Women safety awareness : इस 22 अप्रैल की फरीदाबाद की एक खबर रिश्तों के उस काले सच को सामने लाती है जहां ‘सहनशीलता’ खत्म होने पर अपराध जन्म लेता है. फरीदाबाद के एटा में रहने वाला जयबीर रोज शराब पीकर पत्नी से लड़ाई करता था. घर में रोज क्लेश, गालीगलौज होता था. पत्नी ने अपने जीजा के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया. उस ने जीजा के साथ मिलकर पति की गला घोंट कर हत्या कर दी और शव को कूढ़े के ढेर में फिंकवा दिया. बाद में जयबीर के भाई ने पुलिस में शिकायत कराई. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी पत्नी को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया.
यह मामला निम्न वर्ग का था पर अपर क्लासों और ऊपर कास्टों में भी जमकर शराब पी जाती है और पढ़ीलिखी, वॄकग औरतें भी पुरुषों से पिछती तक है.
गलती किस की
पति शराब पीकर रोज लड़ाई करता था, पत्नी को मानसिक-शारीरिक यातना देता था. यह घरेलू हिंसा है और कानूनन अपराध है. धारा 498 और डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005 के तहत पत्नी शिकायत कर सकती थी. जुल्म का जवाब खून से देना समाधान नहीं. हत्या एक जघन्य अपराध है. अब पत्नी और जीजा दोनों को ढ्ढक्कष्ट 302 में उम्रकैद तक हो सकती है. एक गलती ने कई जिंदगियां बर्बाद कर दीं. पति की, खुद की और बच्चों की. पूरा परिवार इस सदमे का शिकार रहेगा.
इस तरह की और वीडियो देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें
कानूनी रास्ते : जब पति शराबी हो तो हत्या नहीं ये करें.
पहला कदम : 181 पर कौल. महिला हेल्पलाइन 181 या 1091 पर कौल करें. पुलिस तुरंत घर आकर कार्रवाई करती है. शराबी पति को थाने में बंद किया जा सकता है.
दूसरा कदम : डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट का सहारा लें. घरेलू हिंसा कानून के तहत प्रोटेक्शन औफिसर से मिलें. कोर्ट पति को घर से दूर रहने, शराब न पीने का आदेश दे सकता है. आपको अलग रहने के लिए गुजारा भत्ता भी मिलेगा.
तीसरा कदम : नशा मुक्ति केंद्र का सहारा लें. पति को जबरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र भिजवाया जा सकता है. कोर्ट और पुलिस इस में मदद करती है. सुधरने का मौका दें जान लेने का नहीं.
दरअसल फरीदाबाद की यह पत्नी ‘विलेन’ नहीं, ‘विक्टिम’ थी जो खुद विलेन बन गई. अगर उसने पहले दिन 181 पर फोन कर दिया होता तो आज जेल में नहीं होती. याद रखें, शराबी पति का जुल्म सहना कायरता है, पर उस का खून करना अपराध है. बीच का रास्ता कानून है. घर में रोज लड़ाई हो रही है तो चुप न रहें, खून न बहाएं बल्कि कानून का दरवाजा खटखटाएं.
