Indian Idol :  ओडिशा की गलियों से निकल कर इंडियन आइडल के मंच तक पहुंचने वाली ज्योतिर्मयी नायक  की कहानी सिर्फ सुरों की नहीं, हिम्मत और पैशन की भी है. 24 साल की ज्योतिर्मयी ने न सिर्फ 26 जुलाई, 2026 को इंडियन आइडल सीजन 16 का खिताब जीत कर ट्रौफी अपने नाम की बल्कि ओडिशा से यह खिताब जीतने वाली पहली गायिका बन कर इतिहास भी रच दिया.

लोक संस्कृति और शास्त्रीय संगीत की जड़ों से जुड़ी ज्योतिर्मयी की आवाज में एक अजीब सा सुकून है जो सुनने वाले के दिल को छू लेता है. इंडियन आइडल से पहले उन्होंने 1000 से ज्यादा ओडिया गाने गाए और कैंसर मरीजों के लिए म्यूजिक थेरैपिस्ट के रूप में काम कर के साबित किया कि संगीत सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि हीलिंग भी है. उन्हें बचपन से ही संगीत की दुनिया में बहुत से अवार्ड्स मिले हैं. इंडियन आइडल से पहले वे ओडिशा की जानीमानी प्लेबैक सिंगर थीं और 1000 से ज्यादा ओडिया भक्ति और फिल्मी गाने गा चुकी हैं. फिल्म इश्क पुनी थारे से उन्होंने प्लेबैक डेब्यू किया था.

ज्योतिर्मयी का मानना है कि एक लड़की का सपना छोटा शहर देख कर खत्म नहीं होता बस उसे उड़ान देने वाला कोई चाहिए. घरपरिवार की सपोर्ट और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है जो लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बन गया है. आज ज्योतिर्मयी सिर्फ एक सिंगर नहीं बल्कि उन तमाम महिलाओं की आवाज भी हैं जो घरगृहस्थी के साथ अपने जनून को भी जिंदा रखना चाहती हैं.

आइए, जानते हैं ज्योतिर्मयी के सफर के बारे में कि कैसे इरादे मजबूत हों तो सुर भी रास्ता बना देते हैं:

ज्योतिर्मयी भुवनेश्वर के एक मिडल क्लास फैमिली से तअल्लुक रखती हैं. उन की मां गौरी नायक हाउस वाइफ हैं और पिता चक्रधर नायक सेल्स अकाउंटैंट का काम करते हैं. एक बड़ा भाई है जो जरमनी में रहता है. संगीत की शिक्षा उन्होंने गुरु बालकृष्ण बेहेरा और शारदा प्रसन्न साहू से ली.

अपनी जर्नी के बारे में बताते हुए ज्योतिर्मयी कहती हैं, ‘‘हमारे घर में प्रोफैशनली कोई संगीत से नहीं जुड़ा था. लेकिन मेरे पापा को हमेशा गाने सुनने का बहुत शौक था. दरअसल, मेरे पापा के दादाजी तबला वादक थे. संगीत की वह विरासत वहीं से पापा तक पहुंची और फिर पापा से मु?ा तक आई. मेरे पापा पेशे से सेल्स अकाउंटैंट हैं. उन की संगीत में बहुत रुचि थी लेकिन वे इसे अपने कैरियर के रूप में आगे नहीं बढ़ा पाए. इसलिए उन्होंने अपना सपना मुझ में देखा और बचपन से ही मुझे संगीत सीखने के लिए प्रोत्साहित किया.

‘‘मैं ने क्लास 3 से शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया. धीरेधीरे मेरी रुचि बढ़ती गई. फिर क्लास 5 से मैं ने छोटेछोटे रिऐलिटी शोज और राज्य स्तर की सिंगिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया. हमारे ओडिशा में एक शो होता था ‘वौइस औफ ओडिशा जूनियर’ जब मैं क्लास 7 या 8 में थी तब मैं ने उस में भाग लिया. साल, 2014 की बात है. उस शो में मैं फाइनलिस्ट बनी. वही मेरे लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पौइंट था. पहली बार मु?ो महसूस हुआ कि शायद मैं सही दिशा में जा रही हूं और मुझे संगीत में आगे बढ़ना चाहिए. उस शो के बाद मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया और सीखने की इच्छा भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई.’’

