Story In Hindi : ‘‘अरे आज क्लास में स्ट्रैंथ कम क्यों है, मारिया?’’ सुप्रिया ने झुंझलाते हुए सवाल किया, ‘‘जाओ सब को इन्फौरमेशन दो कि मैं क्लास में आ चुकी हूं, सब आ जाएं जल्दी.’’
‘‘जी मैडम,’’ मारिया ने मेज को साफ करते हुए उत्तर दिया और फिर डस्टर लगने से पेपरवेट जैसे ही नीचे गिरा, उस की जान मानो उस के हलक में ही अटक गई. अपने ओहदे का खयाल न करते हुए उस ने फर्श से स्वयं ही उठा कर हाथों में कोमलता से सहेजा जैसे वह निर्जीव पेपरवेट न हो कर नवजात शिशु हो. फिर वापस मेज पर सजा दिया. जैसे उस की कोई चोरी पकड़ी गई हो. पलभर की कोमलता विलुप्त हो कर पुन: भिंचे होंठ और सख्त मुद्रा में बदल गई.
मारिया भी उस का खराब मिजाज भांप कर तेजी से बाहर की ओर निकल गई.
‘‘हुंह... क्लास क्या खाक लूंगी इस तरह, जब एचओडी की क्लास में ये बच्चे इतने अनुशासनहीन हो सकते हैं तो दूसरे टीचर्स की क्लास में क्या ही करते होंगे,’’ कह कर वह खुद से बड़बड़ाते हुए अपनी चेयर पर बैठ गई. कलफ लगी तांत की सूती नारंगी रंग की साड़ी में उस का गेहुआं व्यक्तित्व अलग ही खिल रहा था. माथे पर बड़ी सी सिंदूरी बिंदी लगाए, कर्णचुंबी बड़ेबड़े खिले पनीले से नयनों में काजल की रेखा ऐसे लग रही थी मानों सागर की सीमारेखा तय कर दी हो किसी ने. फाइन आर्ट की प्रवक्ता थी. वह स्वयं भी रूपरंग में अपनी तराशी हुई मूर्तियों का ही कोई हिस्सा सी लगती.
विद्यार्थी उसे पीठ पीछे कड़क कौटन कैंडी कहा करते थे. उसे बड़ी कुढ़न होती कि आखिर मेरे ही हिस्से में प्यार क्यों नहीं था. सोचती थी कि काश ये बच्चे आखिर दुख देने वाली भावना से दूर क्यों नहीं रहते? उस का बस चलता तो एक भी जोड़े को साथ बैठने न देती. उस का प्रेम आज भी उस के रोमरोम में गहरे समाया हुआ था. आज भी जलरंगों की पेंटिंग बनाते समय बैकग्राउंड में अधिकतर शेड्स को निखारने के लिए उसी तरह कूची के स्थान पर कपास का इस्तेमाल किया करती थी.
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