Hindi kahani : ‘‘तुम्हें तो कोई मतलब ही नहीं है. मैं यहां जीऊंमरूं तुम्हें क्या लेनादेना है. जब देखो औफिस, मीटिंग, टूर पर रहते हो और मैं यहां पागलों की तरह… छोड़ो भी… मैं भी किस से बात कर रही हूं क्योंकि जिस इंसान के लिए केवल अपना काम ही इंपौर्टैंट हो उस से कुछ कहने का मतलब भी क्या है,’’ फोन पर अपने पति आदित्य पर झल्लाते हुए वंशिका बोली.
तब आदित्य ने भी पलटवार करते हुए उसे 2-4 तीखी बातें सुना डालीं कि वह यहां, सिंगापुर काम के सिलसिले में आया है, कोई मौजमस्ती करने नहीं और वंशिका को चाहिए क्या उस से इतने आराम से तो जी रही है.
‘‘अच्छा, तो मुझे सुना रहे हो कि तुम ने मेरे लिए कितना कुछ किया. यह जताना चाह रहे हो कि इतनी मेहनत तुम सिर्फ मेरे लिए करते हो, राइट?’’
दोनों पतिपत्नी के बीच फोन पर ही बहसबाजी शुरू हो गई. इन के बीच लड़ाईझगड़ा होना कोई नई बात नहीं है. वैसे बता दूं कि वंशिका और आदित्य की शादी कुंडली मिलान कर के तय हुई थी और दोनों के 36 में से 32 गुण मिले थे. पंडितजी ने कहा था कि इन की जोड़ी रामसीता की तरह है. बहुत प्यार रहेगा दोनों के बीच. लेकिन इन्हें देख कर लगता नहीं कि इन का 1 भी गुण मिला होगा. लेकिन कुंडली मिलान कराने वाले पंडित की पौबारह जरूर हो गई. कितना सफेद झूठ बोला था उस पंडित ने और रही सीता और राम की बात तो उन के तो 36 में से 36 गुण मिले थे लेकिन क्या उन की शादी सफल रह पाई?

फोन पर वंशिका और आदित्य की लड़ाई के बीच वंशिका का 6 साल का बेटा ध्रुव कब उस का हाथ छुड़ा कर भाग गया उसे पता ही नहीं चला.
‘‘हांहां ठीक, मेरी भी तुम से बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. इसलिए फोन रखो, सम?ा,’’ उधर से आदित्य ने दहाड़ा तो वंशिका ने भी झट से फोन काट दिया. जब उस ने पीछे मुड़ कर देखा तो ध्रुव गायब था.
‘अरे, यह ध्रुव कहां चला गया. अजीब बच्चा है. घरबाहर कहीं पर भी चैन नहीं लेने देता मुझे. सच में कहां फंस गई हूं मैं. मेरे मांबाप ने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया? क्यों मुझे ऐसे इंसान के पल्ले बांध दिया जिस के सीने में दिल ही नहीं है. कितना खड़ूस है आदित्य,’ मन ही मन भुनभुनाते हुए वह ध्रुव को ढूंढ़ने लगी. मौल में ऊपरनीचे, फूडकोर्ट तक देख लिया पर ध्रुव उसे कहीं दिखाई नहीं दिया. ‘ओह, अब इतने बड़े मौल में कहांकहां ढूंढ़ती फिरूं इसे? मुझे यहां आना ही नहीं चाहिए था.’ खुद पर झल्लाते हुए उस ने खिलौने के सैक्शन में, आइसक्रीम पार्लर सब जगह देख लिया पर ध्रुव कहीं पर भी नहीं दिखा.
अहमदाबाद का यह प्लेडियम मौल अभी कुछ समय पहले ही बन कर तैयार हुआ है. यहां लोगों की काफी भीड़ होती है खासकर के वीकैंड पर तो पूछो मत. पैर रखने तक की जगह नहीं होती यहां पर. नया मौल है न इसलिए लोगों में उत्साह ज्यादा है. वैसे लोग यहां बिना काम के भी आते हैं, सिर्फ विंडो शौपिंग के लिए. इस भव्य मौल में ज्यादातर नएनए जोड़े, हाथों में हाथ डाले, आंखों ही आंखों में रोमांस करते दिख जाएंगे आप को. खैर, अभी तक ध्रुव नहीं मिला तो वंशिका अब सच में परेशान हो उठी.
