Social Story : ‘‘सारिक ये तुम्हारे नए पापा हैं. आज से ये हमारे साथ इसी घर में रहेंगे.’’
यह सुन कर सारिका पर जैसे बिजली गिरी. मगर जिन हालात में वह जी रही थी उन्हें देख चुप रहना ही बेहतर समझ शर्म से नजरें झुका लीं.
सारिका की मम्मी नलिनी अपने नए हस्बैंड के साथ अपने बैडरूम में चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.
अभी 4 महीने भी नहीं गुजरे थे जब सारिका के सगे पापा तेजस्वी ने दूसरी महिला के साथ अलग रहना शुरू कर दिया था. वे खुद रेल विभाग में स्टेशन मास्टर थे. वहीं लेडी टिकट चैकर हरमनप्रीत से उन का लव अफेयर चल रहा था. इस बात को ले कर सारिका के मम्मीपापा में अकसर ?ागड़ा होता था. एक दिन ?ागड़े ने विकराल रूप धारण कर लिया और सारिका की मम्मी ने अपने हस्बैंड तेजस्वी को खरीखोटी सुनाते हुए कह दिया, ‘‘कान खोल कर सुन लो तेजस्वी, यह मकान मेरे नाम है. तुम्हें उस बास्टर्ड के साथ रहना है तो जा कर मरो उस हरामिन के साथ. आज के बाद इस घर में कदम मत रखना.’’
सारिका के पापा के लिए यह बरदाश्त से बाहर की बात थी. उन्होंने उसी समय घर छोड़ दिया. हालांकि सारिका और उस के भाई सौरभ ने उन्हें रोकने की लाख कोशिशें कीं लेकिन वे नहीं रुके. उन्होंने अपनी पत्नी से ही नहीं बल्कि अपने बच्चों से भी पूरी तरह नाता तोड़ लिया.
सारिका की मम्मी नलिनी इंग्लिश मीडियम स्कूल में लैकचरर थीं. वे तेजतर्रार, स्मार्ट और खूबसूरत थीं. उन का भी अपने एक कलीग कावेंद्र से बहुत दिनों से गुपचुप लव अफेयर
चल रहा था. सारिका के पापा के घर छोड़ते ही यह लव अफेयर गुलाब के फूल की तरह महक उठा. जब एक मर्द ऐसा कर सकता है तो औरत क्यों नहीं?
सारिका की मम्मी नलिनी ने अपने नए हस्बैंड के साथ नई जिंदगी शुरू कर दी. वे दोनों अपनी जिंदगी में इतने मशगूल हो गए कि सारिका और उसके भाई सौरभ की पूरी उपेक्षा होने लगी. सारिका की उम्र इस समय 20 वर्ष थी और इस समय उसे अपनी मम्मी की एक दोस्त की तरह जरूरत थी. लेकिन उस की मम्मी को अपनी नई जिंदगी और नए हस्बैंड के साथ मौजमस्ती से फुरसत कहां? वे तो 42 साल की उम्र में अपने नए हस्बैंड के साथ हनीमून मनाने के लिए काठमांडू के सैरसपाटे पर चली गई.
सारिका के भाई सौरभ की पिछले साल एक रोड ऐक्सीडैंट में एक टांग खराब हो गई थी तब से वह बैसाखी के सहारे था. बहुत से कामों में उसे दूसरे व्यक्ति के सहारे की जरूरत पड़ती थी. उस का एकमात्र सहारा सारिका ही थी. ऐसी जटिल परिस्थिति में भी सारिका ने हिम्मत नहीं हारी. इस समय वह एमएससी फिजिक्स के फाइनल ईयर में प्रवेश कर गई थी. जब तक उस की एमएससी की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती वह कुछ और नहीं सोच सकती थी.
इस से पहले सारिका की मम्मी उस के खर्च का उस से कोई हिसाबकिताब नहीं मांगती थी लेकिन अब उन्हें 1-1 पैसे का हिसाब चाहिए था. मम्मी में आए इस भयंकर बदलाव पर वह अचंभित भी थी और कुछ परेशान भी. वह कुछ देर के लिए खयालों में खो गई कि जब वह 9वीं कक्षा में पढ़ती थी तब उस की मम्मी उसे जेबखर्च के लिए 500 रुपए और उस के पापा उसे 1000 रुपए हर महीने देते थे. इसके अलावा वह जबतब उनसे पैसे मांग लिया करती थी.
