donald trump policies : अमेरिकी जनता का एक बड़ा हिस्सा आजकल प्रैसिडैंट डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना कर रहा है कि उन्हें नाहक एक युद्ध में फंसा दिया है. अमेरिकी जनता इस आलोचना में साफतौर पर मतलबी, दोगली, अंधविश्वासी और बेवकूफ नजर आ रही है. ट्रंप जो भी कर रहे हैं

उसे जनता की सपोर्ट है क्योंकि पिछले चुनावों में लगभग 50% वोटरों ने ट्रंप को वोट दिया था और जो भी ट्रंप कर रहे हैं उस पर डैमोक्रेसी के सिद्धांत के अनुसार बाकी 49% की हामी की भी मुहर है.

अमेरिकी जनता ने ट्रंप को चुना ही इसलिए था कि वे इसलामी देश ईरान का खात्मा करें, देश से इसलामी और दक्षिणी अमेरिकी मजदूरों को भगाएं. ऐसी पौलिसियां बनाएं कि अमेरिकी आराम से पैर पर पैर रख कर बैठें और बाकी दुनिया उन के सैनिकों और लड़ाकू जहाजों से डर कर सेवा करे.

अब ईरान ने सेवा करने से इनकार कर दिया है तो कुछ अमेरिकी जोरजोर से हल्ला कर रहे हैं कि तेल के दाम बढ़ गए. चीनी चीजें महंगी हो गईं, कनाडा से गेहूं नहीं आ रहा, अमेरिकी जहाजों पर ईरान की मिसाइलों के हमले हो रहे है, खाड़ी के इलाके से अमेरिकियों की लाशें आ रही हैं.

डोनाल्ड ट्रंप को कट्टर औरतों का बड़ा समर्थन था. वे टी पार्टी आंदोलन की अगुआ थीं, वे ही चर्चों में जम कर दान देती हैं जहां गैरईसाइयों और गैरगोरों के खिलाफ छिपे शब्दों में जहर धीमेधीमे दिया जाता है. अब यही औरतें मार्केट में जाती हैं तो उन्हें सब्जी, फल, कपड़े महंगे नजर आ रहे हैं. ट्रंप सपोर्टर तो चुप हैं पर जिन्होंने ट्रंप को वोट नहीं किया वे बोल रही हैं पर अब क्या होना है जब खुद ही बारूद में आग लगाई थी.

यही भारत में हो रहा है. हिंदू औरतों ने जम कर उस पार्टी को वोट दिया जो अखंड हिंदू भारत का सपना दिखा रही है. अब जब मुसलिम विरोध को दर्शाने के लिए नरेंद्र मोदी को ठीक युद्ध शुरू करने से पहले तेल अवीव बुला कर इजरायल द्वारा मैडल पहनाए जाते हैं तो भारत कैसे अपने को न्यूट्रल कह सकता है. खाड़ी के देशों से देश को न सिर्फ गैस या तेल मिलता है, करीब 1 करोड़ लोग वहां काम भी करते हैं जो लगभग 100 अरब डौलर हर साल भारत भेजते हैं. गैस, तेल और डौलर नहीं आएंगे तो क्या वे औरतें जिम्मेदार नहीं हैं जो भगवानों की पूजा के साथसाथ नेताओं की पूजा करने लगीं.

अमेरिकी और भारतीय दोनों जगह की औरतें आज धर्मों की गुलामी की वजह से गलत नीतियों की जड़ों में हैं. इस का नुकसान हो रहा है तो उन्हें ही भुगतना होगा. न जीसस क्राइस्ट बचाने आएंगे न शिव, विष्णु, रामजी या कृष्ण.

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