Delhi High Court : दिल्ली हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर दो बालिग लोग अपनी मर्जी और आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं, तो उनके फैसले में माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त दखल नहीं दे सकते. किसी को भी उनकी जिंदगी और आजादी के लिए खतरा पैदा करने का अधिकार नहीं है.
जस्टिस सौरभ बनर्जी की टिप्पणी-
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक कपल ने लड़की के परिवार की तरफ से मिल रही धमकियों का जिक्र किया था. कोर्ट ने पुलिस को दोनों को सुरक्षा देने के निर्देश भी दिए.
क्या है पूरा मामला?
करीब 30 साल की उम्र के इस कपल ने कोर्ट को बताया कि वे कुछ समय से साथ रह रहे हैं और शादी भी करना चाहते हैं. हालांकि, लड़की के पिता और भाई इस रिश्ते से खुश नहीं हैं और कथित तौर पर उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं. कपल ने बताया कि उन्होंने स्थानीय पुलिस में शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और सुरक्षा की मांग की.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि दो बालिग लोग अगर अपनी इच्छा और पूरी जिम्मेदारी के साथ साथ रहने का फैसला लेते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद का साथी चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है.
अदालत ने यह भी कहा कि शादीशुदा न होने के बावजूद, आपसी सहमति से साथ रह रहे बालिगों के लिव-इन रिलेशनशिप को उनके निजी जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में सुरक्षा मिलनी चाहिए.
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