Shrenu Parikh: वडोदरा की एक साधारण फैमिली से आने वाली श्रेनु पारिख को बचपन से ही स्टेज पर परफौर्म करना, डांस और आर्ट में डूब जाना पसंद था. मगर एक पारंपरिक गुजराती परिवार में मौडलिंग और ऐक्टिंग के सपनों को ज्यादा प्रोत्साहन नहीं मिलता था. उन के पिता इंजीनियर और मां बैंकर हैं.
श्रेनु की जर्नी किसी प्लान के साथ शुरू नहीं हुई थी. बचपन में कभी उन्होंने ऐश्वर्या जैसा बनने का सपना देखा था. वे आर्टिस्ट बनना चाहती थीं. यह सपना धीरेधीरे, एकएक कदम कर के बना. श्रेनु ने अपने सपनों को कालेज तक छिपा कर रखा था. फिर उन्होंने अपना पहला ब्यूटी पेजेंट जीता और वहीं से सबकुछ बदल गया. कालेज में थिएटर और परफौर्मैंस ने उन्हें ऐक्टिंग की ओर खींचा. मुंबई आ कर जैसेतैसे औडिशन देने शुरू किए. स्ट्रगल, रिजैक्शन और सीख इन सब ने उन्हें मजबूत बनाया. उन का मानना है कि आज वे जो भी हैं उन्हीं अनुभवों का नतीजा है.
2010 में श्रेनु ने टीवी सीरियल ‘गुलाल’ से ऐंटरटेनमैंट इंडस्ट्री में डेब्यू किया. इस के बाद पहला लीड रोल टीवी सीरियल ‘हवन’ में मिला. श्रेनु को 2013 में टीवी सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं 2’ से पहचान मिली. उन्होंने 3 फिल्मों में भी काम किया. फिल्म ‘थोड़ीथोड़ी मनमानियां’ से बड़े परदे पर डेब्यू किया था. फिल्म ‘फैमिली पौलिटिक्स औफ ब्लड’ में भी काम किया. वे 2 वैब सीरीज में भी काम कर चुकी हैं. टीवी रिएलिटी शो ‘नच बलिए’ की कंटैस्टैंट भी रह चुकी थीं. दिसंबर, 2023 में उन्होंने अपने को स्टार अक्षय म्हात्रे से शादी की. उन्होंने कई ब्यूटी पेजेंट्स जीते हैं जैसेकि ‘मिस यूनिवर्सिटी,’ ‘फेस औफ द ईयर,’ ‘मिस वडोदरा’ आदि.
सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ के लिए 2014 में बैस्ट पत्नी का अवार्ड स्टार परिवार के लिए मिला और गुजराती फिल्म ‘लम्बू रास्तू’ के लिए बैस्ट डेब्यू ऐक्ट्रैस फीमेल का अवार्ड मिला. ‘इश्कबाज’ सीरियल के लिए 2017 में बैस्ट बहू का अवार्ड मिला. इन के अलावा और भी कई अवार्ड्स मिले.
अवार्ड्स से ज्यादा दर्शकों का प्यार
श्रेनु कहती हैं, ‘‘मेरे लिए इन अवार्ड्स से ज्यादा दर्शकों का प्यार माने रखता है. आज भी जब लोकल ट्रेन में या किसी ट्रिप पर लोग मुझे मेरे किसी किरदार जैसेकि ‘आस्था’ या ‘गौरी’ या ‘पार्वती’ कह कर बुलाते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. यह प्यार, यह पहचान ही मेरे लिए सब से बड़ा अवार्ड है.’’
श्रेनु टीवी सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं,’ ‘एक बार फिर,’ ‘दिल बोले ओबेराय,’ ‘इश्कबाज,’ ‘एक भ्रम सर्वगुण संपन्ना,’ ‘घर एक मंदिर,’ ‘मैत्री’ जैसे कई फेमस शोज में काम किया है. वे हर किरदार को सिर्फ स्क्रिप्ट से नहीं बल्कि अपने औब्जर्वेशन और सैंसिटिविटी से बिल्ड करती हैं. वे अपने कैरियर का बड़ा ग्रोथ पौइंट ‘इश्कबाज’ सीरियल को मानती हैं. इस शो ने उन्हें एक पहचान दी और उन की ऐक्टिंग लोगों तक पहुंची.
