Love Story : पूर्णिमा  की आंखें हमेशा किताबों और लैब के रसायनों में खोई रहतीं. 50 साल की उम्र में कैमिस्ट्री की प्रोफैसर होने का मतलब था

एक स्थिर लेकिन एकाकी जीवन. अजय से तलाक के बाद घर की दीवारें उसे घूरतीं और रातें लंबी हो जातीं. वह खुद को आईने में देखती. अभी भी सुंदर, काले घने बाल, गहरी आंखें और एक फिगर जो उम्र की मार से बची हुई थी. लेकिन दिल में एक खालीपन था जो प्यार की तलाश में था.

तभी विकास आया0 जैसे कोई मीठा, रोमांटिक तूफान.

विकास, उस का छात्र, 25 साल का जवान लड़का. वह क्लास में हमेशा आगे बैठता, पूर्णिमा के लैक्चर पर नजरें गड़ाए. ‘‘मैम, यह मौलिक्यूलर बौंडिंग का कौंसैप्ट कितना रोमांटिक है न? 2 एटम्स एकदूसरे से जुड़ कर कुछ नया बना देते हैं,’’ वह कहता और पूर्णिमा हंस पड़ती.

विकास के पिता एक करोड़पति व्यवसायी थे और विकास खुद भी बिजनैस की दुनिया में कदम रखने वाला था. लेकिन उस का दिल विज्ञान और पूर्णिमा की ओर था. पूर्णिमा को उस की आंखों में सचाई दिखती. एक युवा ऊर्जा जो उसे फिर से जीवंत कर देती.

शुरुआत छोटीछोटी बातों से हुई. क्लास के बाद कौफी शौप में लंबी चर्चाएं – कैमिस्ट्री से शुरू हो कर जीवन की फिलौसफी तक.

‘‘मैम, आप की आंखें समंदर जैसी हैं, गहरी और रहस्यमयी,’’ विकास ने एक दिन कहा और पूर्णिमा का दिल धड़का. वे साथ इवेंट्स में जाते. सेमिनार, कौन्फ्रैंस, जहां विकास का हाथ चुपके से उस के कंधे पर आ जाता. एक शाम यूनिवर्सिटी के गार्डन में शाम की हलकी ठंडी हवा में विकास ने पूर्णिमा का हाथ पकड़ा.

‘‘पूर्णिमा… मैम नहीं, पूर्णिमा. मैं तुम्हें पसंद करता हूं, नहीं, प्यार करता हूं.’’

पूर्णिमा हिचकिचाई, उम्र का फासला उसे डराता था लेकिन उस स्पर्श में एक करंट दौड़ा. ‘‘विकास, मैं तुम्हारी मां की उम्र की हूं,’’ उस ने कहा. मगर विकास ने मुसकरा कर जवाब दिया, ‘‘प्यार उम्र नहीं देखता, पूर्णिमा.’’

वे टूर पर गए. पहाड़ों की वादियों में, जहां हवा में रोमांस घुला हुआ था. विकास ने उसे गले लगाया, उस के कान में फुसफुसाया, ‘‘तुम मेरी हो, हमेशा के लिए.’’ पिकनिक्स में, नदी किनारे वे घंटों बातें करते.

विकास का हाथ उस के कंधे पर, उस की उंगलियां उस के बालों में खेलतीं. एक शाम सूरज डूबते हुए, विकास ने उसे किस किया. पहला किस, मीठा और गहरा. पूर्णिमा ने खुद को रोकने की कोशिश की लेकिन उस के होंठों की गरमाहट ने सब भुला दिया. वे एकदूसरे में खो गए, हाथों में हाथ डाले, सपनों की दुनिया में. पूर्णिमा को लगा, यह प्यार है. देर से आया लेकिन इतना शुद्ध कि सारी दुनिया भूल जाए.

एक दिन रिसर्च प्रोजैक्ट के लिए बेतवा नदी से पानी के सैंपल लेने गए. आसमान काला था लेकिन पूर्णिमा उत्साहित. विकास बाइक चला रहा था. दोनों के इयर फोन जुड़े हुए थे जिन पर एक ही रोमांटिक गाना बज रहा था, ‘‘तुम्हें देखते ही दिल ये मेरा…’’

‘‘पूर्णिमा, आज कुछ स्पैशल होगा,’’ विकास ने मुसकराते हुए कहा.

