Hindi Satire : नया साल धीमी गति से चलतेचलते 12 महीने में आ ही जाता है, नया साल आते ही लोगों में नएनए संकल्प लेने की जद्दोजहद चालू हो जाती है. मसलन, किसी का संकल्प वजन घटाना होता है तो कोई योगा रूटीन का संकल्प ले बैठता है, कोई सुबह जल्दी उठ कर रैग्युलर वाक पर जाने का संकल्प ले बैठता है. वैसे संकल्प लेने की लिस्ट तो बहुत लंबी है लेकिन हमें सारी दुनिया से क्या लेनादेना. हां, हम तो अपनी जान चुलबुली के नए व अनोखे संकल्प से चिंता में हैं.

वैसे देश में भी चुनावी माहौल गरम है, सो उसी से प्रभावित हो कर वे भी क्लब की प्रैसिडैंट पद का चुनाव लड़ने का संकल्प ले बैठी हैं. संकल्प उन का है लेकिन भूखप्यास व नींद हमारी गायब हो चुकी है.

आज अपने लेडीज क्लब से लौटते ही चुलबुलीजी ने हमें अपने इस संकल्प से अवगत कराया. हम अपनी पत्नी को नाम से नहीं चुलबुली कह कर पुकारते थे क्योंकि उन का यही नाम बचपन से उन के साथ जुड़ा हुआ था. असली नाम तो सिर्फ सरकारी कागजों में ही था. क्लब से लौट कर हमारे लिए भोजन परोस कर लाईं और पास बैठ कर कहने लगी कि चलो आज मैं तुम्हें अपने हाथों से खिलाती हूं.

उन की इतनी रसीली प्रेम पगी वाणी सुन कर हमारा माथा ठनका. मन ही मन विचारों के घोड़े दौड़ाए, भला आज इस गरीब पर इतना प्यार क्योंकर लुटाया जा रहा है वरना उन के मिजाज की गरमी तो दिल्ली की गरमी से अधिक जानलेवा होती है. उन की किसी बात पर मजाल है जो हम न कर सकें. उन से न करने का मतलब है जल में रह कर मगर से बैर करना, मतलब हमारा पूरे सप्ताहभर का खानापीना बंद.

मरता क्या न करता हम ने डरतेडरते पूछा, ‘‘यह एकाएक तुम्हें चुनाव लड़ने की

क्या सूझा.’’

‘‘अरे मेरे प्यारे पतिदेव मैं कोई देश का चुनाव लड़ने की बात थोड़े ही कर रही हूं मैं ने अपने लेडीज क्लब के प्रैसिडैंट पद के चुनाव की बात कर रही हूं.’’

‘‘फिर भी चुनाव चाहे देश का हो या लेडीज क्लब का, चुनाव ही होता है. हर चुनाव में कई तरह के वादे करने होते है. लोगों को अपने फेवर में करने के लिए पैसा पानी की तरह बहाना पड़ता है.’’

‘‘उफ, तुम यह हमेशा पैसों का रोना क्यों रोते रहते हो? पैसा तो होता ही खर्चने के लिए है और हां तुम मेरी हौसलाअफजाई करने के बजाय मेरा मौरल डाउन तो मत करो.

‘‘देखो चुनाव जीतने के लिए मैं ने पूरा होमवर्क कर लिया है, हमारे क्लब की जो यंग मैंबर हैं, जो अपने को बहुत मौडर्न सम?ाती हैं उन को मैं किसी डिजाइनर बुटीक से आधुनिक ड्रैस की शौपिंग करवा दूंगी. बुटीक की ओनर मेरी पहचान की है अच्छाखासा डिस्काउंट देने का वायदा किया है और जो 60 प्लस हैं उन का पूरा हैल्थ चैकअप किसी डाक्टर से करवा रही हूं जो डाक्टर हैल्थ चैकअप करने वाली है वह भी मेरी फ्रैंड की फ्रैंड हैं सो कम से कम चार्ज करेगी और हां चुनाव के दिन से 2 दिन पहले सारे मैंबरों को घर बुला कर बढि़या सा लंच करवा दूंगी, फिर तो मेरी जीत पक्की ही सम?ा.