तब उस की मम्मी ने उसे सुलझाया था, ‘‘सारिका, क्यों न तू डाकखाने में अपनी पौकेट मनी से अपनी एक आरडी खोल ले. इस से तेरी एक अच्छी बचत हो जाएगी. बचतखोर तो तू है ही. हर समय पैसों से अपनी गुल्लक भरे रखती है.’’
सारिका बचपन से ही मितव्ययी थी. वह गुल्लक में पैसे बचा कर रखती थी और फिर गुल्लकभरने पर अपने लिए कुछ नया खरीदती थी. उसे मम्मी का आरडी खोलने वाला आइडिया बहुत पसंद आया था और उस ने पास के डाकखाने में जा कर 1,500 रुपए की आरडी खोल ली थी. वह हर महीने अपनी पौकेट मनी के 1,500 रुपए डाकखाने में जमा कर आती थी. उसे बड़ा अच्छा लगता था जब हर महीने उस की पासबुक में 1,500 रुपए बढ़ जाते थे. जब 5 साल में उसकी आरडी पूरी हुई तो उस के खाते में 1 लाख रुपए से अधिक की धनराशि थी. पोस्टमास्टर के सु?ाव पर उस ने उसी आरडी को और 5 साल के लिए आगे बढ़ा लिया.
ऐसा नहीं था कि सारिका को इस पौकेट मनी के अलावा पैसा नहीं मिलता था. वह अपनी जरूरत के लिए अपने मम्मीपापा से जबतब पैसे मांग लेती थी और उसे दोनों में से कोई भी मना नहीं करता था. दोनों ही जानते थे कि उन की बेटी फुजूलखर्ची बिलकुल नहीं करती है. कितने अच्छे दिन थे वे, जब तक परिवार में तीसरे की ऐंट्री नहीं हुई थी कितना सुखी परिवार था. मम्मी पापा बच्चों को प्यार करते थे, उन की चिंता करते थे.
मगर जब से उन के मम्मीपापा ने अपनेअपने नए जीवन साथी ढूंढ़ लिए थे सारिका और सौरभ का जीवन दुभर हो गया था. सारिका को अपनी आरडी की किस्त तक भरनी भारी पड़ रहा था और वह अपनी आरडी को 10 साल पूरे होने से पहले तोड़ना नहीं चाहती थी. अब वह क्या करे?
सारिका को एक आइडिया आया. उस ने अपनी कुछ विश्वस्त सहेलियों से बात की. फिर 2 जगह पर उसे 3-3 हजार की होम ट्यूशन मिल गईं. अब उस की किस्तें आसानी से जमा होने लगी थी और उस का कुछ जेब खर्च भी निकल आता था. उसे यह काम बहुत पसंद आया. एमएससी पूरी होने पर उस ने और ट्यूशन पकड़ ली. आरडी पूरी होने में भी कुछ ही महीने शेष बचे थे. तभी एक घटना हो गई.
एक दिन जब सारिका बाथरूम से नहा कर बाहर निकली तो उसे ऐसा लगा कि उस
का सौतेला पिता उसे गलत नजरों से ताड़ रहा है और उस ने उसे बुदबुदाते हुए कुछ कहा भी है. लेकिन सारिका ने उस समय इस बात को गंभीरता से नहीं लिया.
सारिका को अभी तक अपनी मां के गर्भवती होने का पता नहीं चला था. बहुत देरी से उसे यह जानकारी हुई. जानकारी होने पर वह अचंभित रह गई क्योंकि उसे अपनी मां से इस उम्र में इस बात की उम्मीद तो हरगिज नहीं थी. उस ने यह भी देखा कि उस की मां का व्यवहार उसके और उस के भाई के प्रति बिलकुल बदल गया है. सौतले बाप को तो वे दोनों फूटी आंख नहीं सुहाते थे.
सरिका का सौतेला पिता उसकी मां से 5 साल छोटा था. वह अब सारिका पर अश्लील फबतियां भी कसने लगा था और अश्लील हरकतें भी करने लगा था. तब एक दिन सारिका ने अपनी मम्मी से अपने सौतले पिता की शिकायत करते हुए कहा, ‘‘मम्मी, पापा मु?ो गलत नजर से देखते हैं और अश्लील हरकतें भी करते हैं.’’