अचानक घनघोर बारिश. पानी की बौछारें, सड़कें डूबीं. दोनों

भीग चुके थे. पूर्णिमा की साड़ी उस के शरीर से चिपक गई. उस कौन्फ्रैंस कर्व्स उभर आए जैसे कोई मूर्ति जीवंत हो गई हो. विकास की शर्ट पारदर्शी हो गई, उस की मजबूत मसल्स नजर आ रही थीं.

‘‘पूर्णिमा, मेरा फार्महाउस नजदीक ही है. वहां रुकते हैं,’’ उस ने कहा.

पूर्णिमा ने हामी भरी, दिल में एक रोमांचक उत्तेजना थी.

फार्महाउस लग्जरी का नमूना था. बड़ा हाल, फायरप्लेस और बैडरूम्स जो सपनों जैसे. बारिश बाहर हो रही थी जैसे उन के प्यार की तीव्रता को सलामी दे रही हो. विकास ने टौवेल दिया, पूर्णिमा के कपड़े भीगे थे.

‘‘चेंज कर लो,’’ उस ने कहा और अपनी शर्ट उतार दी. वार्डरोव में विकास की मां के ढेर सार कपड़े थे. स्विम सूट से ले कर शिकार करने तक, सभी कपड़े और ऐक्सैसरीज, कस्टमाइज्ड, ब्रैंडेड. उस की मां, टीकमगढ़ स्टेट की अमीर राजघराने से थी.

पूर्णिमा की इन कीमती कपड़ों को छूने की हिम्मत नहीं हुई. विकास की दिए टौवेल को ही उस ने पैंसिल स्कर्ट की तरह लपेट कर गांठ लगा ली और आग तापने के लिए फायरप्लेस के पास बैठ गई. उस की नजरें विकास के चौड़े सीने पर टिकीं, उस की सांसें तेज हो गईं.

वाइन की बोतल खोलते हुए विकास ने कहा, ‘‘पूर्णिमा, तुम कितनी खूबसूरत हो,’’ और फिर ने करीब आते हुए उस का हाथ उस के गाल पर, फिर उस की गरदन पर सरका. पूर्णिमा ने आंखें बंद कर लीं. विकास ने उसे किस किया- पहले होंठों पर, मीठा और गहरा, फिर गरदन पर, जहां उस की पल्स धड़क रही थी. उस की उंगलियां पूर्णिमा के टौवेल की गांठ को धीरे से सरकाने लगीं.

‘‘विकास… क्या हम… उफ, यह क्या कर रहे हैं?’’ पूर्णिमा फुसफुसाई लेकिन उस का शरीर विरोध नहीं कर रहा था बल्कि उस में एक आग सुलग रही थी.

विकास पूर्णिमा को बांहों में उठा, बैडरूम में ले गया. बारिश की आवाज में

उस ने पूर्णिमा का आवरण हटा दिया. धीरेधीरे हर इंच को चूमते हुए जैसे कोई पूजा कर रहा हो. पूर्णिमा की सांसें तेज, उस का शरीर गरम हो गया.

पूर्णिमा ने खुद को सौंप दिया. वह रात उस की जिंदगी में एक जादू था, विकास का शरीर उस के ऊपर, उस की रिदम में डूबते हुए, धीरे से तेज होते हुए. पूर्णिमा ने कभी इतना प्लैजर महसूस नहीं किया, उस के नाखून विकास की पीठ पर खरोंच मारते, उस की सिसकारियां बारिश में घुलीं, ‘‘ओह, विकास…’’

वे एकदूसरे में खो गए, पसीने से लथपथ. विकास की उंगलियां उस के सब से संवेदनशील हिस्सों को छूतीं, उस की जीभ उस के शरीर पर नाचती. पूर्णिमा का शरीर सिकुड़ जाता, क्लाइमैक्स की लहरें आतीजातीं. वह रात उन के प्यार की मुहर थी. सच्ची, बिना किसी छल के.

अगली सुबह सब और भी खूबसूरत लगा. विकास ने उसे किस किया, ‘‘आई लव यू

पूर्णिमा. हमेशा.’’

उन का रिश्ता गहरा होता गया. दिन में क्लासेज, शामें साथ, रातें फोन पर बातें. विकास ने पूर्णिमा को अपने परिवार से मिलवाया. लेकिन वहां तूफान आया. विकास के मातापिता स्तब्ध रह गए. ‘‘यह क्या बकवास है? वह तो हमारी उम्र की है. तुम्हारी मां जितनी,’’ उस के पिता गरजे, ‘‘हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे. तुम्हारा भविष्य बरबाद हो जाएगा.’’

