं पड़ता तो सामने वाले को बोलने दीजिए जो बोल रहा है. आप इसे दिल पर न लें. अगर आप को खुद से कोई दिक्कत नहीं होगी तो आप का कौन्फिडेंस देख कर और लोग भी इस बारे में बात करना बंद कर देंगे.

अचीवमेंट्स की याद दिलाएं : ऐसी परिस्थिति में आप सामने वाले व्यक्ति को अपने द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों के बारे में बताएं. इस से न केवल सामने वाले व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास होगा बल्कि वह आगे कभी आप की बौडी शेमिंग नहीं कर पाएगा.

अगर आप का कोई दोस्त या करीबी इस दर्द से गुजर रहा है, तो ऐसे में आप उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते हैं. उन्हें समझाइए कि उन के शरीर से ज्यादा महत्त्वपूर्ण उन का दिल है. उन्हें बताइए कि उन का असली सौंदर्य उन की सोच और आत्मविश्वास में छिपा है. बौडी पौजिटिव सोच को बढ़ावा दें. बच्चों की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करने से बचें. उन के अंदरूनी गुणों की सराहना करें. हर तरह के शरीर के प्रति सम्मान सिखाएं. लेकिन अगर फिर भी वह बौडी शेमिंग के असर से बच नही पा रहे हैं, तो आप को साइकिएट्रिस्ट या साइकोलोजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. ऐक्सपर्ट ऐसी कंडीशन से उबरने में मदद कर सकते हैं और इस से उन का सैल्फ कौन्फिडेंस वापस पाने में आसानी हो सकेगी.

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