Monopoly: इंडिगो एअरलाइंस का दिसंबर के पहले सप्ताह में फियास्को एक डैंजर जोन की ओर इशारा कर रहा है कि हर तरह की मोनोपोली कितनी खतरनाक हो सकती है. इंडिगो ने कई हजार उड़ानें रद्द कर दी थीं और इन में से ज्यादा की सीटें आधे से ज्यादा बिक चुकी थीं यानी लोगों ने प्लान बना कर होटल, टैक्सियां बुक कर ली थीं, शादियों के हौल तैयार कर लिए थे, एक शहर के हवाईअड्डे से दूसरे शहर जाने के भी टिकट खरीद लिए जिन में कुछ इंडिगो के नहीं थे.
4-5 दिन में लोगों के कई हजार करोड़ रुपए बरबाद हो गए और ये लोग वे हैं जिन के पास पैसा, आवाज, हैसीयत है, मीडिया है, प्रभाव है. फिर भी एक कंपनी के आगे बेबस एअरपोर्टों पर धर्मशालाओं की तरह घंटों नहीं कितनी ही रातों तक बने रहना पड़ा.
बहुतों का सामान खो गया जो कुछ महीनों बाद इंडिगो कबाड़ी को बेच देगा. इस सामान में गहने भी होंगे, जरूरी कागजात भी होंगे, रोजमर्रा के कपड़े भी होंगे.
ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि यह मोनोपोली सरकार ने बनने नहीं दी बनवाई. मोदी सरकार ने जानबूझ कर बनने दिया. इंडिगो के बोर्ड में अमिताभ कांत जैसे नरेंद्र मोदी के चहेते पूर्व आईएएस अफसर भी हैं, उद्योगपति भी हैं जो नरेंद्र मोदी के गुणगान करते नहीं थकते. पर मजाल है कि नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की सेवा से कुछ घंटे निकाल कर जनता को दिए हों.
इस जनता में अधिकांश उस जमात के लोग हैं जो आंख मूंद कर सरकार का हर बात में समर्थन करते हैं, पूजापाठी हैं. राममंदिर जाना भी बहुतों के प्रोग्राम में था. कुछ रामेश्वरम जा रहे थे तो कुछ वैष्णो देवी या हरिद्वार या तिरुपति या नासिक. इंडिगो ने सब को गच्चा दे कर दिखा दिया कि देश को ठप्प करने के लिए 6 लोगों का बोर्ड काफी है, दूसरे देश की आर्मी का हमला जरूरी नहीं है. पर इंडिगो की देशभक्ति के बारे में कुछ नहीं कहा गया जबकि नारे भर लगाने वालों को माओवादी, कम्युनिस्ट, देशद्रोही, पाकिस्तानी कह कर बंद करना इस देश में आम है.
इंडिगो की तरह बहुत सी मोनोपोली बन गई हैं. एअरटेल और जियो की मोनोपोली से टैलीफोन बजना सैकंडों में बंद हो सकता है. गूगल करोड़ों जीमेल अकाउंटों को रोक कर पत्र भेजना भी बंद कर ही सकता है. पैसों का लेनदेन भी बंद कर सकता है. व्हाट्सऐप खुद को बंद कर के करोड़ों को अपनों से काट सकता है. जीपीएस बंद कर के होम डिलिवरी को खत्म कर सकता है.
कुछ लोगों के हाथों में अब अरबों लोगों की जिंदगी गिरवी हो गई है जिस में भारत सहित दुनिया के अधिकांश लोग शामिल हैं. इंडिगो ने तो सैंपल दिया है कि अगर उसे बांह मरोड़नी हो तो कैसे मिनटों में वह जनता के अरबों स्वाहा कर सकता है और मजबूत सरकार भी कुछ नहीं कर सकती.
पहले सेनाओं की जरूरत होती थी एक देश पर कब्जा करने के लिए, आज कुछ बोर्डरूमों में फैसला हो सकता है और बिना खूनखराबे के पूरा देश जेल में बदल सकता है. कोविड-19 में सरकार ने लौकडाउन कर के यह किया था, अब प्राइवेट कंपनी ने तेवर दिखा दिए हैं.
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