विकास ने विरोध किया लेकिन परिवार का दबाव बढ़ता गया. पूर्णिमा को दुख हुआ लेकिन वह मजबूत थी, ‘‘विकास, प्यार परिवार की मंजूरी के बगैर नहीं,’’ उस ने कहा. लेकिन विकास उदास हो गया, वह परिवार और प्यार के बीच फंस गया.

पूर्णिमा ने फैसला किया. वह सिद्ध करेगी कि उम्र का फासला या परिवार का विरोध उन के प्यार को नहीं रोक सकता. वे अलगअलग डोमेन में थे. पूर्णिमा अकादमिक जगत में, विकास बिजनैस में. ला का प्रभाव सकारात्मक है.

धीरेधीरे वे नर्म पड़े. एक दिन विकास के पिता ने पूर्णिमा से मिल कर कहा, ‘‘हम गलत थे. उम्र नहीं, दिल माने रखता है.’’

परिवार ने उन्हें स्वीकार कर लिया. पूर्णिमा और विकास ने शादी की. एक सादे लेकिन रोमांटिक समारोह में, जहां बारिश फिर से बरसी जैसे आशीर्वाद दे रही हो.

शादी का दिन खास था, फूलों से सजा मंडप, परिवार और दोस्तों की

हंसीमजाक से गूंजता हुआ. उस शाम जब रस्में चल रही थीं फेरे के दौरान विकास ने पूर्णिमा की कमर पर हाथ रखा लेकिन उस की उंगलियां थोड़ी नीचे सरक गईं. गलती से या शायद जानबू झ कर. पूर्णिमा की आंखें चौड़ी हो गईं, वह फुसफुसाई, ‘‘विकास, सब देख रहे हैं.’’ लेकिन उस स्पर्श में एक पुरानी याद की गरमाहट थी, जैसे फार्महाउस की वह रात.

विकास ने शरारती मुसकान के साथ कहा, ‘‘बस, कैमिकल रिएक्शन चैक कर रहा था. अभी भी स्पार्क है.’’

पूर्णिमा हंस पड़ी और वहां बैठे रिश्तेदारों ने सोचा कि यह बस रोमांटिक शरारत है.

फिर विदाई के समय जब वे कार में बैठे विकास ने पूर्णिमा को किस करने की कोशिश की लेकिन कार का हौर्न बज गया ड्राइवर की गलती से. दोनों ठहाके मार कर हंस पड़े.

‘‘देखो, हमारी शादी में भी ड्रामा.’’ विकास ने कहा. लेकिन जैसे ही कार चली विकास ने पूर्णिमा को अपनी बांहों में खींच लिया, ‘‘अब कोई नहीं देख रहा,’’ वह फुसफुसाया और उसे एक गहरा पैशनेट किस किया. उस की उंगलियां उस के ब्लाउज के हुक पर फिसलीं, हलका सा छुआ, जिस से पूर्णिमा की सांसें तेज हो गईं.

‘‘विकास… अभी नहीं, हनीमून का इंतजार करो,’’  उस ने हंसते हुए कहा. कार की बैकसीट पर बारिश की बूंदों की थाप में वे एकदूसरे को चूमते रहे, हंसते रहे और प्यार की वह आग फिर सुलग उठी.

शादी के बाद पूर्णिमा और विकास की जिंदगी एक सपने जैसी हो गई. प्यार, हंसी और इंटिमेसी का परफैक्ट मिश्रण. वे विकास के फार्महाउस से थोड़ी दूर एक नए घर में शिफ्ट हो गए जो शहर की हलचल से दूर लेकिन दोनों के काम के करीब था. घर बड़ा था. गार्डन से भरा, जहां पूर्णिमा अपनी कैमिकल ऐक्सपैरिमैंट्स के लिए एक छोटी लैब सैट कर सकती थी और विकास अपना बिजनैस औफिस चला सकता था. सुबहें अब कौफी की खुशबू से शुरू होती, जहां विकास पूर्णिमा को बैड पर ही ब्रेकफास्ट सर्व करता. उस के बालों में उंगलियां फिराते हुए. ‘‘गुड मौर्निंग, मेरी प्रोफैसर,’’ वह फुसफुसाता और पूर्णिमा मुसकरा कर जवाब देती, ‘‘गुड मौर्निंग, मेरे ऐंटरप्रन्योर.’’

