Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहन के प्यार भरे रिश्ते का त्योहार माना जाता है. अगर देखने जाए तो भाई बहन का रिश्ता सबसे पहले वह रिश्ता है, जहां पर दोस्ती प्यार तकरार यहां तक की मारपीट गुस्सा होना रूठना मनाना आदि कई विभिन्न रंगों से जुड़ा होता है.
भाई एक बार बहन की गलतियां छुपाने में भले ही उसकी मदद ना करें, लेकिन ज्यादातर बहने भाई की गलतियों को हमेशा मां-बाप से छुपाती है ताकि भाई डाट या मार खाने से बचा रहे . प्यार करने वाली बहन भाई को सिर्फ डाट खाने से ही नहीं बचाती बल्कि हर मुश्किल वक्त में अपने भाई की ढाल बनकर खड़ी रहती है और उसका साथ देती है. भाई भी अपनी बहन के लिए पॉकेट मनी से पैसे बचाकर गिफ्ट लेकर भी आते है . ताकि बहन को रक्षाबंधन पर गिफ्ट दे सके. यहां तक कि भाई बहन की हर समय रक्षा भी करता हैं,बहन को बूरी नजर और बुरे लोगों से भी बचा कर रखता है.
यह प्यार भरा रिश्ता तब तक फलता फूलता रहता है , जब तक की भाई बहन के रिश्ते में स्वार्थ का आगमन नहीं होता. जब तक भाई बहन एक साथ होते हैं और उनके अपने खुद के परिवार नहीं बनते और वह अपने मां-बाप के साथ अपने घर में बड़े होते हैं तब तक भाई बहन के बीच प्यार भरा रिश्ता एक दूसरे के प्रति चिंता ,एक दूसरे की भावनाओं की परवाह सभी कुछ शामिल होता है.
लेकिन जैसे ही बहन की शादी होती है और वह अपने पति के घर चली जाती है, और भाई भी शादी करके अपनी खुद की गृहस्थी बसा लेता है, उस दिन से ही भाई बहन का रिश्ता फॉर्मेलिटी अर्थात दिखावे का रिश्ता बन के रह जाता है. जिसमें भाई बहन भले ही साल भर एक दूसरे की शक्ल भी ना देखें लेकिन रक्षाबंधन पर पूरे रीति रिवाज के साथ रक्षाबंधन का त्यौहार मनाते हैं.
हमेशा एक साथ रहने वाले और अपनी हर बातें एक दूसरे से शेयर करने वाले भाई बहन अचानक ही तब पराए हो जाते हैं जब भाई की जिंदगी में उसकी पत्नी और बच्चे परिवार के रूप में शामिल होते हैं, और बहन शादी करके भाई और अपने परिवार से कोसों दूर चली जाती है, कई बार ऐसा भी होता है की भाई अमीर होता है और बहन पैसे से गरीब, उस दौरान भी भाई अपनी पत्नी के कहने पर पैसे बचाने या मदद ना करने के चक्कर में बहन से कन्नी काटने लगता है और एक दूरी कायम कर लेता है, क्योंकि शादी के बाद ज्यादातर लड़के घर में शांति बनाए रखने के लिए और पत्नी को खुश करने के चक्कर में वही करते हैं जो उनकी पत्नी उनसे कहती है, और ज्यादातर देखा गया है कि भाभियों को ननद फूटी आंख नहीं भाती.
कई भाभियों को तो नंनद का घर आना ज़हर जैसा लगता है , जिसके चलते कई बहने अपने ही मैके में पराया सा महसूस करती हैं.
भाई बहन के बीच एक ऐसी अनदेखी दीवार खड़ी हो जाती है जो अपनों द्वारा ही बनी होती है. वैसे इसमें गलती ज्यादा भाई की भी होती है कि वह बहन को सिर्फ रक्षाबंधन में ही अपनी शक्ल दिखाते हैं बाकी घर के किसी फंक्शन में बहन को बुलाने में कतराते हैं कि भाई बहन से प्यार नहीं करते लेकिन अपने स्वार्थ और मौका परस्ती के चलते भाई ईमानदारी से अपना रिश्ता निभाना लगभग भूल जाते हैं. भाइयों की विभिन्नता पर नजर डाले तो तो भाइयों के कई प्रकार होते हैं जो अपने जरूरत और अपने हिसाब से रिश्ता निभाते हैं, पेश है इसी सिलसिले में भाई बहन के रिश्तों को लेकर खास पेशकश रक्षाबंधन स्पेशल पर……
रक्षाबंधन का त्यौहार हिंदुस्तान के घर-घर में हर जाति में मनाया जाता है. क्योंकि यह त्यौहार भाई बहन के रिश्ते को पवित्र पहचान देता है, और भाई बहन का रिश्ता हर जाति हर धर्म का इंसान चाहता है. क्योंकि यह एक पवित्र रिश्ता है जो प्यार और विश्वास पर केंद्रित है. खासतौर पर एक शादीशुदा लड़की के लिए रक्षाबंधन का त्यौहार बहुत मायने रखता है क्योंकि वह इसी त्यौहार के तहत अपने मायके जाकर परिवार के सभी सदस्यों से मिल पाती है और एक क्वालिटी टाइम अपने परिवार के साथ बिताने का उसको मौका मिलता है. जिसके लिए वह कई दिनों पहले से तैयारी शुरू कर देती है फिर चाहे खुद के लिए साज श्रृंगार का सामान खरीदना हो या भाई के लिए मिठाई और राखी खरीदना ही क्यों ना हो, जिसके लिए वह खुशी-खुशी तैयारी करती है. लेकिन उस वक्त उसका दिल टूट जाता है, जब अपने ही घर में भाइयों के द्वारा परायापन महसूस होता है.
