kitty party : एक समय था जब घर में लड़की का जन्म होता था तो मातापिता उसे घर की लक्ष्मी और पराया धन मान कर अपनी बेटी को पढ़नेलिखने के बजाय चूल्हाचौकी, घर के काम, बुनाई, सिलाई कढ़ाई आदि कामों में निपुण बनाते थे, ताकि ससुराल जा कर उन की बेटी को ससुराल वालों के ताने न सुनने पड़ें और ससुराल में वह अपना वर्चस्व स्थापित कर सके. लेकिन जैसेजैसे समय बीता ससुराल में बहू पर अत्याचार और अपमान की कई सारी घटनाएं घटीं तो उस के बाद मांबाप ने लड़कियों को पढ़ालिखा कर स्वाबलंबी बनाने का रास्ता अपनाया, ताकि उन की बेटी बुरे समय में दरदर की ठोकरें खाने के बजाय अपने पैरों पर खड़े हो कर अपना खर्चा उठा सकें.

ऐसे में इस का नतीजा यह हुआ कि लड़कियां सिर्फ स्वाबलंबी ही नहीं बनीं, बल्कि टीचर, साइंटिस्ट, डाक्टर, पायलट बन कर लड़कों से भी आगे बढ़ गईं.

लेकिन जो लड़कियां एक समय में कुछ खास बनने के सपने देखती थीं और शादी कर के पति, बच्चों और ससुराल वालों की सेवा में व्यस्त हो गईं, उन की जिंदगी के कितने साल निकल गए यह उन्हें खुद पता नहीं चला.

ऐसी लड़कियां शादी से पहले पिता के नाम से और शादी के बाद पति और बेटे के नाम से पहचानी जाती हैं. उन की पहचान और यहां तक कि नाम भी रिश्तों के बीच कहीं खो जाता है, जिस के बाद घरगृहस्थी के जंजाल में फंसी ये औरतें मनोरंजन के लिए किट्टी पार्टी का आयोजन किया, जिस में वे 2-3 घंटे एकसाथ रह कर अपना मनोरंजन कर सकें और एक पार्टिकुलर अमाउंट किट्टी में दे कर साल में एक बार वही अमाउंट एक साथ वापस पा सकें.

जैसे अगर ₹10,000 की किट्टी है और 12 औरतें है तो पूरे 1 साल में जिस की भी किट्टी निकलेगी उस को ₹1,20,000 प्राप्त होंगे. यानि कि हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा. किट्टी पार्टी का यह सिलसिला ऐसा आगे बढ़ा कि पत्नियों ने अपनी किट्टी ग्रुप में अपने पतियों को भी शामिल कर लिया और कपल्स किट्टी होने की वजह से पत्नियों को और ज्यादा मजा करने का मौका मिल गया.

लेकिन क्या मनोरंजन के नाम पर किट्टी पार्टी का चलन सही है? क्या यह एक घरेलू औरत के जीवन में कुछ समय के लिए मनोरंजन लाने का सही तरीका है या फिर किट्टी पार्टी एक छलावा है? किट्टी पार्टी के फायदे हैं या नुकसान? औरतों के बीच किट्टी पार्टी लोकप्रिय होने के पीछे क्या खास वजह है, पेश हैं इसी पर एक नजर :

किट्टी पार्टी के फायदे और नुकसान

किट्टी पार्टी का अगर सब से बड़ा फायदा देखने जाएं तो इस में औरतों को कुछ घंटे के लिए अपनी मरजी के अनुसार सजनेसंवरने का मौका मिलता है. किट्टी पार्टी के दौरान गौसिप करने का मजा, होटल में खानापीना, मस्तीमजाक और गेम्स खेलना और इस के साथ ही जिस की किट्टी निकलती है उस को एक बड़ा अमाउंट मिलना शामिल होता है.

अगर किट्टी पार्टी में शामिल होने के बाद मिल रहे नुकसान की बात करें तो किट्टी पार्टी का सदस्य बनने के बाद थोड़े से मजे के साथ कई सारी तकलीफ और परेशानियों का भी आगमन होता है जैसे किट्टी पार्टी के मुख्य नुकसानों में आर्थिक बोझ, समय की बरबादी, अनावश्यक दिखावा और सामाजिक तनाव शामिल है, जो अकसर फजूलखर्ची, गपशप, गौसिप और प्रतिस्पर्धा का कारण बनती है, जिस से पारिवारिक तनाव भी बढ़ता है.

किट्टी पार्टी के दौरान महंगी थीम, ड्रैस कोड, महंगे उपहार और होटल में पार्टी का अनावश्यक खर्चा लगातार दिखावा करने के चलते जितनी कमाई नहीं होती है उस से कहीं ज्यादा खर्च हो जाता है,  जिस की वजह से किट्टी पार्टी में जाने वाली औरतों को कई बार मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है. इस के अलावा किट्टी पार्टी के दौरान 2-3 घंटों की बरबादी घर के कामकाज में गलत असर डालती है.

सामाजिक और पारिवारिक तनाव

किट्टी पार्टी के दौरान औरतों के बीच तुलना और प्रतिस्पर्धा जैसे ब्रैंडेड ड्रैस महंगी ज्वैलरी, महंगे परफ्यूम ब्रैंडेड जूतेचप्पलें पहन कर आने वाली औरतें दूसरी औरतों के मन में ईर्ष्या की भावना पैदा करती हैं और इस ईर्ष्या के चलते जलन और तनाव पैदा होता है. ज्यादातर किट्टी के दौरान गपशप के नाम पर दूसरों की चुगली और अफवाहें दूसरों के निजी जीवन पर केंद्रित होती हैं.

कई बार ग्रुप में मौजूद औरतें जो किट्टी में किसी वजह से नहीं आ पाईं उन के बारे में भी बाकी औरतें चुगली और गौसिप करती नजर आती हैं, जिस के बाद आपस में मनमुटाव और तनाव किट्टी की औरतों के बीच दिखाई देता है.

इस के अलावा किट्टी पार्टी का असर अस्वस्थ जीवनशैली पर पड़ता है. जैसे बाहर का होटल का खाना, फास्ट फूड और देर रात तक पार्टी करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

वित्तीय जोखिम

यह एक अनियमित बचत योजना है और निवेश के लिए इस पर अत्यधिक निर्भर रहना जोखिम का काम है. इस के अलावा अगर पैसे देने वाली 10 या 12औरतों में अगर कोई ऐसी निकली जिस ने अपनी किट्टी निकलते ही मुंह फेर लिया और न सिर्फ किट्टी में आना बंद कर दिया, बल्कि पैसे देने भी बंद कर दिए तो उस का नुकसान बाकी सभी को भी उठाना पड़ सकता है.

हालांकि कुछ महिलाओं के लिए यह मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल का जरीया भी है, लेकिन किट्टी के दौरान अत्यधिक दिखावा इसे नुकसानदेह भी बना सकता है.

किट्टी में समय बरबाद करने के बजाय अच्छा साहित्य, अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डालें.

आजकल ज्यादातर लोग कईकई घंटे व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम रील्स देखने में बिता देते हैं, जिस से उन को सही ज्ञान तो नहीं मिलता, लेकिन व्हाट्सऐप, इंस्टा रील्स में मिले आधेअधूरे ज्ञान के बाद नुकसान से जरूर गुजरना पड़ता है.

इसलिए इधरउधर से ज्ञान बटोरने के बजाय अच्छे लेखकों की किताबें पढ़ें और सही ज्ञान पा कर जिंदगी में सही दिशा पाएं.

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