‘‘ठीक है सारिका, मैं तुम्हारे पापा से बात करूंगी,’’ नलिनी ने अपने उभरे पेट को ढकते हुए कहा.
‘‘मम्मी, बात ही नहीं करनी है उन्हें अच्छे से समझ देना, अब मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं.’’
‘‘सारिका, तुम मुझ से यह कैसी बातें कर रही हो? तुम मुझे बता रही हो कि धमका रही हो? माइंड योर लैंग्वेज.’’
‘‘मम्मी, मैं बता ही तो रही हूं और इस से ज्यादा उन की हरकतों को बताते हुए मुझे शर्म आ रही है.’’
‘‘अब जब तुम ने सारिका मुंह खोल ही दिया है तो बता ही डालो. अब शर्म किस बात की?’’
अगली बात बताने से सारिका हिचकिचा रही थी. लेकिन अब उस ने फैसला किया कि मम्मी को सबकुछ बता ही देना चाहिए. उस ने कहा, ‘‘मम्मी, एक दिन ये नए वाले पापा मेरी ब्रा और पेंटी से खेल रहे थे और मुझे लहरा कर दिखा रहे थे.’’
‘‘यह तो तुम उन पर इलजाम लगाने लगी.’’
‘‘इलजाम नहीं लगा रही हूं. तुम्हारे नए हस्बैंड की तुम्हें गंदी करतूतें बता रही हूं. न जाने कहां से उठा लाई हो ऐसे लफंगे आदमी को.’’
सारिका ने यह बात चीख कर कही तो उस की मम्मी नलिनी ने उस के गाल पर गुस्से में तमाचा जड़ दिया, ‘‘इडियट, बड़ों से बात करने की तहजीब भी खो दी. उन पर इलजाम लगा रही है और मुझ पर चीख रही है. बदतमीज लड़की आइंदा से जबान संभाल कर बात करना. अभी मेरे टुकड़ों पर पल रही है.’’
उस दिन सारिका अपने कमरे में जा कर खूब रोई. उसे लगा अब इस दुनिया में उस का कोई नहीं है. लेकिन जब दुख और तनाव से कोई गुजरता है तो वह किसी फैसले से गुजरता है. सारिका तो वैसे भी बहुत हिम्मत वाली थी. मन ही मन उस ने फैसला कर लिया कि अब उसे क्या करना है.
मगर इस से पहले कि सारिक कुछ कर पाती चंद दिनों में ही दूसरी घटना घट गईर्.
एक दिन जब नलिनी किसी काम से बाहर गई हुई थीं कि सारिका का सौतेला पिता हवस के वशीभूत उस के कमरे में आ धमका और सारिका को दबोच लिया. सारिका चीखी तो उस ने उस का मुंह दबा दिया. लेकिन यह चीख सौरभ के कानों में पड़ गई. वह बैसाखी के सहारे लंगड़ाता हुआ अपनी बहन के कमरे में पहुंचा.
सौरभ यह देख कर दंग रह गया कि उस की बहन को उस के सौतले पापा ने दबोच रखा है और उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा है. वह तेजी से उन की तरफ लपका और बैसाखी एक तरफ फेंक कर उस ने अपने सौतले पापा की कस कर गरदन पकड़ ली. इस से सौतले पापा की पकड़ सारिका पर ढीली पड़ गई और वह उस के चंगुल से निकलने में कामयाब हो गई. उस ने भाई की बैसाखी उठा कर दनादन अपने सौतले वहशी पापा पर मारनी शुरू कर दी. सौतेला पापा अब फंस चुका था. वह उन दोनों को चेतावनी देता हुआ कमरे से भागा, ‘‘देख लूंगा, हरामजादो, तुम दोनों को.’’
सारिका बैसाखी उठा कर उस के पीछे भागी तो उस ने घबरा कर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. वह कमरे से बाहर तब निकला जब नलिनी घर पर आ गई और फिर चोट के निशान दिखाता हुआ ?ाठ बोला, ‘‘नलिनी, तुम्हारे बच्चों ने आज जरा सी बात पर मु?ो मिल कर मारा.’’