वे कहती हैं कि उन का बहुत से किरदारों से जुड़ाव रहा लेकिन ‘गणेश कार्तिकेय’ सीरियल में देवी पार्वती का किरदार उन के दिल के बेहद करीब है. इस में शक्ति भी है और एक मां की कोमलता भी.
श्रेनु बताती हैं, ‘‘मैं ने शुरुआत मौडलिंग से की थी. फोटो शूट्स, ब्रैंड शूट्स वगैरह में व्यस्त रहती थी. वैसे हमेशा टीवी में काम करना चाहती थी. मैं ने अलगअलग विषयों पर बहुत सारे शोज किए. लेकिन पौराणिक शो पहली बार किया और इस शो से मुझे एक अलग सुख और जुड़ाव महसूस हुआ. ये कहानियां हमें बहुत कुछ सिखाती हैं जैसे त्याग, परिवार का प्यार, कर्तव्य, शक्ति आदि.’
आइए, श्रेनु के बारे में विस्तार से जानते हैं:
फिल्मों या सीरियल्स में पहला ब्रेक?
‘‘मेरा पहला ब्रेक तब था जब मैं कालेज के लास्ट ईयर में थी. यह एक दोस्त का किरदार था जो बहुत ही आसानी से मिल गया था लेकिन मेरे पेरैंट्स चाहते थे कि मैं लास्ट ईयर कंप्लीट कर के फिर इस इंडस्ट्री में आऊं. इसलिए छोटा रोल किया जो जल्दी खत्म हो जाए और मैं पढ़ाई जारी रख सकूं. यह रोल करते समय चुनौती थी मुंबई से वडोदरा का अपडाउन. कभी भी रात को कौल आ जाता था कि कल शूट है. तब मैं कालेज मिस करती थी. मेरे पेरैंट्स मुझे बिना टिकट, जनरल टिकट पर मुंबई लाते थे फिर मैं शूट करती और वापस वडोदरा आ जाती.’’
अभी वर्तमान में आप किस शो में काम कर रही हैं?
‘‘अभी मैं सोनी सब चैनल पर आने वाले सीरियल ‘गाथा शिव परिवार की गणेश कार्तिकेय’ में देवी पार्वती का किरदार निभा रही हूं. मेरी ऐंट्री बहुत और्गेनिक तरीके से हुई. मेरे टैस्ट के दौरान जिस शांति और मातृत्व की ऊर्जा प्रोड्यूसर को चाहिए थी वह उन्हें मुझ में दिखी और मुझे यह रोल मिल गया. इस रोल की खास बात यह है कि यह सिर्फ दिव्यता नहीं बल्कि एक मां, एक पत्नी, एक महिला की आंतरिक शक्ति को भी बहुत खूबसूरती से दर्शाता है. सैट का माहौल बेहद सकारात्मक है. हरकोई एकदूसरे को सपोर्ट करता है. हमारे को ऐक्टर्स बहुत डैडिकेटेड हैं जिस से काम करना सहज हो जाता है.’’
आप को ऐक्टिंग का कौन सा पहलू सब से ज्यादा पसंद है?
‘‘मुझे कैरेक्टर बिल्डिंग बहुत पसंद है. उस के लेयर्स सम?ाना, उस की इमोशंस को महसूस करना और स्क्रीन पर उसे ब्रीथिंग रिएलिटी देना.’’
आप के जीवन और कैरियर में आप का प्रेरणास्रोत कौन रहा है?
‘‘मेरे मातापिता. उन की वैल्यूज और विश्वास ने मुझे हर उतारचढ़ाव से निकलने की हिम्मत दी.’’
