Motivational life story : हरियाणा के एक छोटे से गांव में 27 अप्रैल, 2026 की सुबह एक महिला रिश्तेदारों के साथ रोते रोते आंगन में पति की तेरहवीं की तैयारी में थी कि तभी अस्पताल से खबर आई कि 16 वर्षीय बेटा जिस का पिता के साथ ही एक्सीडेंट हुआ था, ब्रेनडेड हो गया है.
एक ही झटके में जीवनसाथी के साथ साथ बुढ़ापे की लाठी भी छिन गया था. पर इस दुख के पल में उस मां द्वारा लिया गया फैसला एक मजबूत मन की मिसाल बन गया. मां ने अपने मृत बेटे के सारे अंग दान कर दिए ताकि किसी और मां की कोख सूनी होने से बच जाए. दरअसल 15 अप्रैल को पानीपत में सडक़ हादसे में राजेंद्र और उन का बेटा हर्ष घायल हो गए थे. अगले दिन राजेंद्र की मौत हो गई जबकि बेटा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था.
तेरहवीं वाले दिन जब रिश्तेदार ढांढस बंधा रहे थे उस मां ने खुद अंगदान के कागज पर साइन किया ताकि बेटा अपने अंगों के जरिए दूसरों में जिन्दा रहे.
हरियाणा में पहली बार हर्ष के अंगों को बचाने के लिए हेलीकाप्टर पहुंचा. हेलीकाप्टर से हर्ष के और्गन चंडीगढ़ भेजे गए. हर्ष के आर्गन से आर्मी जवान समेत 4 लोगों को नई जिंदगी मिली. वो मां चाहती तो धाॢमक सोच के साथ मना कर सकती थी पर नहीं किया. हम अक्सर ‘मजबूत’ का मतलब पहलवान समझते हैं. पर असली ताकत वो है जो सबसे बड़े दुख में भी दूसरों के बारे में सोचे. इस मां ने साबित किया कि औरत का कलेजा मोम का नहीं बल्कि फौलाद का होता है जो पिघलता नहीं, ढलता है दूसरों को जीवन देने के लिए.