पहले कुछ महीने हनीमून फेज जैसे थे. उन्होंने असली हनीमून के लिए गोवा

चुना. बीच पर जहां सूरज की किरणें उन के प्यार को और चमका रही थीं. एक शाम समुद्र किनारे वाक करते हुए. विकास ने पूर्णिमा को अपनी बांहों में खींच लिया, ‘‘पूर्णिमा, तुम्हारी यह ड्रैस कितनी सैक्सी लग रही हो,’’ उस ने उस की साड़ी के पल्लू को हलका सा सरकाते हुए कहा.

पूर्णिमा शरमा गई लेकिन उस की आंखों में शरारत थी, ‘‘विकास, लोग देख रहे हैं.’’

मगर विकास रुका नहीं. उसे एक सुनसान कोने में ले गया, जहां लहरों की आवाज में उन्होंने एकदूसरे को चूमा. विकास की उंगलियां उस की बैक पर सरकती गईं.

पूर्णिमा की सांसें तेज हो गईं. वह फुसफुसाई, ‘‘यहां नहीं… रूम में चलो.’’

रूम पहुंच कर रोमांटिक म्यूजिक बजाया. विकास ने उसे बैड पर गिराया, उस के

कपड़े धीरेधीरे उतारे. हर किस के साथ पूर्णिमा की देह में  झन झनाहट दौड़ गई, ‘‘ओह, विकास… धीरे…’’

मगर विकास तेज होता गया. वे रातभर एकदूसरे में खोए रहे. पोजीशंस बदलते, औयल मसाज करते और क्लाइमैक्स की लहरों में तैरते. सुबह, वे थक कर सोए, लेकिन खुश यह उन का प्यार था, समर्पित और गहरा.

घर लौट कर डेली लाइफ में भी रोमांस कम नहीं हुआ. पूर्णिमा यूनिवर्सिटी जाती, जहां अब वह डिपार्टमैंट हैड थी. छात्र उसे ‘मैम’ कहते लेकिन विकास को पता था कि घर पर वह ‘मेरी क्वीन’ है. शाम को जब पूर्णिमा थक कर लौटती विकास उसे सरप्राइज देता. कैंडललाइट डिनर या एक हौट बाथ. एक शाम बाथटब में विकास उस के साथ घुस गया.

‘‘आज कैमिस्ट्री ऐक्सपैरिमैंट,’’ विकास ने हंसते हुए कहा. पानी में बबल्स और विकास की उंगलियां पूर्णिमा के शरीर पर रेंगने लगीं.

‘‘विकास… तुम नोटी हो गए हो,’’ लेकिन वह खुद को रोक नहीं पाई. उसे किस करती, उस के ऊपर चढ़ कर पानी छलकाते हुए. उन की इंटिमेसी अब और क्रिएटिव हो गई थी. कभी किचन में, जहां विकास उसे काउंटर पर उठा लेता, कभी गार्डन में, रात की चांदनी में. विकास कहता, ‘‘पूर्णिमा, तुम्हारे ये कर्वस… मु झे पागल कर देते हैं.’’

पूर्णिमा जवाब देती, ‘‘और तुम्हारी ऐनर्जी मु झे जवान रखती है.’’

पूर्णिमा और विकास की शादी के बाद जीवन की नई शुरुआत हुई लेकिन परिवार के साथ रिश्ते सामान्य होने में समय लगा. शुरू में विकास के मातापिता सास राधा और ससुर रमेश पूर्णिमा को पूरी तरह स्वीकार करने में हिचकिचाते थे. उम्र का फासला उन्हें चुभता था. वे सोचते थे कि पूर्णिमा विकास की मां जितनी उम्र की है और यह रिश्ता समाज में क्या कहलाएगा. विकास की बहन ज्योति जो 28 साल की थी और एक सौफ्टवेयर इंजीनियर, शुरू में सब से ज्यादा विरोधी थी, ‘‘भाई, यह क्या कर लिया? यह तो आंटी जैसी हैं.’’ ज्योति ने विकास से कहा, जब पहली बार पूर्णिमा से मिली.

