Parenting and drug abuse : जब घर का कोई भी मेंबर खासतौर पर बच्चे ड्रग्स की लत का शिकार हो जाते हैं, तो उस घर को बिखरने में देर नहीं लगती. यह केवल उस व्यक्ति की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि पूरा परिवार एक “इमोशनल रोलरकोस्टर” से गुजरने लगता है.

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आजकल लोगों के पास न तो बच्चों को देने के लिए समय है और ना ही उन्हें समझने की काबिलियत उल्टा वे बहुत कम उम्र से बच्चों के हाथ में मोबाइल पकड़ा कर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा लेते है क्योंकि इसमें बच्चे भी खुश रहते है और मातापिता को भी बच्चों के साथ एफर्ट नहीं करना पड़ता.

इसी का नतीजा होता है बच्चे कई बार गलत संगत का शिकार हो जाते है. शुरू में तो ये मौज-मस्ती के लिए होता है, लेकिन धीरे-धीरे ये आदत हेल्थ, सोच और जिंदगी पर कब्जा कर लेती है. इससे उनका करियर तो बर्बाद होता ही है, साथ ही हेल्थ पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. आइये जाने अगर घर का बेटा ड्रग्स का शिकार हो जाता है, तो किस तरह पूरा घर बिखरने लगता है और ऐसे सिचुएशन को कैसे डील करें

घर का माहौल कैसा हो जाता है-

1 माता पिता जासूस की तरह व्यवहार करने लगते हैं.

घर के हर सदस्य को ट्रस्ट इशू हो जाता है. माता पिता जासूस बन जाते है. उन्हें हर वक्त शक रहता है बेटा कुछ गलत है. वे कभी उसकी जेब चेक करते हैं कि कहीं ड्रग्स जेब में तो नहीं है.

अगर बेटा कुछ देर भी लेट हो जाएं तो लगता है कहीं ड्रग्स तो नहीं लेने चला गया.

बेटे की किसी बात पर पेरेंट्स को विश्वास नहीं रह जाता है.

वहीं दूसरी तरफ बेटा भी परेंट्स के डर की वजह से हर बात में झूठ बोलता है और बातें छिपाने लगता है.

2 कुछ गलत होने का डर हर वक्त सताता है

हर वक्त लगता है कि कहीं बेटे को कुछ हो ना जाए. वो ड्रग्स की कहीं ओवरडोज़ न कर लें.

गलत प्रवति के लोगों की संगत में रहने से कहीं कोई उसे मार ना दें.

पुलिस उसे कहीं पकड़ कर ना ले जाएं.

3 घर में फाइनैंशली प्रौब्लम होने लगती है.

नशा करना पूरे परिवार को भरी पड़ता है इससे घर का पैसा धीरेधीरे ख़त्म होने लगता है. नशा करने वाला इसके लिए चोरी छिपे घर का सोना और कीमती सामन तक बेच डालता है.

इसके आलावा नशा छुड़वाने के लिए होने वाला ट्रीटमेंट भी घर का बजट बिगड़ देता है.

4 लोग क्या कहेंगे का सामाजिक दबाव पूरे परिवार पर आता है

जब रिश्तेदार और मोहल्ले पड़ोस में ये खबर फैलती है कि शर्मा जी का बेटा ड्रग्स लेता है तो एक तरह से उस परिवार का जीना दुर्भर हो जाता है, वे किसी भी फैमिली फंक्शन में जाने से कतराने लगते है क्योंकि सबके पास उन्ही के घर के किस्से होते है. एक तरह से उस फैमिली का बॉयकाट किया जाता है. लोग अपने बच्चों को उस घर से दूर रखना चाहते है.

भाई बहन भी शर्मिंदगी की वजह से लोगों से मिलना बंद कर देते है क्योंकि कहीं न कहीं उनका भी सामाजिक बहिष्कार होता है. इसका प्रभाव उनकी पूरी जिंदगी पर पड़ता है.

5 पेरेंट्स गिल्टी फील करने लगते है

कई बार मां डिप्रेशन में चली जाती है. उसे लगता है वो बच्चे की परवरिश अच्छे से नहीं कर पाएं. वे गिल्ट में आकर कोई गलत कदम भी उठा बैठती है. बाप भी खुद को जिम्मेदार मानता है और गहरे गम में डूब जाता है. अपने बेटे को नशे में डूबा हुआ देखना उन्हें जीते जी मार देता है.