‘ओह, कहां चला गया यह लड़का. अब कहां ढूंढ़े इसे? आदित्य को क्या ही बोलूं क्योंकि इस के लिए भी वह मु?ो ही सुनाएगा कि मैं ध्रुव का ध्यान नहीं रखती ठीक से. सच कहूं तो अपनी तो कोई लाइफ ही नहीं बची मेरी. बस सिर पर जिम्मेदारी की पोटली लिए घूम रही हूं. वैसे शादी के पहले भी लड़की कौन सी आजादी की जिंदगी जी पाती है. ‘जोर से मत हंसो, ऐसे कपड़े मत पहनो, यह मत खाओ, वह मत खाओ, वहां मत जाओ, तुम पराया धन हो, कल को दूसरे घर जाना है, तरीका सीखो’ जैसी बातें कह कर एक लड़की को बचपन से ही बेडि़यों में बांध दिया जाता है. लेकिन लड़के के लिए ऐसा कुछ नहीं होता. वह तो जैसे मरजी चाहे जी सकता है.
लड़की बहुत से सपने ले कर जब अपनी ससुराल पहुंचती है तो वहां भी उस के साथ गैरों जैसा व्यवहार किया जाता है. हरेक मांबाप की तरह मेरे मांबाप ने भी अपनी जाति में मेरे लिए एक पैसे वाला परिवार का पढ़ालिखा लड़का जो अच्छी जौब में था, मेरे लिए ढूंढ़ा ताकि उन की बेटी सुख से रह पाए. लेकिन क्या पैसा और अच्छी पोस्ट ही सुख की गारंटी है? इंसान का अच्छा व्यवहारविचार नहीं? कहने को तो मैं एक पैसे वाले परिवार में ब्याही गई लेकिन आज भी मैं उस सुख से वंचित हूं जो एक पत्नी को अपने पति से चाहिए होता है. शादी के इन 7 सालों में क्या कभी आदित्य ने मु?ा से दो प्यार भरे शब्द बोले हैं? उसे तो केवल मेरे शरीर से मतलब रहा. जब मन किया पति धर्म निभा लिया वरना पलट कर भी नहीं देखता वह मु?ो.
कभीकभी तो मुझे लगता है मेरी शादी एक पैसे वाले, पढ़ेलिखे ऐजुकेटेड लड़के से नहीं बल्कि एक साइको से कर दी गई है, क्योंकि कब वह कहां पर, किस के सामने मेरी इन्सल्ट कर दे, कहा नहीं जा सकता. बहुत घमंड है आदित्य को अपने पैसे और पोस्ट का. समझता है उस के जैसा कोई है ही नहीं इस दुनिया में. शुरूशुरू में मैं ने बहुत सहा लेकिन अब मैं ने भी मुंह तोड़ जवाब देना सीख लिया है. क्या ही करेगा? तलाक दे देगा मु?ो? तो दे दे न. ऐसे इंसान के साथ जीवन गुजारने से अच्छा है अकेले जीवन जीना.
‘उफ, मैं भी क्या सोचने लग गई. मुझे तो ध्रुव को ढूंढ़ना है. कहां होगा वह. कहीं ध्रुव किड्स जोन में तो नहीं है?’ सच में ध्रुव किड्स जोन में ही था और बड़े मजे से खेल रहा था. ध्रुव को देख कर वंशिका की जान में जान आई. लेकिन वह यह देख कर बुरी तरह चौंक गई कि वहां खड़ा वह आदमी ध्रुव के बालों को सहला क्यों रहा है? क्या पूछने की कोशिश कर रहा है ध्रुव से? कौन है यह आदमी?’ वंशिका डर गई क्योंकि आज कल बच्चों की चोरियां बहुत होने लगी हैं. लोग बच्चों को बहलाफुसला कर उन्हें चुरा ले जाते हैं और फिर पता नहीं उन के साथ क्याक्या करते हैं.
‘‘ध्रुव, बेटा, आप यहां हो? पता है मैं कितनी परेशान हो गई थी. अच्छा अब घर चलते हैं,’’ ध्रुव का हाथ पकड़ते हुए वंशिका बोली लेकिन ध्रुव जिद करने लगा कि उसे अभी और खेलना है.
‘‘अरे, बच्चा है खेलने दीजिए न. अब बच्चे नहीं खेलेंगे तो क्या हम बड़े…’’ बोलते हुए वह आदमी जैसे ही वंशिका की तरफ मुड़ा, हैरान रह गया, ‘‘वंशिका. तुम… तुम वंशिका ही हो न?’’
‘‘जी… ऐक्स्क्यूज मी. कौन हैं आप? मैं ने आप को नहीं पहचाना?’’ वंशिका एकदम रूडली बोल कर आगे बढ़ी ही कि वह आदमी बोला. ‘‘वशू.’’
उस आदमी के मुंह से अपना ‘निक नेम’ सुन कर वंशिका ठिठक कर रुक गई और
पीछे मुड़ कर देखा तो उसे भी वह आदमी कुछ जानापहचाना सा लगा.
‘‘वशू… तुम ने मुझे नहीं पहचाना? अरे मैं जिगर… याद आया?’’