ज्योति को लगता था कि पूर्णिमा ने उस के भाई को ‘फंसाया’ है और वह परिवार की इज्जत की चिंता करती थी. विकास से पूर्णिमा का रिश्ता तो पहले से ही गहरा और रोमांटिक था लेकिन परिवार की वजह से कभीकभी तनाव आ जाता. पूर्णिमा धैर्य रखती, विकास को सम झाती, ‘‘समय सब ठीक कर देगा.’’

धीरेधीरे बदलाव आया. पूर्णिमा ने कभी जबरदस्ती नहीं की. वह अपनी गरिमा बनाए रखती. सब से पहले ससुर रमेश से रिश्ता सुधरा. रमेश एक रिटायर्ड बिजनैसमैन, विकास के स्टार्टअप में रुचि लेते थे. एक दिन घर पर डिनर के दौरान, पूर्णिमा ने अपनी रिसर्च के बारे में बताया. पर्यावरण फैं्रडली कैमिकल्स पर जो विकास के बिजनैस से जुड़ी थी. ‘‘सर, यह फौर्मूला आप के जमाने की इंडस्ट्री में क्रांति ला सकता है,’’ पूर्णिमा ने मुसकराते हुए कहा.

रमेश पूर्णिमा से सिर्फ 10 साल बड़े थे. बहू मानने में उन्हें संकोच था, सहयोगी का रिश्ता उनके लिए सब से उपयुक्त और सुरक्षित था.

रमेशजी प्रभावित हुए उन्होंने पूर्णिमा से सलाह मांगी और जल्द ही वे घंटों बातें करने लगे. रमेश ने पूर्णिमा को  मित्र सम झना शुरू किया और कहते, ‘‘तुम्हारी वजह से विकास इतना फोकस्ड है.’’

पूर्णिमा की किताब ‘कैमिस्ट्री औफ लव’ पढ़ कर रमेश ने कहा, ‘‘यह किताब ने मु झे सिखाया कि प्यार उम्र से बड़ा है.’’

इस तरह ससुर से रिश्ता दोस्ताना और सम्मानपूर्ण हो गया. वे अब साथ चाय पीते, पुरानी कहानियां शेयर करते.

सास राधा से रिश्ता थोड़ा मुश्किल था. दोनों में मात्र 5 साल का अंतर था. राधा

पारंपरिक सोच वाली थीं और पूर्णिमा को देख कर उन्हें लगता था कि घर की बहू मौडर्न ज्यादा है. लेकिन पूर्णिमा ने छोटीछोटी चीजों से दिल जीता. उस ने उन्हें उन की ननद होने का एहसास कराया. वह राधा के साथ किचन में जाती, उन की पसंदीदा रैसिपीज सीखतीं. एक बार राधा बीमार पड़ीं तो पूर्णिमा ने पूरे दिन उन की देखभाल की दवाइयां दीं, मालिश की, बैंड पैन तक लगाया, नुसखे आजमाए.

‘‘पूर्णिमा, तुम तो डाक्टर जैसी हो,’’ राधा

ने कहा.

धीरेधीरे राधा ने पूर्णिमा को अपनाया अब वे साथ शौपिंग करने जातीं, जहां राधा पूर्णिमा की साडि़यां चुनने में मदद करतीं.

एक शाम राधा ने पूर्णिमा से कहा, ‘‘शुरू में मैं डरती थी लेकिन अब देखती हूं तुम विकास की खुशी हो.’’

रिश्ता सामान्य हो गया; अब राधा पूर्णिमा को ‘सहेली’ जैसा मानतीं और पूर्णिमा उन्हें ‘मांजी’ कहतीं. कभीकभी फनी मोमैंट्स होते जैसे राधा पूर्णिमा को विकास के बचपन की शरारतें बतातीं और पूर्णिमा हंसतीं, ‘‘अब भी वैसे ही हैं.’’

विकास की बहन ज्योति से रिश्ता सब से दिलचस्प तरीके से सामान्य हुआ. शुरू में ज्योति पूर्णिमा से दूरी बनाती. बात कम करती, नजरें चुराती. लेकिन पूर्णिमा ने उसे जीतने का प्लान बनाया. ज्योति को किताबें पसंद थीं तो पूर्णिमा ने अपनी किताब गिफ्ट की, ‘‘ज्योति, पढ़ो, शायद तुम्हें सम झ आए कि प्यार क्या है.’’

ज्योति ने पढ़ी और प्रभावित हुई. फिर एक वीकैंड पर पूर्णिमा ने ज्योति को कौफी पर बुलाया, ‘‘मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं, फ्रैंड हूं,’’ पूर्णिमा ने कहा.