ऐक्टिंग फील्ड में महिलाएं किन चुनौतियों का सामना करती हैं और उन्हें आप की क्या सलाह होगी?
‘‘इस फील्ड में काफी अनसर्टैन्टी है. आप को पता नहीं होता कि अगला रोल कब और कैसा मिलेगा या सीरियल कितना लंबा चलेगा. काम के लौंग वर्किंग आवर्स कभीकभी असहज महसूस कराते हैं. इमोशनल प्रैशर, स्टीरियोटाइप्स जैसी बहुत चीजें हैं जो चुनौती बन जाती हैं. इस फील्ड में आने वाली नई अभिनेत्रियों को मेरी यही सलाह है कि वे अपनी बाउंड्रीज सैट करें, अपनी वर्थ समझें और काम में कंसिस्टैंट रहें. काम में अपना हंड्रेड परसैंट दें.’’
आप ने जीवन में किस तरह के संघर्ष देखे हैं?
‘‘जीवन में संघर्ष बहुत पहले ही आ गया था. पहले तो एक गुजराती लड़की के लिए इस फील्ड में आना ही मुश्किल था, पेरैंट्स को इस कैरियर के लिए मनाना जिन्होंने मुझे फार्मेसी की डिगरी दिलाई थी. उस के बाद कैरियर शिफ्ट करने की जद्दोजहद. फिर दूसरा संघर्ष था मुंबई आना और यहां एडजस्ट होना. हमारा यहां कोई रिश्तेदार नहीं था तो शुरुआत से शुरू करना था. घर ढूंढ़ने में दिक्कतें आईं. मैं अकसर बहुत होमसिक हो जाती थी. फ्लैट्स में अजीब लगता था और वडोदरा बहुत याद आता था. मुंबई की लाइफ बहुत फास्ट थी. लोकल्स में आनाजाना भी जीवन का एक कठिन दौर था.
‘‘पहले शो के बाद मैं ने मन बना लिया था कि वापस चली जाऊंगी क्योंकि वह पहला शो उतना चला नहीं था. लेकिन उस वक्त मेरे परिवार ने मुझे ताकत दी और फिर से कोशिश करने को कहा. मैं ने ऐसा ही किया. फिर तो एक के बाद एक शो चलने लगे और मेरा भी मन लगने लगा.
‘‘मगर इस प्रोफैशन में मैं ने बहुत सारे पर्सनल लौसेज देखे हैं. मेरे नानानानी जिन्होंने मुझे पालापोसा था, उन के आखिरी पलों में मैं उन से मिल नहीं पाई. अपने कितने ही कजिंस और दोस्तों की शादी मिस की. ऐसा मान लीजिए कि मैं एक अलग फोकस्ड लाइफ जी रही थी, जिस में सिर्फ और सिर्फ मेरा काम था.
‘‘आज जब मैं अपने भाई के आने पर एक छुट्टी लेती हूं तो वह हैरान हो जाता है कि तुम ने छुट्टी कैसे ले ली क्योंकि कोई भी फैमिली मैंबर आता था तो वे मेरे सैट पर मुझ से मिलते थे. मैं ने ऐसे बहुत सारे सैक्रिफाइस किए हैं.’’
परिवार की कितनी सपोर्ट मिली?
‘‘मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया है, मुझ पर हमेशा विश्वास रखा है. मैं परिवार में अकेली बेटी थी, जिस ने ऐक्टिंग के फील्ड में कैरियर बनाया फिर भी मेरा परिवार हमेशा मेरी ताकत बना रहा. औडिशंस देने, वडोदरा से मुंबई ट्रेन से आना, रैंट पर घर लेना, मुझे इमोशनल सपोर्ट देना यह सब मेरा परिवार करता था.