‘‘हां लंच की दावत के लिए तुम्हें पुरानी दिल्ली से हलवाई बुला कर इंतजाम करना होगा, लंच में वेडमी आलू व दहीवड़े व स्वीट में गुलाबजामुन बनवा देना क्यों कैसा लगा मेरा चुनावी प्लान? सबकुछ एकदम परफैक्ट है.’’

‘‘हां सब ठीक ही है जो तुम कह रही हो,’’ हम ने इस सब में होने वाले खर्चे का अनुमान लगाते हुए धड़कन पर काबू करते हुए सोचा.

‘‘अच्छा, तुम्हारे क्लब की कितनी मैंबर हैं कुल मिला कर?’’

‘‘वैसे मैंबर तो 50 हैं लेकिन 40 तो अभी से मेरी फेवर में हैं, सो बस 40 मैंबर को ही लंच पर इन्वाइट किया है.

‘‘वैसे प्लान तो तुम्हारे बहुत अच्छे हैं लेकिन इस सब में कितना पैसा खर्च होगा, इस का अंदाजा भी हैं तुम्हें?’’

‘‘उफ, फिर तुम पैसों का रोना रोने लग गए, एक बार क्लब की प्रैसिडैंट का चुनाव जीत जाऊं, फिर कितना नेमफेम मिलेगा. कौन जाने कल को देश के लिए भी चुनाव लड़ू. तुम्हें याद है न जब पिछली बार हमारे पंडितजी आए थे तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि मेरे हाथ में यश का जबरदस्त योग है.

‘‘तो अब तुम पैसों का रोना छोड़ कर इस प्लान को पूरा करने के बारे में सोचो. सुनो जानू मुझे झटपट से एक ब्लैंक चैक दे दो, मैं आज से ही इस प्लान को शुरू करती हूं. आज 20 के लगभग मैंबर्स को शौपिंग करवा देती हूं और कल सुबह हैल्थ चेकअप का काम भी निबटा देती हूं. इस के लिए मैं ने अपनी फ्रैंड रोली से बात कर ली है, उस की भाभी डाक्टर है. अगले दिन लंच का प्रोग्राम रख लेंगे.’’

चुलबुलीजी इतने जोरशोर से अपने इस चुनावी अभियान को पूरा करने में जुटी थीं कि कुछ कहते ही नहीं बन रहा था. बैसे कहने का कुछ असर भी नहीं होना था, सो चुप लगाना ही बेहतर समझ.

पुरानी दिल्ली के फेमस हलवाई को एक दिन के लिए बुलवाया, जिस ने तयशुदा सूची के अनुसार लंच तैयार कर दिया. लंच के खाने का तगड़ा बिल देख कर ही हमारे होश उड़ गए. मरता क्या न करता, बात पत्नीजी के संकल्प की थी, सो पूरा तो करना ही था. आखिर वे भी तो हमारी लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं न, तो अब बारी हमारी थी उन का संकल्प पूरा करने में सहयोग करने की.

चुलबुलीजी की सारी सखियों ने छक कर भोजन का आनंद लिया और जातेजाते कहा कि यू आर ग्रेट चुलबुली, यू बिल डैफिनेटली विन, हम सब तुम्हारे साथ हैं. अगले दिन चुनावी प्रकिया संपन्न हो गई. चुलबुलीजी खूब सजधज कर क्लब गईं क्योंकि अपनी जीत पर पूरा भरोसा था, उन को. क्लब से बहुत खुशखुश लौटीं.

चुलबुलीजी काफी दिनों बाद चैन की नींद सोईं क्योंकि इस पूरे कार्यक्रम को पूरा करने की भागदौड़ में ठीक से सो भी नहीं पाई थीं.