‘जिगर… हां, हां यह जिगर ही तो है. कैसे नहीं पहचान पाई मैं इसे. ‘‘जिगर… तुम यहां कैसे?’’ सालों बाद जिगर को अपने सामने देख कर वंशिका सुखद आश्चर्य से भर उठी, ‘‘उफ, मैं ने तो तुम्हें पहचाना ही नहीं. मैं तो सोच भी नहीं सकती कि तुम मु?ो यहां इस तरह अचानक मिल जाओगे.’’
‘‘मैं भी हैरान हूं तुम्हें यहां पर देख कर सच में. वह तो यह बच्चा खेलते हुए गिर पड़ा और ‘मम्मी मम्मी’ कह कर रोने लगा तो मैं इस से यही पूछ रहा था कि आप की मम्मी कहां हैं? पर मुझे क्या पता था कि यह तुम्हारा ही बेटा होगा. लेकिन यह क्या वंशिका. तुम तो आज भी वैसी की वैसी ही हो.’’
‘‘मतलब?’’ वंशिका ने हैरानी से पूछा.
‘‘मतलब, वही संतूर साबुन वाली लड़की,’’ बोल कर जिगर ठहाके लगा कर हंस पड़ा तो वंशिका भी खिलखिला उठी. झरने के संगीत की तरह वंशिका की खिलखिलाती हंसी देख कर जिगर कुछ पल उसे निहारता रह गया. लेकिन फिर उस ने खुद ही नजरें नीची कर लीं. अभी जो थोड़ी देर पहले आदित्य के खराब बिहेवियर के चलते वंशिका का मूड खराब हो गया था, जिगर से मिल कर उस के उदास चेहरे पर मुसकान खिल उठी.
‘‘ध्रुव को यहां खेलने दो. चलो हम उस कौफी शौप में बैठ कर बातें करते हैं,’’ जिगर बोला, तो वंशिका उस के साथ चल पड़ी और दोनों कौर्नर वाली टेबल पर जा कर बैठ गए.
‘‘वैसे तुम ने बताया नहीं तुम यहां अहमदाबाद में कैसे?’’ वंशिका ने सवाल किया.
‘‘सम?ा लो तुम से मिलना लिखा था,’’ जिगर हंसा, ‘‘दरअसल, अभी पिछले महीने ही मैं दिल्ली से अहमदाबाद आया हूं. आई मीन, ट्रांसफर हो कर. अच्छा पहले यह बताओ, तुम चाय लोगी या कौफी? मेरा तो कुछ भी चलेगा.’’
‘‘कौफी ही मंगवा लो.’’
‘‘स्नैक्स?’’
‘‘नहींनहीं, अभी कुछ खाने का मूड नहीं है. सिर्फ कौफी चलेगी,’’ वंशिका कुरसी पर रिलैक्स हो कर बैठते हुए बोली, ‘‘और बताओ घर में सब कैसे हैं? सुहाना, तुम्हारी बहन कहां है अभी?’’
‘‘सुहाना तो अमेरिका में है. शादी के बाद वहीं अपने पति के साथ सैटल हो गई. अपना घर भी खरीद लिया वहां उस ने. हां आती है 2-3 साल पर. हफ्ता 10 दिन रह कर फिर वापस चली जाती है. हांहां, मांपापा एकदम ठीक हैं.’’
वंशिका ने पूछा, तुम्हारे अहमदाबाद आ जाने पर वहां दिल्ली में मांपापा
एकदम अकेले पड़ गए होंगे?’’
‘‘अकेले क्यों. हमारे बहुत से परिवार हैं न दिल्ली में और दिल्ली से अहमदाबाद है ही कितनी दूर. केवल 928 किलोमीटर. जब मन होता है पहुंच जाता हूं. प्लेन से तो 1 घंटे में ही पहुंच जाते हैं. वैसे तुम बताओ अपने बारे में कुछ.
तुम्हारी शादीशुदा जिंदगी कैसी चल रही है?’’
जिगर की बातों पर वंशिका केवल मुसकरा दी, कुछ बोली नहीं. भले ही वंशिका कुछ न बोले लेकिन उस के बदन पर महंगे सूट और चमकती डायमंड ज्वैलरी देख कर जिगर ने यही अंदाजा लगाया कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी में काफी खुश है.
‘‘वैसे तुम्हारे पति की पोस्टिंग यहीं अहमदाबाद में है?’’
‘‘नहीं, हां, मतलब पोस्टिंग तो यहीं है. मगर वे औफिस के काम से ज्यादातर बाहर ही रहते हैं.’’
‘‘यू मीन, टूरिंग जौब है?’’