‘‘अब अगर पति और ससुराल की बात करूं तो मेरे पति अक्षय म्हात्रे भी ऐक्टर हैं. इसलिए मेरी स्ट्रगल्स समझना उन के लिए आसान हो जाता है. छोटीछोटी बातें जैसे टिफिन बनाना, लेट पैक अप होना, रिहर्सल्स करना, ये सब मेरे साथ मेरे पति करते हैं. उन की फैमिली भी मुझे बहुत प्यार करती है और मुझे पैंपर करती है. शादी के बाद सोशल रिस्पौंसिबिलिटीज आ जाती हैं लेकिन मेरे ससुराल वाले मेरी ऐक्टिंग के फील्ड को जानते हैं. उन्होंने कभी मेरी गैरमौजूदगी को गलत नहीं समझ. उन के साथ ट्रैवल करने में मुझे बहुत मजा आता है. वे बिलकुल मेरे असली पेरैंट्स जैसे हैं. हर कदम पर उन का प्यार और समझदारी मेरे लिए स्ट्रैंथ है.’’
महिलाओं की सब से बड़ी शक्ति क्या है?
‘‘उन की रैजिलियंस गिर कर भी कई गुना मजबूती से उठना.’’
इमोशनल पल?
‘‘मेरे जीवन का बहुत इमोशनल पल वह था जब मेरे नानानानी की मौत हुई और मैं उन के पास नहीं थी. मेरी मम्मा वर्किंग मौम थीं सो जब मैं कुल 8 महीने की थी तब से मुझे मम्मी नाना के घर रखती थीं क्योंकि वह एक ऐसा पौइंट था जब मम्मी को जौब छोड़नी पड़ती. तब नाना ने कहा कि बच्ची को हम संभालेंगे. मेरे नानानानी जब बीमार थे तो मैं शूटिंग कर रही थी. नया शो था सो मुझे छुट्टी नहीं मिली. मैं उन्हें देखने भी नहीं जा पाई जब वे गुजर गए. मुझे इस बात की गिल्ट हमेशा रहेगी.
‘‘नानी के साथ भी ऐसा ही हुआ. वे बीमार थीं. तब ‘मैं इस प्यार को क्या नाम दूं’ की शूटिंग कर रही थी. भाई स्पैशली मुझे बताने आया क्योंकि वे जानते थे नानी मेरे लिए कितनी खास थीं. मैं शूटिंग में थी तो उन्होंने मेरा पैकअप होने का इंतजार किया. लेकिन अचानक एक रिश्तेदार का मैसेज आया कि आप की नानी के बारे में सुन कर दुख हुआ. मैं विश्वास नहीं कर पा रही थी. मुझे उस दिन पहली बार पैनिक अटैक आया था. मेरी टीम ने पैकअप किया और मुझे नानी के रिचुअल्स में जाने दिया. यह सब अब भी मुझे गिल्ट फील कराता है.’’
आप की सफलता का सीक्रेट क्या है?
‘‘मैं अपनी सफलता का सीक्रेट अपनी कंसिस्टैंसी, डिसिप्लिन और ग्रैटिट्यूड को मानती हूं.’’
आगे क्या करना चाहेंगी?
‘‘मैं भविष्य में कौमिक जोनर ट्राई करना चाहूंगी. मेरी कौमिक टाइमिंग नैचुरली अच्छी है सो उसे ऐक्सप्लोर करना चाहूंगी.’’
आज की महिलाओं को समाज और वर्कप्लेस में कौन सी चुनौतियां स्वीकार करनी पड़ती हैं और आप क्या सलाह देना चाहेंगी?
‘‘मुझे लगता है महिलाओं को जजमैंट, बैलेंसिंग रोल्स और कौंस्टैंट प्रैशर की चुनौतियां सहनी पड़ती हैं. मेरी सलाह है कि आप सदा सीखते रहो, अपने लिए खड़े रहो और कभी गिल्ट में मत जीओ.’’
समाज में महिलाओं की स्थिति में बदलाव?
‘‘पिछले कुछ सालों में महिलाओं की आवाज और पोजिशन दोनों मजबूत हुई हैं. लेकिन बदलाव अभी भी जारी है. आज की महिला अपने कैरियर, अपनी पहचान और अपने चौइसेज पर ज्यादा कौन्फिडैंट हैं.’’
Shrenu Parikh