इस समस्या से कैसे डील करें-

समस्या का हल समझदारी से निकालें

बेटे को टार्चर करना, रोना धोना करना, मारपीट करना किसी समस्या का हल नहीं है. इस बात क समझें बेटा अब बीमार हो चूका है उसे आपकी कोई बात समझ नहीं आएगी. इसलिए ठन्डे दिमाग और शांति से घर का माहौल सबसे पहले ठीक करें.

बेटा किस तरह का नशा करता है ये जानें

सबसे पहले बेटे से आराम और प्यार से बात करें. उससे यह जाने की कोशिश करें कि- उसे यह लत कैसे लगी? वह किस तरह का नशा करता है? उसे ड्रग्स मिलती कहाँ से है?उसका उठना बैठना किन लोगों में है? वह कब से ऐसा कर रहा है? वह इन चीजों के लिए पैसा कहाँ से लता है? कहीं कोई और गलत काम तो बेटा नहीं कर रहा? बेटे की लत को बीमारी की तरह लें. इस बात को समझें की आपका बेटा बीमार है इसलिए उसे कोसने के बजाएं उसे समझने की कोशिश करें. उसे इलाज की जरुरत है आपकी जली कटी बातों और तानों की नहीं.

बेटे का भरोसा जीतने की कोशिश करें

बेटे को ये अहसास कराएं कि हमें पता है तुम भी दुखी हो, हम तुम्हारी मदद कर सकते है इस सब से बाहर निकलने में, बस तुम्हें हमारा हाथ थामना होगा. अगर तुम साथ दोगे तो हम बहुत जल्द तुम्हें इस नशे की गिरफ्त से बाहर निकाल लेंगे. अगर बेटा डॉक्टर के पास जाने क तैयार नहीं हुआ तो आप उसे तैयार करें.

डौक्टर या काउंसलर

नशे की लत छुड़वाने में कॉउंसलिंग का काफी अहम् रोल होता है. किसी अच्छे मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या एडिक्शन काउंसलर से मिलें. CBT (Cognitive Behavioral Therapy) मरीज को उन ट्रिगर्स (कारणों) को पहचानने में मदद करती है जिनकी वजह से वह नशा करता है.

रिहैब सेंटर (Rehab)

अगर स्थिति गंभीर है, तो उसे किसी अच्छे नशामुक्ति केंद्र में भर्ती कराने पर विचार करें. यहाँ मरीज की नशे की लत छुड़वाई जाती है. योग, मदिताशन के जरिये मरीज को वापस जिंदगी की तरफ लाने का प्रयास किया जाता है.

डिटॉक्स (Detoxification)

शरीर से जहर निकालने के लिए चिकित्सकीय देखरेख जरूरी है. इसमें मरीज को कुछ दिनों के लिए अस्पताल या सेंटर में रखा जाता है. शरीर से ड्रग्स के जहरीले तत्वों को निकाला जाता है. यह प्रक्रिया हमेशा डॉक्टर की देखरेख में होनी चाहिए, क्योंकि अचानक नशा छोड़ने से मरीज को दौरे पड़ सकते हैं या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

सपोर्ट ग्रुप्स (Support Groups)

Narcotics Anonymous (NA) एक ऐसा मंच होता है जहाँ पूर्व नशा करने वाले लोग एक-दूसरे के अनुभव साझा करते हैं और साथ मिलकर नशा छोड़ने की हिम्मत जुटाते हैं. यह पूरी तरह गोपनीय होता है.

ड्रग एडिक्ट भी धयान दें

जब तक आप खुद नहीं चाहेंगे, कोई और आपका नशा नहीं छुड़ा पाएगा. सबसे पहले मन में ठान लें कि आप नशा छोड़ना चाहते हैं.

शुरू में अपनी बात पर टिके रहने में दिक्कत आएगी, लेकिन अपने मन को मजबूत रखें.

लत छोड़ने की वजहों को दिन में बार-बार मन में दोहराएं. हो सके तो ऐसी जगह पर लिखकर लगा दें, जहां आपकी बार-बार नजर पड़ती हो.

ड्रग्स की लत छोड़ने के लिए जरूरी है कि आप अकेले न रहें. लोगों से दोस्ती करें ताकि आपके दिमाग में अगर नशे से जुड़ा कोई ख्याल आता है तो आप उस पर ध्यान न दे पाएं. दोस्तों के साथ आउटिंग करें.

कई बार नशे की शुरुआत दोस्तों के साथ ही होती है. ऐसे में अगर आपको कोई फोर्स कर रहा है तो आपको न भी कहना होगा. नहीं चाहिए, मैं इससे दूर रहता हूं, मम्मी पापा ने मना किया है, जैसे जवाब देने में संकोच न करें.

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