‘‘हां,’’ वंशिका फीकी सी मुसकान के साथ बोली, ‘‘मेरी छोड़ो, तुम बताओ. शादीवादी की या नहीं?’’
‘‘शादी?’’ जिगर ने एक लंबी सांस लेते हुए कहा, ‘‘समझ हुई भी और नहीं भी.’’
‘‘यह कैसा जवाब है शादी हुई भी, नहीं भी?’’ वंशिका ने मुंह बनाया.
‘‘तलाक का केस चल रहा है हमारा,’’ कौफी का 1 घूंट भरते हुए जिगर ने एक नजर सामने खेल रहे ध्रुव पर डाली, ‘‘बहुत ही प्यारा बच्चा है तुम्हारा. वैसे यह तुम पर तो नहीं गया है क्योंकि देखो, तुम्हारी नाक परांठे की तरह चिपकी हुई है और आंखें बटन की तरह गोलगोल,’’ जिगर ने टौपिक को एकदम ???बदल दिया. शायद इस पर वह आगे बात नहीं करना चाहता था. वंशिका भी सम?ा गई कि वह अपने बारे में कुछ बात नहीं करना चाहता. इसलिए फिर उस ने भी कुछ नहीं पूछा.
‘‘अच्छा, तो तुम यह कहना चाहते हो कि मेरी नाक चिपटी हुई और आंखें बटन की तरह गोलगोल हैं? खुद को आईने में देखा है कभी? बंदर कहीं का,’’ वंशिका ?ाठा रोष दिखाते हुए बोली और फिर खुद ही उस की हंसी छूट गई. दोनों काफी देर तक हंसते रहे. सोचने लगे, काश, वे दिन दोबारा लौट कर आ जाएं.
जिगर के पूछने पर वंशिका कहने लगी कि आदित्य, उस का पति मुश्किल से महीने के 8-10 दिन ही घर पर रहते हैं वरना तो औफिस के काम से कभी सिंगापुर, कभी मलेशिया तो कभी यूएस के टूर पर ही होते हैं.
‘‘उफ, फिर तो तुम अकेले घर पर बोर ही जाती होगी? तो इस से अच्छा तुम कोई जौब क्यों नहीं कर लेती? कम से कम बिजी तो रहोगी लाइफ में.’’
‘‘हां, तुम्हारी बात सही है. लेकिन फिर ध्रुव के बारे में सोचती हूं तो लगता है इसे अभी मां की जरूरत है.’’
दोनों बात कर ही रहे थे कि ध्रुव ‘मम्मीमम्मी करता वहां पहुंच गया और कहने लगा कि उसे अब घर जाना है.
‘‘मन भर गया खेल खेल कर तुम्हारा’’ वंशिका ने बेटे को पुचकारा, ‘‘चलो, अब चलती हूं. टाइम निकाल कर आओ न घर पर. बैठ कर आराम से बातें करेंगे.’’
वंशिका की बात पर जिगर ने मुसकरा कर ‘हां’ कहा. दोनों ने फोन नंबर ऐक्स्चेंज किए और फिर मिलने का वादा कर अपनेअपने रास्ते चल पड़े.
वंशिका और जिगर कभी एकदूसरे से प्रेम करते थे. लेकिन एकदूसरे से कह नहीं पाए.
वही जातपांत का डर कि पता नहीं उन के
परिवार वाले मानें न मानें. लेकिन आज फिर कहीं न कहीं उन दोनों के मन में छिपा रस का अनजाना स्रोत जो समय के साथ सूख चुका था, फिर से बहने लगा.
जिगर की बहन सुहाना और वंशिका दोनों कालेज में साथ पढ़ती थीं. दोनों की इतनी गहरी दोस्ती थी कि उन का एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था. इसी बीच जिगर से उस की आंखें चार हुईं तो धीरेधीरे वे प्रेम की गहराई तक डूबते चले गए. जिगर जब अपनी बड़ीबड़ी आंखों से वंशिका को छिपछिप कर निहारता तो शर्म के मारे उस की नजरें झुक जाती थीं.
उन की आंखमिचौली का यह सिलसिला सालों तक ही चलता रहा. जिगर का कदकाठी किसी हीरो से कम नहीं थी. वहीं वंशिका भी कम सुंदर नहीं थी. गोरे रंग पर उस के गोल्डन बाल उस की खूबसूरती में चार चांद लगा देते थे. जब वह हंसती तो साथ में उस की आंखें भी हंसती थीं और यही बात जिगर को दीवाना बना देती थी. जब भी उस की आंखें जिगर की आंखों से टकरातीं, उस का दिल नन्हे खरगोश की तरह फुदक उठता था. लेकिन उन का खामोश प्यार कभी मुखर नहीं हो पाया.
