Parvathy Thiruvothu: पार्वती थिरुवोथु (ऐंपावरमैंट थ्रू ऐंटरटेनमैंट अवार्ड (औनस्क्रीन) जिन की अदाकारी का लोहा आज पूरी सिनेमा इंडस्ट्री मानती है. उन्होंने किरण टीवी में टैलीविजन ऐंकरिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की और किस्सेकहानी सुनने और सुनाने की कला से ऐसे प्रभावित हुईं कि उन के अंदर की अदाकारा साउथ के पूरे भारत की चहेती ऐक्ट्रैस बन गई.

पार्वती के पिता पी. विनोद कुमार और माता टी.के. उषा कुमारी दोनों ही पेशे से वकील हैं. लेकिन उर्वशी का हमेशा से साहित्य और कला के प्रति रुझान रहा. इसलिए उन्होंने आल सेंट्स कालेज, थिरुवनंतपुरम से इंग्लिश लिटरेचर में डिगरी प्राप्त की और फिर एक ऐंकर के रूप में टेलीविजन इंडस्ट्री से कैरियर की शुरुआत की. भरतनाट्यम के प्रति कठोर समर्पण ने भी उन की कला को निखारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन की कला को नया रूप दिया.

पार्वती ने अपने अभिनय की शुरुआत मलयालम फिल्म ‘आउट औफ सिलेबस’ (2006) से की और जल्द ही ‘नोटबुक’, ‘विनोद यात्रा’ और ‘मिलाना’ जैसी फिल्मों में भावनात्मक रूप से प्रदर्शित होने वाले अपने अभिनय के लिए जानी जाने लगीं. तमिल फिल्म ‘पू’ (2008) में अपनी भूमिका के लिए उन्होंने भाषा सीखी और पूर्ण शारीरिक बदलाव किए और उन की यह सारी मेहनत रंग लाई. उन्हें इस अभिनय के लिए बहुत प्रशंसा मिली फिर तारीफों का सफर चलता चला गया.

अपनी आगे की फिल्मों में भी जैसे ‘बैंगलुरु डेज,’ ‘एन्नु निंटे मोइदीन’ और ‘चार्ली’ में अपनी उत्कृष्ट भूमिकाओं के लिए वे तारीफ बटोर आगे चलती चली गईं. ‘टेक औफ’ (2017) में समीरा के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार स्पैशल मेंशन जीता. ‘उयारे,’ ‘वायरस,’ ‘पुझु’ और ‘करीबकरीब सिंगल’ में पार्वती का काम भारतीय सिनेमा में बैंचमार्क बनाए हुए है.

रिमार्केबल वर्क

– ‘पू’ (2008)- तमिल डेब्यू, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता.

– ‘बैंगलुरु डेज’ (2014)- आरजे सारा, पहनावा पंथ क्लासिक.

– ‘एन्नु निंटेमोइदीन’ (2015)- कंचनमाला, केरल राज्य फिल्म पुरस्कार.

– ‘चार्ली’ (2015)- टेसा, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार.

– ‘टेकऔफ’ (2017)- समीरा, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विशेष उल्लेख.

– ‘करीबकरीब सिंगल’ (2017)- इरफान खान के साथ हिंदी डेब्यू.

– ‘उयारे’ (2019)- ऐसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में समीक्षकों द्वारा प्रशंसित.

– ‘वायरस’ (2019), ‘पुझु’ (2022), ‘थांगलान’ (2024)- बहुमुखी प्रतिभा और गहराई को दर्शाती भूमिकाएं.

सम्मान एवं पुरस्कार

– राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार- विशेष उल्लेख (टेक औफ).

– सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार (एन्नु निंटे मोइदीन, चार्ली).

– दक्षिण इंडस्ट्री में 5 फिल्म फेयर पुरस्कार.

– भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेता.

– सर्वश्रेष्ठन वोदित अभिनेत्री के लिए विजय पुरस्कार (पू).

– एकाधिक SIIMAऔर एशियानेट फिल्म पुरस्कार.

– वूमन इन सिनेमा कलैक्टिव की माननीय संस्थापक के रूप में, लैंगिक समानता पर विशेष अभिवक्ता रहीं.

अदाकार के साथ आयरन लेडी भी

पार्वती थिरुवोथु सिर्फ एक अदाकार ही नहीं बल्कि एक आयरन लेडी भी हैं. पार्वती मलयालम, तमिल, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा में प्रगतिशील बदलाव के लिए भी जानी जाती हैं, जिस का कारण है उन का फिल्म इंडस्ट्री में लैंगिक न्याय और संरचनात्मक सुधार के लिए अपनी आवाज उठाना.

इस के लिए उन्होंने इंडस्ट्री में लैंगिक न्याय और मुद्दों को महत्त्व और संबोधित करते हुए वूमन इन सिनेमा कलैक्टिव की सहस्थापना की. अपने किरदारों को ईमानदारी से पेश कर समाज के चुनौतीपूर्ण मानदंडों को पार कर उर्वशी आज कई महत्त्वाकांक्षी कलाकारों और मीडिया में प्रतिनिधित्व चाहने वाली महिलाओं के लिए एक आदर्श बना गई हैं. वे भारतीय सिनेमा में गंभीर मुद्दे चाहे वह औन स्क्रीन या औफ स्क्रीन, दोनों ही रूप में ही संस्कृति विषयों के महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर रोशनी डालने से पीछे नहीं हटतीं.

Parvathy Thiruvothu

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