Religion: दुनिया के कुछ इंस्टिट्यूशंस हैं जो आलतूफालतू की लिस्टें बनाते रहते हैं पर इन लिस्टों में ही जीवन की खुशियां और गम छिपे रहते हैं. यूएस न्यूज ऐंड वर्ल्ड रिपोर्ट ने दुनिया के 35 सब से ज्यादा फ्रैंडली देशों की सूची बनाई और जैसा आप अनुमान लगा सकते हैं इस में ज्यादातर देश यूरोप के हैं.

पैसे वाले आमतौर पर फ्रैंडली हो जाते हैं क्योंकि उन्हें दूसरों से डर नहीं लगता. वे भी ज्यादा फ्रैंडली होते हैं, जिन्हें यह बचपन से नहीं सिखाया जाता कि दूसरे रंग, बोली, कपड़ों, बड़ेछोटे मकान वालों से डरने की जरूरत होती है. धर्म सब से ज्यादा डराते हैं क्योंकि हर धर्म यही सिखाता है कि जो अपने धर्म का नहीं है, वह दुश्मन है.

हिंदू धर्म तो अब सब से ज्यादा कट्टर हो गया है. जब से धर्म का इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए किया जाने लगा है और अब सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है हर जना जो अपने धर्म का नहीं, डरने लायक है, दोस्ती के लायक नहीं है, यह सिखाया जा रहा है.

इस लिस्ट में सब से ऊपर कनाडा है और यह वही कनाडा है जहां सिख बड़ी संख्या में हैं, कनाडियों के साथ उठतेबैठते हैं और सरकार में मंत्री तक हैं. कनाडा सरकार का अपना धर्म नहीं है. अमेरिका एक जमाने में बड़ा फ्रैंडली देश था पर जब से वहां चर्च की एक शाखा मागा, जो नाम ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के पहले अक्षरों से बना है, को पावर मिली है, वहां गोरे चर्च जाने वाले अमेरिकी हर गैर गोरे को दुश्मन मानने लगे हैं.

स्पेन, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, पुर्तगाल, आस्टे्रलिया, इटली, नौर्वे तो लिस्ट में हैं ही पर 9वें नंबर पर थाईलैंड है जहां कभी भारतीयों की अच्छी पैठ थी. 22वें नंबर पर मलेशिया है, 24वें नंबर पर सिंगापुर है, 33वें नंबर पर एशिया का ही इंडोनेशिया है और 35वें नंबर पर वियतनाम है.

दुनिया का सब से अमीर देश अमेरिका 35में से नहीं, दूसरे नंबर का अमीर देश चीन भी नहीं है, सब से ज्यादा आबादी वाला भारत भी नहीं है. ये 3 बड़े विशाल देश बड़े होने के बावजूद फ्रैंडली नहीं हैं. अमेरिका तो इतना अनफ्रैंडली है कि वहां जितने लोग नहीं हैं उस से ज्यादा प्राइवेट गनपिस्तौलों से ले कर राइफलों तक हैं, जिन्हें वहां के लोग बेमतलब में अपने आसपास के लोगों को डराने के लिए इस्तेमाल करते रहते हैं.

हमारे यहां गन तो पुलिस वालों के पास ही होती है जिसे वे हर तरह के एनकाउंटर में इस्तेमाल कर सकते हैं पर हर हाथ में लाठी तो है. गांधी ने लाठी बुढ़ापे में सहारे के लिए इस्तेमाल की थी पर हमारे यहां लाठी वाला पक्का अनफ्रैंडली होता है क्योंकि वह लाठी सहारे के लिए नहीं सिर फोड़ने के लिए इस्तेमाल करता है. हमें बचपन से सिखाया जाता है कि दूसरे धर्म, जाति, रंग, भाषा वाला दोस्त नहीं हो सकता. हमारे यहां दफ्तरों, स्कूलों, महल्लों, एक ही सोसाइटी या मल्टी में बने 400-500 घरों में भयंकर गुटबाजी होती है और हर गुट दूसरे का दुश्मन होता है और कहीं न कहीं इस में धर्म, उपधर्म, पूजे जाने वाले देवता या देवी (जो हमारे में है) या कोई जिंदा, मुरदा व्यक्ति होता है.

फ्रैंडली होना एक आवश्यक गुण है. सिविलाइजेशन इसी पर टिकी है. आम आदमी अकेला कुछ नहीं कर सकता. आज की सोसाइटी बहुतों की मित्रता पर टिकी है. अगर हमें समाज विभाजन सिखाता है तो इस का वायरस हमारे घर में भी घुस जाता है, पतिपत्नी के बीच में आ जाता है, भाईबहनों के बीच में आ जाता है, बेटीबेटी के बीच में आ जाता है.

छोटेछोटे अमीर देश फ्रैंडली हैं तभी वहां भारतीय घुसपैठिए भरे हैं जबकि उन का रंग, भाषा, धर्म सब अलग हैं. ब्राजील, आइसलैंड, बैल्जियम, क्रोशिया सुखी भी हैं और फ्रैंडली भी हैं. अफ्रीका का या मिडल ईस्ट का कोई देश नहीं है क्योंकि अफ्रीकी से लूटने का डर लगता है. मिडल ईस्ट के अमीर देशों में कट्टर पुलिस के कारण डर लगता है. इन अनफ्रैंडली देशों में बाहर वाला भी डरा रहता है तो इन देशों वाला भी अपने पड़ोसी से डरा रहता है.

फ्रैंडशिप का मतलब यह नहीं है कि आप किसी को घर में बसा लो. बस इतना है कि उसे आप से डर नहीं लगे, वह आप से न डरे. आफत में दोनों एकदूसरे के काम आएं. गिनती कर के देखें कि आप कितने फ्रैंडली हैं, कब किस अनजान की पैसे से नहीं, अपने व्यवहार से सहायता की है? पैसे तो हमारे देश में भगवानों को चढ़ाए जाते हैं और हर भगवान की जगह भक्तों में आपस में धक्कामुक्की होती है. फ्रैंडली मंदिर कोई होगा यह तो पता ही नहीं है.

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