जिगर ने इंजीनियरिंग कर रखी थी पर वह डिफैंस में जाना चाहता था. इसलिए डिफैंस की तैयारी में जुट गया और 1 साल बाद ही डिफैंस में सलैक्ट हो गया. फिर 2 साल की ट्रेनिंग के लिए वे चेन्नई चला गया. इधर पढ़ाई पूरी होने के बाद वंशिका की शादी आदित्य से तय हो गई. उन का खामोश प्यार खामोश ही रह गया.
ट्रेनिंग के बाद जब जिगर अपने घर लौटा और सुहाना से जब उसे यह बात पता चली कि वंशिका की शादी हो गई तो उस का दिल टूट कर बिखर गया. अपने कमरे में जा कर घंटों रोया था. लेकिन किसी के सामने उस ने यह बात जाहिर नहीं होने दी.
भले ही वह वंशिका के सामने अपने प्यार का इजहार नहीं पाया कभी लेकिन आज भी उस के दिल के भीतर वंशिका के लिए वही प्यार था. याद है उसे, एक रोज जब वंशिका, सुहाना के साथ पढ़ने उस के घर आई थी और सुहाना घर पर नहीं थी तब वंशिका यह बोल कर जाने लगी कि बाद में आएगी तब जिगर ने बड़ी हिम्मत कर पीछे से उस का हाथ पकड़ लिया था और अपने प्यार का इजहार करने ही वाला था कि वंशिका अपना हाथ छुड़ा कर भाग गई. डर गई कि किसी ने देख लिया तो? उस के घर वालों को उस के इस प्यार के बारे में पता चल गया तो?
कैसी विडंबना है यह भी. जब दोनों एक होना चाहते थे तब समाज, परिवार का डर उन्हें सताता रहा और आज जब उन्हें कोई रोकनेटोकने वाला नहीं है तो दोनों एक मर्यादा में बंधे हैं, जिसे चाह कर भी तोड़ नहीं सकते.
अब जब भी छुट्टी मिलती, जिगर वंशिका के घर पहुंच जाता और फिर तीनों कहीं दूर घूमने निकल पड़ते. ध्रुव जिगर के साथ काफी घुलमिल गया था. रोज रात में वह जब तक जिगर से वीडियो कालिंग पर बात नहीं कर लेता, सोता नहीं था.
समय बड़े अच्छे से बीत रहा था उन का. जिगर के यहां आ जाने से वंशिका की वीरान जिंदगी में बहार आ गई थी वरना तो आदित्य को वंशिका के अकेलेपन और उस की उदासी से कुछ लेनादेना ही नहीं था. उसे तो यही लगता है कि वह उस की जरूरतें पूरी कर रहा है तो और क्या चाहिए उसे. लेकिन जिगर के आ जाने से उसे कोई सुननेसमझने वाला तो मिला.
इस संडे वंशिका और जिगर ने ‘पुष्पा 2’ फिल्म देखने जाने का प्रोग्राम बनाया. लेकिन ध्रुव इस बात की जिद पकड़ बैठा कि उसे कांकरिया जू ही जाना है. फिल्म जाना कैंसिल कर वे कांकरिया जू देखने निकल पड़े. वहां ध्रुव ने
खूब मस्ती की. बहुत कुछ खाया भी. जो काम आदित्य को ध्रुव के लिए करना चाहिए था, वह जिगर कर रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे वही उस का पिता है.
जिगर बड़े प्यार से हौलेहौले ध्रुव को झला झला रहा था और वह खिलखिलाए जा रहा था. उसे झले पर बहुत मजा आ रहा था.
ध्रुव को जिगर के साथ इतना खुश देख कर वंशिका को भी अच्छा लग रहा था वरना बेचारा बच्चा घर में पड़ेपड़े बोर हो जाता था. आज जिगर को अच्छे मूड में देख कर वंशिका से
पूछे बिना नहीं रहा गया, ‘‘जिगर, एक बात पूछूं तुम से?’’
‘‘पूछो न,’’ जिगर ने मुसकराते हुए कहा.
‘‘तुम्हारी तो राधिका से लव मैरिज थी न फिर तलाक की नौबत क्यों आ गई तुम दोनों के बीच? नहीं, तुम्हारी मरजी न हो तो मत बताओ.’’
वंशिका की बात पर जिगर कुछ देर चुप रहा. शायद कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. लेकिन फिर बोला, ‘‘मैं तुम से प्यार करता था वशू लेकिन अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाया तुम से. पता है क्यों? क्योंकि मैं चाहता था कि पहले कोई अच्छी जौब ले लूं, फिर तुम्हारे पापा से जा कर तुम्हारा हाथ मागूंगा. मगर मेरे आने से पहले ही तुम किसी और की हो गई. फिर मैं ने भी वक्त के साथ सम?ाता कर लिया और अपना पूरा ध्यान अपने काम में लगा दिया.