बातोंबातों में ज्योति ने अपनी लाइफ शेयर की. उस का ब्रेकअप, कैरियर स्ट्रगल.

पूर्णिमा ने सलाह दी जैसे बड़ी बहन. धीरेधीरे वे दोस्त बन गईं. ज्योति पूर्णिमा को दीदी कहने लगी. एक बार ज्योति की कंपनी पार्टी में पूर्णिमा साथ गई. वहां ज्योति के दोस्तों ने पूर्णिमा की तारीफ की, ‘‘तुम्हारी भाभी कितनी कूल हैं.’’

ज्योति गर्व से बोली, ‘‘हां, मेरी फैमिली की बैस्ट मैंबर.’’

अब वे साथ शौपिंग करने जातीं, गौसिप करतीं और ज्योति पूर्णिमा से रिलेशनशिप एडवाइस लेती.

एक फनी मोमैंट था जब ज्योति ने पूर्णिमा को विकास के साथ रोमांटिक देखा और हंस कर कहा, ‘‘दीदी, तुम दोनों तो हनीमून फेज में ही हो.’’

विकास से पूर्णिमा का रिश्ता हमेशा सामान्य और मजबूत रहा. वह तो उन के प्यार की नींव था. शादी के बाद यह और गहरा हुआ. विकास पूर्णिमा को सरप्राइज देता. कभी फूल, कभी ट्रिप्स. रातें इरोटिक होतीं लेकिन अब परिवार की मौजूदगी में भी रोमांस छिपा रहता. जैसे डिनर टेबल पर विकास का पैर पूर्णिमा की लेग को छूता और पूर्णिमा मुसकराती. परिवार अब सब देख कर खुश होता.

समय के साथ ये रिश्ते न सिर्फ सामान्य हुए बल्कि मजबूत बंधन बन गए. पूर्णिमा की सम झदारी, धैर्य और सकारात्मक प्रभाव ने सब को जीत लिया. अब परिवार एकजुट था, त्योहार साथ मनाते, ट्रिप्स पर जाते.

पूर्णिमा सोचती कि प्यार न सिर्फ 2 लोगों को जोड़ता है बल्कि परिवार को

भी और विकास कहता कि तुम्हारी वजह से मेरा घर पूरा हुआ.

कैरियर में भी सब स्मूथ था. पूर्णिमा की किताब ‘‘कैमिस्ट्री औफ लव’’ अब इंटरनैशनल बैस्टसेलर थी और वह कौन्फ्रैंस में स्पीकर बन गई. विकास का स्टार्टअप ग्रो कर रहा था. पर्यावरण फ्रैंडली कैमिकल्स की कंपनी अब करोड़ों की थी और पूर्णिमा की रिसर्च ने इस में बड़ा रोल प्ले किया. वे साथ काम करते.

पूर्णिमा लैब में आइडियाज टैस्ट करती, विकास उन्हें मार्केट में लाता. परिवार अब पूरी तरह सपोर्टिव था. विकास के पिता की बर्थडे पार्टी में जहां पूर्णिमा ने डांस किया और विकास ने उसे कमर से पकड़ लिया तो सब हंस पड़े. मगर पूर्णिमा शर्मा गई, ‘‘विकास, फैमिली के सामने.’’

मगर विकास हंस कर बोला, ‘‘अब तो फैमिली है न.’’

समय बीतता गया. 2 साल बाद उन्होंने एक बच्चे को अडौप्ट किया. एक छोटी लड़की, जिसे वे साथ मिल कर पालते. पूर्णिमा उसे कैमिस्ट्री सिखाती, विकास बिजनैस. रातें अब भी मजेदार होतीं. बच्ची के जागने तक वे उस के साथ खेलते. सोने के बाद वे एकदूसरे को ऐक्सप्लोर करते, नई चीजें ट्राई करते.

पूर्णिमा कहती, ‘‘विकास, उम्र का फर्क अब महसूस नहीं होता.’’

विकास जवाब देता, ‘‘क्योंकि प्यार में उम्र बस एक नंबर है.’’

उन की जिंदगी एक परफैक्ट बैलेंस थी. रोमांस, पैशन और सफलता. पूर्णिमा ने सिद्ध कर दिया कि शादी के बाद भी प्यार नया रह सकता है और हर दिन एक नई शुरुआत.

राइटर -पूर्णिमा अतुल गोयल

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