Voting power : डैमोके्रसी ने दुनिया की औरतों को पिछले 100-200 सालों में जो हक दिया है वह उन्हें पहले कभी नहीं मिला. आज चाहे मिलिटरी तानाशाह हों जैसे नौर्थ कोरिया के किम जोंग उन, धार्मिक तानाशाह जैसे अयातुल्ला खामनेई (जिन की इजरायलअमेरिका ने हत्या कर दी) या आइडियोलौजी तानाशाह हों जैसे चीन के शी जिनपिंग, सब किसी न किसी तरह से चुनाव कराते हैं जिन में पहले की तरह केवल मेल नहीं, सभी एडल्ट फीमेल भी वोट का हकदार होते हैं.

जहां वोट से सत्ता बदलती हो या जहां नहीं बदलती हो

और वोटिंग सिर्फ नाटक होता है, दोनों जगह लिगैलिटी तो वोटिंग से ही आती है, औरतों की वोटिंग से. यह जरूरी है कि आज की औरतें इस वोटिंग के राइट को अपने घरों के पुरुषों या धर्म के पब्लिसिस्ट को मुफ्त में न सौंप दें क्योंकि उन्होंने ऐसा किया तो तानाशाही हो या असली डैमोक्रेसी, उन को मिले राइट्स कम होते जाएंगे.

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अमेरिका और भारत में पिछले 10-15 सालों में औरतों के हकों में लगातार भारी कटौती हो रही है. अमेरिका में अबौर्शन का हक छीन लिया गया है. अमेरिका में जो औरतें चर्च जाती हैं उन्हें अपने पतियों की सेवा और धर्म की सेवा के लिए उकसाया जा रहा है.

भारत में अबौर्शन के हक पर सरकारी पहरा बैठाया हुआ है. औरतों को आर्टिफिशियल इनसैमिनेशन की नई मैडिकल तकनीक का फायदा उठाने नहीं दिया जा रहा. औरतों को पाप के कामों में बड़ी संख्या में धकेला जा रहा है. औरतों के घरों की शांति रातभर चलने वाले धार्मिक भजनों के कानफोड़ू रिकौर्डों से भंग की जा रही है.

भारत में लड़कियों पर अपने मन का साथी चुनने पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं. दूसरे धर्म के जने से ही नहीं दूसरी जाति के लड़के से प्रेम करने के हक पर भी पाबंदियां लगाई जा रही हैं. रेप कानून में रेप की डैफिनिशन ऐसी कर दी गई है कि रेप हुआ या नहीं उलझ कर रह गया है.

वोटिंग के राइट से धार्मिक और पुलिसिया की धौंस तो बढ़ गई है पर महिलाओं के राइट नहीं बढ़ रहे. वे पढ़लिख कर आगे आ रही हैं पर वोटिंग का बराबर का हक पाते हुए भी अमेरिका और भारत में दोनों में धर्म की धौंस की वजह से 10% औरतें भी मंत्री, सांसद, विधायक नहीं हैं.

औरतों को वोटिंग राइट पूरी तरह इस्तेमाल करने चाहिए, पति और धर्म के इन्फ्लुऐंस से हट कर. औरतों को अपने खुद के डिस्कशन गु्रप बनाने चाहिए जहां उन के राइट्स की बातें हों उन की ड्यूटीज की नहीं. उन की किट्टी पार्टियों में धर्मप्रचार न हो. वे कलश यात्राओं में पैदल चलने से इनकार कर दें. वे दान मंदिरों की जगह औरतों को पावरफुल बनाने वालों को दें. वोट का हक नायाब है, सैकड़ों साल बाद मिला, इसे मंदिरों, चर्चों, मसजिदों, गुरुद्वारों में दान न कर आएं.

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