‘‘मेरी काम के प्रति डैडिकेशन को देख कर मेरे हैड कमांडर प्रताप सिंह को मैं उन्हें उन की इकलौती बेटी राधिका के लिए पसंद आ गया. उन्हें पता तो था ही कि मैं बहुत आगे तक जाऊंगा. इसलिए उन्होंने मुझे अपने दामाद बनाने का फैसला कर लिया और अपनी बेटी को मेरे पीछे लगा दिया. नहीं, वह भी मुझे अच्छी लगती थी पर वैसे नहीं. मतलब मैं ने उसे उस दृष्टि से कभी नहीं देखा. एक दिन अचानक कमांडर प्रताप सिंह मेरे घर आ पहुंचे और कहने लगे कि मैं और राधिका एकदूसरे से प्यार करते हैं तो क्यों न इन दोनों की शादी करा दी जाए. उन की बात पर मांपापा ने बड़ी हैरानी से मेरी तरफ देखा जैसे कह रहे हों कि इतनी बड़ी बात मैं ने उन्हें नहीं बताई? लेकिन सामने मेरे हैड राधिका के पापा बैठे थे तो मैं उन्हें कैसे बताता कि ऐसी कोई बात नहीं और मैं राधिका से कोई प्रेम नहीं करता हूं बल्कि उसे एक अच्छी दोस्त मानता हूं.
‘‘मेरे लिए एक तरफ कुआं था तो दूसरी तरफ खाई. हां, बोलता तो भी मारा जाता और न बोलता तो भी मारा ही जाता मैं. सो चुप रहने में ही भलाई सम?ा. लेकिन बाद में मांपापा भी इस रिश्ते के लिए मान गए क्योंकि आज नहीं कल उन्हें मेरी शादी करनी ही थी. खैर, जो हुआ नहीं होना चाहिए था क्योंकि यह शादी बिना मेरी मरजी के हुई थी. लेकिन अब यह शादी हो चुकी थी और राधिका मेरी पत्नी बन चुकी थी तो नाराज होने या दुखी रहने का कोई मतलब नहीं
था अब.
‘‘मगर शादी के कुछ महीने बाद ही मुझे लगने लगा कि मैं इस शादी में बुरी तरह फंस चुका हूं क्योंकि राधिका छोटी सी छोटी बात पर घर में क्लेश करने लगी थी. मेरे मांपापा की वह जरा भी इज्जत नहीं करती और जब मैं कुछ कहता तो अपने पापा की पोस्ट और पैसे की धौंस जमाती और कहती कि वह मेरा डिमोशन करवा देगी अपने पापा से कह कर. इस तरह से हमारी शादी को 1 साल गुजर गया. लेकिन इस 1 साल में मुझे ठीक से याद नहीं है कि हम ने एकसाथ एक दिन भी अच्छे से गुजारा हो.
मां अपना एक पोता या पोती चाहती थीं पर राधिका मां बनने को तैयार नहीं थी. इसलिए क्योंकि बच्चे पैदा करने पर उस की फिगर जो खराब हो जाएगी.
‘‘एक दिन जब हमें पता चला कि राधिका मां बनने वाली है तो हमारे खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मां ने तो पड़ोस में और 2-4 रिश्तेदारों के यहां मिठाई तक बंटवा दी. वे राधिका के खानेपीने से ले कर उस की आराम का पूरा ध्यान रखने लगीं. आखिर वे दादी जो बनने वाली थीं.
हमारे घर एक नन्हा मेहमान आने वाला है यह सोच कर खुशी के मारे मेरे पापा पूरे घर का चक्कर काटते रहते. अपने अजन्मे पोते या पोती के लिए अभी से उन की आंखों में सपने पलने लगे थे. मैं ने तो अपने कमरे की हर दीवार पर प्यारेप्यारे बच्चों के फोटो चिपका दिए थे और यह सोच कर उत्साह से उछल पड़ता था कि मैं पापा बनने वाला हूं.
‘‘मगर राधिका ने हमारे साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया. वह हमें बताए बिना बच्चा अबौर्ट करवा आई. तब वह 23 सप्ताह की प्रैगनैंट ही थी इसलिए आसानी से मिलिटरी अस्पताल में अबौर्शन हो गया. यह सुन कर मां तो धम्म से जमीन पर गिर पड़ीं और पापा गुम हो गए. जब मैं ने उस से सवाल किया कि उस ने ऐसा क्यों किया तो उस ने बड़े ढीठपन से कहा, ‘‘मेरा शरीर मेरी मरजी. माई बौडी, माई विश.’’