कुछ नया करने का शौक

वे आगे कहती हैं, ‘‘इस के बाद मैं ने नैशनल लैवल के रिऐलिटी शोज के लिए कोशिश शुरू की. मैं ने इंडियन आइडल का जूनियर औडिशन दिया. वहां मैं टौप 50 तक पहुंची लेकिन आगे जा कर ऐलिमिनेट हो गई. उस समय थोड़ा बुरा लगा लेकिन मैं ने हार नहीं मानी. मैं ने सोचा कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है. फिर जब मेरी उम्र बढ़ी और मैं सीनियर कैटेगरी के लिए ऐलिजिबल हुई तब तक मैं क्लास 10 और 11 में पहुंच चुकी थी. मैं पढ़ाई में अच्छी थी और मैं ने साइंस ली थी. उस दौरान पढ़ाई भी बहुत महत्त्वपूर्ण थी. मैं ने सीनियर कैटेगरी के लिए

4-5 दफा ट्राई किया मगर रिजैक्ट हो गई. फिर मेरी क्लास 12 की तैयारी शुरू हो गई. मैं ने अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया और लगभग 8त्न अंकों के साथ 12वीं पास की. फिर कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (बीटैक) की पढ़ाई शुरू की.

‘‘पढ़ाई के साथसाथ मैं ने अपना संगीत भी जारी रखा. साल, 2019 से मैं ने प्लेबैक सिंगिंग शुरू की. शुरुआत में लोग मु?ो मेरे नाम से नहीं जानते थे लेकिन मेरे गानों से पहचानने लगे थे. मेरे कई गाने ओडिशा में लोकप्रिय हुए और धीरेधीरे मु?ो वहां प्लेबैक सिंगर के रूप में पहचान मिलने लगी. मैं लगातार रिकौर्डिंग करती रही और स्टेज शोज भी करती रही. इसी दौरान मैं ने अपनी इंजीनियरिंग भी पूरा की. पढ़ाई और संगीत दोनों को साथ ले कर चलना आसान नहीं था. लेकिन मैं ने दोनों को बैलेंस किया. बीटैक पूरा होने के बाद मैं ने सोचा कि संगीत के क्षेत्र में कुछ नया भी सीखना चाहिए. इस की एक वजह यह भी थी कि हमारे काम में हर साल एक औफ सीजन आता है. इसलिए मैं ने म्यूजिक थेरैपी का औनलाइन कोर्स किया और कैंसर पेशैंट्स को म्यूजिक थेरैपी दी. फिर मैं ने बच्चों को गाना सिखाना भी शुरू किया. मेरा कौन्फिडैंस काफी बढ़ चुका था. मेरी मम्मी का भी सपना था कि मैं इंडियन आइडल जीतूं. सो मैं ने एक बार फिर इंडियन आइडल के लिए अटैंपट किया और सफल हुई.’’

चुनौतियां

‘‘हर क्षेत्र की तरह इस इंडस्ट्री में भी चुनौतियां हैं. एक छोटे से शहर से निकल कर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना बिलकुल आसान नहीं था. ऐसे लोग भी मिलते हैं जो कहते हैं कि आप कंप्रोमाइज करो तो आप को गाना मिल जाएगा. कुछ लोग आप को कंट्रोल भी करने की कोशिश करते हैं. यह सब भी फेस करना पड़ता है. लेकिन मेरा मानना है कि प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत की हमेशा अपनी पहचान होती है. मैं अपने काम पर पूरा ध्यान देती हूं, लगातार सीखती रहती हूं और सकारात्मक लोगों के साथ काम करने की कोशिश करती हूं. मुझे विश्वास है कि अगर आप अपनी कला और अपने मूल्यों के प्रति ईमानदार हैं तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है.

‘‘कई बार लोगों ने कहा कि इतनी बड़ी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना मुश्किल है लेकिन मेरे मातापिता ने कभी मु?ो रुकने नहीं दिया. उन्होंने हमेशा मेरी प्रतिभा पर विश्वास किया और हर कदम पर मेरा हौसला बढ़ाया. उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं एक छोटे शहर से हूं या मेरे सपने बहुत बड़े हैं. जब भी मैं किसी औडिशन में असफल हो कर घर लौटती थी तो वे मु?ा यही कहते थे कि हार मानने वालों को मंजलि नहीं मिलती. उन के भरोसे और लगातार मिले प्यार ने मु?ो हर बार फिर से खड़े हो कर आगे बढ़ने की ताकत दी.’’

म्यूजिक थेरैपिस्ट के रूप में काम

‘‘हमारे यहां बारिश के मौसम में स्टेज शोज काफी कम हो जाते हैं. रिकौर्डिंग तो होती है लेकिन उतनी नहीं जितनी बाकी समय में होती है. हमारे लिए असली सीजन गणेश पूजा के बाद शुरू होता है इसलिए बारिश का समय औफ सीजन माना जाता है.