इसके पीछे कई तरह के कारण होते हैं और कई तरह के भाई होते हैं जो इस पावन मौके पर भी अपनी बहन को दुखी कर देते हैं,
जैसे मौका परस्त भाई….. कुछ भाई ऐसे होते हैं जो पूरी तरह मौका पारस होते हैं और उनकी लाइफ का फंडा होता है , अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता, अर्थात जब तक बहन घर पर होती है , और वह बहन पर निर्भर होते हैं दोनों में से किसी की भी शादी नहीं हुई होती बहन इस भाई का सारा काम भी करती है , भाई पूरी तरह से बहन पर निर्भर होता है उस दौरान यह मौका परस्त भाई बहन को अपनी पलकों पर सजाए रखना है उसकी हर बात मानता है. लेकिन जैसे ही इसी बहन की शादी होती है और वह अपने ससुराल चली जाती है तो यही भाई उसको पूरी तरह भूल भी जाता है ,
और दुनिया को दिखाने के लिए ऐसे मौका परस्त भाई रक्षाबंधन पर तो बहन को बुला लेते हैं लेकिन उसके बाद पूरा साल बहन की तरफ मुड़कर भी नहीं देखते.
जोरू के गुलाम भाई….. कुछ भाई ऐसे भी होते हैं, जो अपनी बहन से प्यार तो करते हैं लेकिन बीवी के डर के मारे बहन से दूरी बनाए रखते हैं. क्योंकि जोरू के गुलाम भाई की बीवी को पसंद नहीं होता कि उसकी ननंद बार-बार उसके घर आकर भाई और भाभी को परेशान करें, क्योंकि ज्यादातर भाभियों को ननंद बिल्कुल पसंद नहीं होती , और इन दोनों ने भाभी के बीच 36 का आंकड़ा होता है , जिसमें पति फंस कर अपनी शांति भंग कर बैठता है , भले ही ऊपरी तौर पर भाई को दिखाने के लिए बहन से भाभी दो मीठे बोल बोल लेती है . लेकिन रक्षाबंधन खत्म होते ही भाई बहन एक दूसरे से दूरी बना लेते है . और पूरा साल किसी भी फैमिली फंक्शन में बहन को नहीं बुलाया जाता . जिसकी वजह से बहन अपने ही घर में पराया हो जाती है. खास तौर पर जिन लड़कियों का मैका और ससुराल अलग अलग शहरों में होता है और उनके लिए ससुराल से मायका आना आर्थिक तौर पर आसान नहीं होता ऐसी लड़कियां भाई के जोरू का गुलाम होने की वजह से अपने ही घर में आने में वंचित रह जाती है. क्योंकि जब भाई ही जोरू का गुलाम है और बहन को अपने ही घर बुलाने में दिलचस्पी नहीं दिखता तो बाकी सदस्यों को क्या ही बोले.
प्रॉपर्टी को लेकर लालची भाई…..
कुछ भाई ऐसे भी होते हैं जिनका मकसद अपनी बहन पर प्यार लूटाना नहीं बल्कि बहन को साइड करके पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम करना होता है ऐसे में बहन का प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट पर एक साइन पाने के लिए भाई बहन की सिर्फ रक्षाबंधन पर ही नहीं बाकी फेस्टिवल में भी जूस शॉप से खातिरदारी करता है. लेकिन जैसे ही बहन भाई के नाम प्रॉपर्टी करने के लिए हस्ताक्षर कर देती है उसके बाद ही भाई पूरी तरह पलटी मार जाता है और अपना काम बनते ही बहन से रिश्ता भी सिर्फ फॉर्मेलिटी का ही रखता है.
इन सभी कड़वे अनुभव को ध्यान में रखते हुए एक गाना ध्यान में आता है जो मौका परस्ती पर पूरी तरह फिट है ,कसमे वादे प्यार वफा सब बाते है बातों का क्या , कोई किसी का नहीं ये झूठे नाते है नातो का क्या….
कहने का मतलब यह है कि आप पैसों के लालच में या खुदगर्जी में जिन रिश्तों को दूर कर देते हैं वही रिश्ते आपको तब याद आते हैं जब आपके पास सब कुछ होता है , लेकिन आपसे प्यार से बात करने वाला कोई नहीं होता , जिंदगी में कुछ भी स्थाई नहीं है ना हीं पैसा और ना ही चालाकी, अगर कुछ स्थाई है आपके द्वारा निभाया गया ईमानदारी से प्यार भरा रिश्ता , फिर वह भाई बहन का रिश्ता हो या दोस्ती का , आखिरी वक्त में या यू कहे बुरे वक़्त में वही रिश्ते काम आते हैं, जो आपने प्यार अपनेपन और ईमानदारी से संजोये होते है , इसलिए इस रक्षाबंधन से ही ठान ले कि किसी भी हालत और हालात में आप अपनी बहन को अकेला नहीं छोड़ेंगे और हमेशा उसका साथ निभाएंगे..