‘‘‘तुम्हारी मरजी? तो क्या उस बच्चे पर मेरा कोई अधिकार नहीं था? आखिर मैं बाप था उस का और ऐसे कैसे तुम इतना बड़ा फैसला अकेले ले सकती हो?’ पहली बार राधिका पर मेरा हाथ उठ गया और जिस का नतीजा यह हुआ कि वह यह घर छोड़ कर अपने पापा के घर चली गई और वहां से यह खबर भिजवाई कि जब तक मैं उस के पैरों पर गिर कर अपनी नाक रगड़ कर उस से माफी नहीं मांग लेता, यहां नहीं आएगी.
‘‘मैं गया था उस से माफी मांगने लेकिन वहां से मुझे बेइज्जत कर के बाहर निकाल दिया गया. शायद मुझे बेइज्जत करने के लिए ही अपने घर बुलाया था उन लोगों ने. राधिका के पापा ने मुझे धमकी दी कि वे मेरा हाल बेहाल कर देंगे. इस नौकरी में टिकने नहीं देंगे मुझे. राधिका
मु?ा से तलाक चाहती थी और अब मैं भी इस रिश्ते में नहीं रहना चाहता था क्योंकि कुछ बचा ही नहीं अब हमारे बीच. इसलिए वकील की सलाह पर मैं ने कोर्ट में तलाक के लिए
आवेदन कर दिया. मैं ने अपनी वह जौब भी
छोड़ दी और दूसरी जौब के लिए अप्लाई कर दिया. जल्द ही मु?ो एक बड़ी कंपनी से जौब
का औफर आया और आज मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं. वैसे अभी भी हमारा तलाक का केस चल ही रहा है.’’
‘‘उफ’’ जिगर की दर्द भरी कहानी सुन कर वंशिका ने एक गहरी सांस ली. देखा तो ध्रुव उस की गोद में सो चुका था.
‘‘अब हमें घर चलना चाहिए क्योंकि देखो न मौसम कैसा हो चला है.’’
वंशिका की बात पर जिगर कहने लगा ‘‘हां, पूरा आसमान काले बादलों से ढक गया है. लगता है जोरों की बारिश होगी.’’
अभी वे लोग घर पहुंचे भी नहीं थे कि बूंदाबांदी शुरू हो गई और घर पहुंचते ही जोरों की बारिश शुरू हो गई. ‘‘कहा था न मैं ने बारिश होगी. अच्छा तुम बैठो मैं तब तक कौफी बना लाती हूं,’’ ध्रुव को कमरे में सुला आने के बाद वंशिका किचन में कौफी बनाने चली गई.
इधर जिगर को लग रहा था कि जरा बारिश थमेगी तो वह अपने घर के लिए निकल जाएगा. मगर थमने की जगह बारिश और जोर पकड़ रही थी. बादलों का गरजना यही जता रहा था कि अभी बारिश थमने वाली नहीं है. ऊपर से रात के 9 बजने वाले थे. क्या करेगा वह?
‘‘इतने परेशान क्यों लग रहे हो?’’ कौफी का मग जिगर की तरह बढ़ाते हुए वंशिका ने उस की चेहरा पढ़ते हुए कहा, ‘‘जब भी बारिश रुकेगी चले जाना, इतना क्या सोच रहे हो?’’
‘‘नहीं, वह बात नहीं है. बात दरअसल यह है कि बारिश नहीं रुकी तो? सुबह मु?ो जल्दी औफिस के लिए निकलना है. एक जरूरी मीटिंग है बौस के साथ.’’
खैर, बारिश नहीं रुकी. वंशिका ने जिगर को यह कह कर अपने घर पर ही रोक लिया कि सुबह यहीं से औफिस चला जाए.
‘‘तुम्हारी बात सही है. मगर प्रौबलम यह है कि मेरे कपड़े कहां से आएंगे? औफिस कैसे जाऊंगा मैं?’’
‘‘एक काम करो, तुम अपने कपड़े मुझे उतार कर दे दो. अभी मशीन में धो देती हूं. सुबह प्रैस कर दूंगी. हो गई न सारी प्रौब्लम सौल्व.’’
मजबूरन जिगर को वंशिका की बात माननी पड़ी क्योंकि इतनी बारिश में पता नहीं कहां पेड़वेड़ या बिजली का तार गिर पड़े और जान पर आफत आन पड़े. इस से अच्छा उसे यहां रुकना सही लगा.
ध्रुव भूखा ही सो गया था इसलिए वंशिका यह सोच कर उस के लिए किचन में दूध लाने चली गई कि उठा कर कम से कम उसे दूध पिला देगी. वह सोए दूध पी लेता है. मगर अचानक बिजली चली गई और पूरे घर में अंधेरा छा गया. बाहर जोर की बारिश हो ही रही थी. वंशिका ने जैसे ही मोमबत्ती जलाई, उसे खिड़की के पास कोई खड़ा दिखा और वह डर के मारे जोर से चिल्ला पड़ी.