चुनावी प्रकिया जब चल रही थी तो वोट डालने के बाद चुलबुली की सभी सखियों ने उन से कहा, ‘‘चिंता मत करें, हम सब ने वोट तुम्हीं को दिया है. आखिर तुम्हारा नमक जो खाया है तो गद्दारी करने का तो सवाल ही नहीं उठता.

क्लब के गेट से बाहर निकलते ही सभी सखियों ने एक जोरदार ठहाका लगाया, कितनी भोली है, यह चुलबुली? क्लब जौइन किए हुए इसे अभी सिर्फ 1 साल ही हुआ है और हमेशा अपने अमीर होने का दिखावा करती रहती है, क्लब को आगे बढ़ाने के लिए बहुत परिश्रम करने की व नई योजनाओं को क्लब में लागू करने की जरूरत होती है न कि पैसे का दिखावा करने की. इस को वोट दे कर हमें अपना वोट खराब थोड़े ही करना है. भई, मैं ने तो पुरानी प्रैसिडैंट को ही वोट दिया है, बड़ी आई है क्लब की प्रैसिडैंट बनने वाली. एक बार फिर से सभी सखियों ने समवेत ठहाका लगाया. इस बार ठहाके की आवाज ने चुलबुली को कुछ डरा जरूर दिया लेकिन अपनी जीत का उन्हें पूरा भरोसा था.

इस बीच चुलबुलीजी ने एक और इच्छा जाहिर की, ‘‘सुनो जब इतना कुछ कर ही रहे हैं तो क्यों न हनुमानजी पर एक चांदी का छत्र भी चढ़ा दें.’’

मरता क्या न करता सुनार के पास जा कर इतनी महंगी हो गई चांदी का छत्र खरीदा जो चुलबुलीजी ने मंदिर जा कर हनुमानजी को अर्पण किया. किसी और का काम बना या नहीं पुजारी के मजे आ गए जिस ने अगले दिन ही उस की जगह ऐल्यूमीनियम का छत्र रख दिया और चांदी वाला घर ले गया.

इतना सब करने के बाद आज चुलबुलीजी काफी दिनों के बाद चैन की नींद सोईं. अगली सुबह फोन की घंटी से नींद टूटी. दौड़ कर फोन उठाया.

कहने लगी लगता है कि किसी ने चुनाव जीतने की बधाई के लिए ही फोन किया होगा. फोन सुन कर के उन का चेहरा किसी फ्यूज बल्ब की तरह दिखा. हम ने डरतेडरते पूछा, ‘‘क्या हुआ? चुनाव का रिजल्ट आ गया?’’

वे धीमी सी आवाज में बोलीं, ‘‘नहीं, जिसे मैं ने जो शौपिंग करवाई थी, वह ड्रैस एक बार धुलने पर ही सिकुड़ कर छोटी हो गई है, सो वह मैंबर नाराजगी जता रही थी कि कितनी घटिया शौपिंग करवाई आप ने. थोड़ी देर बाद फिर फोन बजा. इस बार फिर लपक कर फोन उठाया. इस उम्मीद में कि अब तो जरूर चुनाव का रिजल्ट आ गया है. परंतु नतीजा इस बार भी वही ढाक के 3 पात रहा. दरअसल, जिन लोगों का हैल्थ चैकअप करवाया था डाक्टर ने सब को फिटनैस का प्रमाणपत्र दिया था, जबकि उन में से एक को हार्ट की प्रौब्लम थी. वह हौस्पिटल एडमिट है और मु?ा पर केस करने की बात कह रही थी. तब तक चुनाव का रिजल्ट भी आ गया. चुलबुलीजी बुरी तरह हार गई थीं.

चुलबुलीजी का चुनावी बुखार उतर गया था. वे इस बार बड़ी ही कातर व दयनीय नजरों से हमारी तरफ देख रही थीं मानो कह रही हों बुरे फंसे चुनाव लड़ कर.

हम ने भी उसी तरह उन की तरफ देख कर मन ही मन कहा कि देर आयद, दुरुस्त आयद. सुबह का भूला यदि शाम को वापस घर लौटे तो उसे भूला नहीं कहते.

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