Showoff Culture: जेनजी के हाथों में मोबाइल ही डैंजरस नहीं है, कुछ व्हीकल्स भी रैड फ्लैग वाली कैटेगरी में आने लगी हैं. महिंद्रा एंड महिंद्रा की जीपनुमा व्हीकल ‘थार’ इस गिनती में आ गई है. पुलिस वालों ने हर थार चलाने वाले की तलाशी लेनी शुरू कर दी है. फोरव्हील ड्राइव वाली थार अपनेआप में अगली मस्कुलर व्हीकल है. इस बेजान व्हीकल को खरीद भी वे लोग रहे हैं जो खुद रैक्लैस हैं.
असल में यह कार स्टेटमैंट हो गई है जैसे एक जमाने में जीप मिलिट्री और पुलिस की पसंदीदा व्हीकल थी. जीप ब्रैंड को भारत में महिंद्रा एंड महिंद्रा ही असैंबल किया करती थी और सैकंड वर्ल्ड वार में लाखों जीप बनी होंगी जो आज की पीरियड फिल्मों में दिखती हैं. टैंक अगर वार फ्रंट पर ताकत दिखाते थे तो वार के पीछे अफसरों को लाने का काम जीप करती थीं. थार इसी सोच की एयरकंडीशंड वर्जन है जिस में कंफर्ट कम है लेकिन ताकत ज्यादा है.
इसी तरह की बदनामी आज बुलेट बाइक पर चिपकी है जिसे भी हर पुलिस नाके पर रोका जाता है और चैकिंग की जाती है. स्कौर्पियो, क्रेटा और फौर्चुनर भी इसी कैटेगरी में आती हैं. इन सब व्हीकल्स में जरूरत से ज्यादा पौवरफुल इंजन हैं और इन की सडक़ पर पकड़ बढिय़ा है. फ्यूल एफिशैंसी कम है लेकिन पिकअप बढिय़ा है.
जिस तरह कंटैंट क्रिएशन आज सोशल एनिमी बनता जा रहा है क्योंकि इतनी ज्यादा गंद और बेहूदगियां मोबाइल कैमरों से बनाई जा रही हैं कि देखने वालों का दिमाग खराब हो रहा है, उसी तरह इन बदनाम हो गईं व्हीकल्स को कुछ लोगों द्वारा इस बुरी तरह चलाया जा रहा है कि वे कम जबकि व्हीकल्स ज्यादा बदनाम ज्यादा हो गई हैं.
असल में रोड सैंस तो हमारे देशवासियों में है ही नहीं है. हम हर रोड को या तो रेस ट्रैक मानते हैं या मार्केट या कूड़ा फेंकने का डंपिंग ग्राउंड. उन सडक़ों पर थार और स्कौर्पियों चलती हुई अपनी अलग पहचान तो दिखाती हैं, साथ ही, उन सडक़ों पर बने गड्ढों, कूड़े के ढेरों से वे आसानी से निकल भी जाती हैं. थोड़ी ऊंची होने के कारण ऊंचीनीची बनी सडक़ों पर भी ये आसानी से दौड़ती हैं. देशभर की सडक़ें वैसे ही अपनी ‘ग्रेट व्हीकल ब्रेकिंग’ कैपेसिटी के कारण फेमस हैं. इन सडक़ों को मस्कुलर व्हीकल ही चाहिए.
बदनाम होने का मतलब यह है कि इस तरह की व्हीकल को यूज करने वाला पहले ही झगड़ालू, दिखाऊ और लड़ाकू मान लिया जाता है. मुसीबत दूसरों की आती है जिन्हें इन व्हीकल्स को बदनामी के कारण इन्हें राइटऔफवे देना पड़ता है. लोग शायद इन के ओनर्स से ज्यादा लेनदेन करने में हिचकते हैं. पर इतना जरूर है कि जब कोई इन पौवरफुल अनकंफर्टेबल व्हीकल्स को खरीदता है तो उस के मन में सिर्फ पौइंट ए से पौइंट बी तक नहीं जाना होता, उस के मन में 2 पौइंट्स के बीच अपनी पहचान बनाने की इच्छा होती है.
हरियाणा के डीजीपी ओ पी सिंह ने इसीलिए नवंबर में कहा था कि जब चैंकिंग हो रही हो तो कार को कैसे बिना चैक किए जाने दिया जा सकता है. यह सही बात है कि सभी थार ओनर्स खराब नहीं लेकिन सभी उद्दंडों के पास थार या स्कौर्पियो ही होती है. सो, ब्लेम व्हीकल्स को नहीं, उन के यूजर्स को दें.
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