Urvashi: ’ ऐंपावरमैंट आइकन अवार्ड फिल्म ‘विदरुन्ना मोट्टुकल’ (1977) से एक बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करने वाली कविता रंजिनी, आज उर्वशी नाम के साथ एक नैशनल अवार्ड विनर और मलयालम सिनेमा की मंझ कलाकार के रूप में पूरी दुनिया में जानी जाती हैं. उर्वशी एक ऐसी अदाकार हैं जो किसी भी रोल को बड़ी सरलता और सुंदरता से पेश कर हर किसी को अपनी कला से मोहित कर लेती हैं. एक लीड कलाकार की शुरुआत 1980 में लीड ऐक्ट्रैस के रूप में उभर कर आईं उर्वशी ने मलयालम फिल्मों में धूम मचा दी और फिर उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं में 700 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. अपने शानदार कैरियर को 4 दशकों से भी अधिक समय से निभाती आ रही हैं. अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाने वाली उर्वशी ने कौमेडी से ले कर गहन विषय के कई नाटक, फिल्मों में विभिन्न प्रकार के पात्रों को सहजता से प्रस्तुत किया है. दरअसल, उर्वशी का जन्म कला से समृद्ध परिवार में हुआ था, जो कला की जड़ों से जुड़ा था. इसलिए बचपन से ही उर्वशी में कला के प्रति एक समर्पणभाव हमेशा से रहा. थिएटर और सिनेमा में मातापिता को कला की प्रस्तुति देते हुए देख कर बड़ी हुईं और आज अपनी परफौर्मैंस से वे हर तरह की भूमिका बहुत ही सहज रूप से निभा लेती हैं. उन की यह सहजता आज उन्हें मलयालम सिनेमा की एक बहुमुखी कलाकार के रूप में दर्शाती है.
सक्सैस, कमबैक और नैशनल अवार्ड
फिल्म ‘मझविल्कावडी’ (1989), ‘गौडफादर’ (1991), ‘अचुविंते अम्मा’ (2005) और ‘पार्वती परिणयम’ (1995) मेें उन्हें कुछ आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन व्यावसायिक सफलता भी पाई. एक छोटे ठहराव के बाद उन्होंने एक यादगार कमबैक किया. फिल्म ‘उल्लोझुक्कू’ (2024) में लीलाम्मा पात्र की भूमिका को उत्कृष्ट ढंग से पेश करने के लिए उन्हें 2025 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. उर्वशी ने अपने अभिनय से मलयालम सिनेमा को काफी समृद्ध तो किया ही, साथ ही महिलाओं के चित्रण को एक मजबूत रूपरेखा भी प्रदान की.
उन के किरदार अकसर हास्य और सहानुभूति के साथसाथ नारी के जीवन की जटिलताओं को भी दिखाते हैं, जो उन्हें सब का एक प्रिय आइकन बनाता है. एक ऐक्ट्रैस के रूप में उर्वशी महिलाओं को प्रेरणा देना का काम तो करती ही हैं, साथ ही सिनेमा क्षेत्र के बाहर भी बतौर एक महिला वे कला और समाज में महिलाओं की आवाज को प्रोत्साहित करने में प्रभावशाली भूमिका निभाती आ रही हैं. उर्वशी के इन्ही प्रयासों से प्रभावित हो गृहशोभा ने उन्हें ऐंपावरमैंट आइकन का अवार्ड दिया.
उर्वशी इस अवार्ड की असली हकदार भी थीं क्योंकि वे उन कलाकारों में से हैं, जिन का उद्देश्य अपनी कला से केवल नाम कमाना ही नहीं होता बल्कि समाज में बदलाव लाना भी होता है. आज उर्वशी की सफलता को देख कई महिलाएं कुछ कर गुजरने को प्रभावित हो रही हैं और ऐसे कई परिवार भी जो कला को केवल एक फालतू का शौक समझ अपनी बच्चियों को इस में आगे बढ़ने नहीं देते थे. वे आज उर्वशी की सफलता और कला से प्रभावित हो अपनी बच्चियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित कर रहे हैं.
उर्वशी की फिल्मों की सफलता इस बात का भी प्रमाण देती है कि महिला हर किरदार को चाहे वह हास्य विनोद का हो, ड्रामा हो, थ्रिलर या कुछ और उसे बखूबी से निभा सकती है क्योंकि अकसर सुनने को मिलता है कि कौमेडी रोल को करना औरतों के बस की बात नहीं, उन्हें तो सिर्फ रोतेधोते या रोमांटिक रोल ही सूट करते हैं. मगर उर्वशी की बेहतरीन परफौर्मैंस उन लोगों की छोटी सोच के विपरीत काम कर महिलाओं के लिए सिनेमा के हर रोल, हर अंदाज के अभिनय के द्वार खोलती है और उन्हें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है.
अचीवमैंट्स राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
* 2005- ‘अचुविंते अम्मा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री.
* 2025- ‘उल्लोझुक्कू’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री.
केरल राज्य फिल्म पुरस्कार- कई फिल्मों में प्रदर्शन के लिए 1989-2001 तक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (6 बार).
*अन्य पुरस्कार – सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अनेक केरल फिल्म समीक्षक पुरस्कार.
* एशियानेट फिल्म पुरस्कार, वनिता फिल्म पुरस्कार और विभिन्न लोकप्रिय सम्मान.
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