‘‘मैं ने सोचा कि इस समय को सिर्फ इंतजार में बिताने के बजाय कुछ नया सीखने में लगाया जाए. इसी दौरान मैं ने म्यूजिक थेरैपी की पढ़ाई की ताकि मैं संगीत को सिर्फ

एक कला के रूप में ही नहीं बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले माध्यम के रूप में भी सम?ा सकूं.

‘‘म्यूजिक थेरैपी सीखने के बाद मुझे कैंसर के मरीजों के साथ काम करने का अवसर मिला. उस अनुभव ने मु?ो जिंदगी का एक बिलकुल नया पहलू दिखाया. पहले मुझे अंदाजा नहीं था कि संगीत का हमारे दिमाग, शरीर और भावनाओं पर इतना गहरा असर हो सकता है. जब मैं उन के लिए गाती थी तो उन के चेहरों पर मुसकान आ जाती थी और उन का मन हलका हो जाता था. इस से कुछ देर के लिए ही सही वे अपनी तकलीफें भूल जाते थे. उन पलों ने मुझे एहसास कराया कि संगीत सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि एक ऐसी शक्ति भी है जो लोगों को उम्मीद और सुकून दे सकती है. उस दौरान मैं ज्यादा इमोशनल हो जाती थी सो मम्मी ने इस काम से थोड़ी दूरी बनाने को कहा.

‘‘आज भी एक मरीज की याद मेरे दिल के बहुत करीब है. यह कहते हुए मुझे बहुत दुख होता है कि वे आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन के साथ बिताए हुए पल मैं कभी नहीं भूल सकती. मैं उन के पास जाती थी तो वे खुश हो जाती थीं. एक दिन उन्होंने मेरे लिए अपने हाथों से बहुत प्यार से एक केक बनाया. वह सिर्फ एक केक नहीं था बल्कि मेरे लिए उन के स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक था.’’

मुंबई आ कर सब से बड़ा कल्चर शौक

‘‘मुंबई आ कर मेरे लिए सब से बड़ा बदलाव यहां की तेज रफ्तार जिंदगी थी. ओडिशा में जिंदगी थोड़ी शांत और सुकून भरी है जबकि मुंबई में हरकोई अपने सपनों को पूरा करने की दौड़ में लगा हुआ है. शुरुआत में इस माहौल के साथ खुद को ढालना थोड़ा मुश्किल था. अगर सब से ज्यादा किसी चीज में दिक्कत हुई तो वह खानेपीने को ले कर थी. ओडिशा का खाना, वहां का स्वाद और खाने की आदतें मुंबई से बिलकुल अलग हैं. शुरुआत में मुझे यहां के खाने के साथ एडजस्ट होने में काफी समय लगा और घर के खाने की बहुत याद आती थी.

‘‘इस के अलावा दोनों जगहों का कल्चर और लोगों का रहनसहन भी थोड़ा अलग है. ओडिशा में लोग थोड़े शांत और सहज होते हैं जबकि मुंबई की जिंदगी बहुत तेज है. शुरुआत में लोगों के साथ घुलनेमिलने और इस नए लाइफस्टाइल को समझने में थोड़ा समय लगा. इंडियन आइडल का शैड्यूल भी काफी व्यस्त था. रिहर्सल, शूट और लगातार नई चीजें सीखना. लेकिन धीरेधीरे मैं ने हर चुनौती को अपनाया. आज मुझे लगता है कि मुंबई ने मुझे सिर्फ एक बेहतर सिंगर ही नहीं बल्कि एक मजबूत और आत्मविश्वासी इंसान भी बनाया है.’’

अब तक की सब से कठिन परफौर्मैंस

‘‘मेरे लिए इंडियन आइडल का थिएटर राउंड आज भी सब से चुनौतीपूर्ण और यादगार परफौर्मैंस है. उस दिन मेरा गला बिलकुल ठीक नहीं था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे परफौर्म करूंगी. मैं एक अलग गाने की तैयारी कर के गई थी लेकिन मेरी आवाज की हालत देख कर श्रेया मैम ने मुझसे कहा कि ऐसा गाना गाओ जिस में तुम्हें ज्यादा हाई नोट्स न लगाने पड़ें और तुम अपनी आवाज को आराम से ऐक्सप्रैस कर सको. मैं ने उन की सलाह मानी और ‘सैयां पकड़ बैयां…’ गाया.