वंशिका के चिल्लाने की आवाज से जिगर की नींद खुल गई, ‘‘क्या हुआ वंशिका?’’
जिगर ने पूछा तो वंशिका ने इशारे से कहा कि वहां खिड़की के पास कोई खड़ा है.
‘‘कहां? अरे, यह तो बेचारा कुत्ता है.
बारिश से बचने के लिए यहां छिपा बैठा है और तुम बेकार में डर गई,’’ जिगर को जोरों की हंसी आ गई.
तभी बिजली इतनी जोर से कड़की कि वंशिका डर के मारे जिगर के सीने में
दुबक गई. वंशिका को अपने इतने करीब पा कर न जाने जिगर को क्या हुआ कि उस ने उसे अपनी बांहों में समेट लिया. सुरक्षा की छांव लिए विशाल वृक्ष की तरह अपने ऊपर पसरते जिगर की संवेदनाओं की छाया से वंशिका तर हो उठी और वह जिगर की बांहों में चली गई.
दोनों एकदूसरे के इतने ज्यादा करीब आ चुके थे कि उन की गरम सांसें उन्हें पिघलाने लगीं और फिर जो हुआ, उसे रोक पाना उन के वश में नहीं था. कुछ ही पलों में उन के बीच की सारी मर्यादाएं टूट गईं और फिर यह सिलसिला चल पड़ा.
अब जब भी दोनों मिलते एक हो जाते. जो ‘चरमसुख’ उसे अपने पति आदित्य से नहीं मिल पाया आज तक, वह जिगर से पा कर वह धन्य हो गई. जिगर भी तो वर्षों बाद किसी स्त्री के शरीर का सुख पा रहा था. दोनों का खामोश प्रेम मुखर हो रहा था.
भले ही वंशिका को यह लग रहा हो कि वह जो कर रही है गलत है लेकिन इस में गलत तो कुछ भी नहीं था. जैसे इंसान के लिए पेट का
भूख होती है वैसे ही शरीर की भी भूख होती है. पर लोग यह बात समझ नहीं पाते हैं और सब से बड़ी बात कि औरतें ही क्यों समझें हर वक्त? क्या वहां आदित्य अपने शरीर की भूख नहीं मिटा रहा होगा?
फिर वंशिका ने ऐसा क्या गलत कर दिया जो उसे शर्मिंदा होना पड़े? जिगर उस का प्यार था, जबकि आदित्य के साथ तो उसे जबरदस्ती बांध दिया गया था.
एक लड़की अपने मातापिता के लिए कितनी ही प्यारी बेटी क्यों न हो पर उसे कोई
अधिकार नहीं है कि वह अपने लिए खुशियां चुन सके. उसे कोई अधिकार नहीं है कि वह अपनी पसंद का जीवन साथी चुन सके वरना मातापिता की इज्जत चली जाती है.
औरतों को जानेअनजाने दोयमदर्जे का समझते ही कोई पुरुष बिना किसी पुरुषार्थ के ही स्वयं को अव्वल मनने लगता है जैसे आदित्य बारबार वह यह साबित करने की
कोशिश करता है कि वंशिका उस से कमतर है और वह उस का भाग्यविधाता और वंशिका को वही सब करना होगा जो वह कहेगा, जबकि वह छुट्टा सांड बना जब जहां मन आए मुंह मार सकता है.
पता है वंशिका को कि उसे अपनी संपत्ति समझने वाला आदित्य कभी भी यह बात बरदाश्त नहीं करेगा कि जिगर और वंशिका
कभी एकदूसरे के प्रति आकर्षित हुए थे. ‘लेकिन उसे कुछ बताने की जरूरत भी क्या है और
अगर उसे जिगर और उस के रिश्ते के बारे में पता चल भी जाए तो क्या? छोड़ देगा उसे? तो छोड़ दे.
ऐसे रिश्ते में रहना भी कौन चाहता है. इसलिए अब मैं वही करूंगी जो मेरा दिल चाहेगा,’ अपने मन में सोच वंशिका ने एक राहत भरी सांस ली और चैन से आंखें मूंद लीं. आज बहुत दिनों बाद उसे अच्छी नींद आई. द्य
दोनों की इतनी गहरी दोेस्ती थी कि उन का एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था. इसी बीच जिगर से उस की आंखें चार हुईं तो धीरेधीरे वे प्रेम की गहराई तक डूबते चले गए…
दोनों एकदूसरे के इतने ज्यादा करीब आ चुके थे कि उन की गरम सांसें उन्हें पिघलाने लगी थी. यह एहसास उन्हें तब हुआ जब वे एकदूसरे के बेहद करीब आ चुके थे…