‘‘उस समय मुझे बिलकुल अंदाजा नहीं था कि यही गाना मेरे सफर का टर्निंग पौइंट बन जाएगा. थिएटर राउंड में इस गाने को मिले प्यार ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ा दिया और यही गाना आगे चल कर ग्रैंड फिनाले में भी मेरी विनिंग परफौर्मैंस बना.

‘‘आज जब उस पल को याद करती हूं तो लगता है कि कभीकभी सब से मुश्किल परिस्थितियां ही हमारी सब से बड़ी ताकत बन जाती हैं. अगर उस दिन श्रेया मैम ने मुझ पर विश्वास न जताया होता और सही सलाह न दी होती तो शायद मेरा सफर कुछ और होता. उस एक परफौर्मैंस ने मुझे सिखाया कि एक कलाकार के लिए सिर्फ अच्छी आवाज ही नहीं बल्कि सही मार्गदर्शन, खुद पर विश्वास और दिल से गाना भी उतना ही जरूरी है.’’

संगीत हीलिंग का काम करता है

‘‘मेरा मानना है कि संगीत सिर्फ मनोरंजन का ही माध्यम नहीं है बल्कि यह लोगों के मन, शरीर और आत्मा को भी छूता है. जब मैं ने म्यूजिक थेरैपी की पढ़ाई की और कैंसर के मरीजों के साथ काम करना शुरू किया तब मुझे पहली बार एहसास हुआ कि संगीत में हीलिंग की कितनी अद्भुत शक्ति होती है. कई बार हम मरीजों के ब्लड प्रैशर, औक्सीजन लैवल और उन के मूड में भी सकारात्मक बदलाव देखते थे. लेकिन मेरे लिए सब से बड़ी बात कोई रिपोर्ट नहीं थी बल्कि उन के चेहरे पर लौटती हुई मुसकान थी.’’

रियाज की अहमियत

‘‘मेरे लिए रियाज सिर्फ प्रैक्टिस नहीं बल्कि साधना है. चाहे दिन कितना भी व्यस्त क्यों न हो मैं रोज रियाज करने की कोशिश करती हूं. मेरा मानना है कि एक कलाकार जिस दिन सीखना बंद कर देता है उसी दिन उस की ग्रोथ भी रुक जाती है. इसलिए मैं हर दिन अपनी आवाज, सुर और भाव पर काम करती हूं. मेरे अनुसार असली संगीत वही है जो सीधे दिल तक पहुंचे और लोगों के भीतर कोई भावना जगा दे.’’

असफलताओं से ली सीख

‘‘इंडियन आइडल के लिए दिए गए मेरे औडिशन आज भी मुझे प्रेरित करते हैं. मैं ने कई बार औडिशन दिए लेकिन हर बार टैलीविजन राउंड तक पहुंचने से पहले ही बाहर हो जाती थी. उन असफलताओं ने मुझे कभी हिम्मत हारना नहीं सिखाया. मैं ने हर बार खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश की और अपने सपनों का पीछा करना कभी नहीं छोड़ा. आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूं तो लगता है कि वही संघर्ष मेरी सब से बड़ी ताकत बन गया. उस ने मुझे यह सिखाया कि अगर अपने सपनों पर विश्वास हो और मेहनत जारी रहे तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है.’’

ज्योतिर्मयी यानी जो प्रकाश फैलाए

‘‘मेरे लिए संगीत सिर्फ गाना नहीं बल्कि लोगों के दिलों तक पहुंचने का एक जरीया है. अगर मेरी आवाज किसी के चेहरे पर मुसकान ला सके, किसी को मुश्किल समय में उम्मीद दे सके या कुछ पल सुकून दे सके तो यही मेरे नाम का असली अर्थ होगा. मैं चाहती हूं कि अपनी आवाज के माध्यम से प्यार, सकारात्मकता और उम्मीद का प्रकाश दुनिया में फैलाऊं.’’

मेरे कई गाने ओडिशा में लोकप्रिय हुए और धीरेधीरे मुझे वहां प्लेबैक सिंगर के रूप में पहचान मिलने लगी. मैं लगातार रिकौर्डिंग करती रही और स्टेज शोज भी करती रही. इसी दौरान मैं ने अपनी इंजीनियरिंग भी पूरा की. पढ़ाई और संगीत दोनों को साथ ले कर चलना आसान नहीं था…

असफलताओं ने मुझे कभी हिम्मत हारना नहीं सिखाया. मैं ने हर बार खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश की और अपने सपनों का पीछा करना कभी नहीं छोड़ा. आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूं तो लगता है कि वही संघर्ष मेरी सब से बड़ी ताकत बन गया…

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