सारिका ने सच बताने की कोशिश की तो नलिनी ने उसे उलटे हाथों लिया, ‘‘सारिका, तुम यही चाहती हो कि मेरा नया परिवार टूट जाए. तुम्हारे नए पापा यहां से चले जाएं. मैं बच्चे को जन्म न दूं और तुम दोनों भाईबहन पूरी संपत्ति के मालिक बन जाओ.’’
सारिका को अपनी मम्मी से यह उम्मीद बिलकुल नहीं थी. एक मां इतनी कठोर भी हो सकती है उसे कतई उम्मीद न थी. उसे क्या पता था कि नए बच्चे और नए हस्बैंड की वफादार बनने के लिए एक औरत कितनी बदल जाती है. उस ने अपनी मम्मी से बहस करना उचित नहीं सम?ा. वह और उस का भाई अब अपनी सगी मां के लिए पराए हो चुके थे. अब मां की एक अलग दुनिया थी जिस में उन की कोई जगह नहीं थी.
सारिका ने कुछ दिन और इंतजार किया. उस की आरडी के मेच्योर होने का समय आ गया था. उस ने पहले ही पूरा इंतजाम कर लिया था.
जिस दिन उसे पौकेट मनी से हुई बचत की आरडी की ढाई लाख से ज्यादा की रकम मिली, उस ने अपने किराए के कोचिंग सैंटर को सुसज्जित किया. रहने के लिए एक छोटा सा घर किराए पर लिया और जरूरत का सामान खरीद लिया.
अपनी मम्मी और सौतेले बाप से उस ने एक पैसा नहीं मांगा. जब वह अपने भाई के साथ अपनी मम्मी का घर छोड़ रही थी तो उस की मम्मी और सौतेला बाप दोनों उसे टकटकी लगा कर देख रहे थे. उन्होंने उसे रोकने की कोशिश तक नहीं की. सारिका और उस के भाई ने भी उन्हें पलट कर नहीं देखा. सारिका के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक और सुंदर भविष्य की मुसकान थी.
सारिका अकसर सोचा करती है कि यदि उस ने पौकेट मनी से इतनी रकम न जुटाई होती तो मुश्किल में पड़ गई होती. उस की पौकेट मनी आज उस के बहुत काम आई. उस के द्वारा 10 साल पहले लिए गए एक छोटे से फैसले ने उसे जिंदगी की एक बड़ी जंग में फतह हासिल करवा दी.
हालांकि सारिका की एमएससी हुए काफी दिन हो गए थे और वह किसी स्कूल में जोब की तलाश में थी. लेकिन काफी हाथपैर मारने के बाद भी उसे जौब नहीं मिल पा रही थी. एक दिन उसे एक स्कूल से इंटरव्यू के लिए काल आई. उसे अचंभा हुआ. उस का इंटरव्यू भी क्लीयर हो गया.
अगले दिन स्टाफरूम में दोनों मांबेटी आमनेसामने बैठी थी. सारिका का सौतेला बाप दोनों को टुकुरटुकुर देख रहा था. यह क्या हो गया था?
मगर यहां तो सारिका को एक तीर से 2 शिकार करने का सुनहरा मौका मिल गया था. उसे पता चला कि उस का सौतेला पिता कावेंद्र अपनी बायलौजी लैब के कैबिन में कुछ जवान छात्राओं के साथ गंदा काम करता है.
ऐसी 3-4 आवारा टाइप की स्टूडैंट्स उस ने फंसा रखी थीं. सारिका को यह भी पता चला कि ज्योति नाम की मैडम कावेंद्र का इस काम में सहयोग करती है और उस के लिए लड़कियां तैयार करती है. उस की मम्मी का टांका भी ज्योति ने ही कावेंद्र से भिड़वाया था. ऐसे काम के लिए कावेंद्र ज्योति को एक फिक्स रकम देता था.
ज्योति ने सारिका को भी तैयार करने की कोशिश की. सारिका ने नाटक करते हुए उस के जाल में फंसने का अभिनय किया. खुल कर बात करने के लिए एक दिन वह उसे एक रेस्टोरैंट में ले गई. वहां दोनों में खूब बातें हुईं और ज्योति ने कावेंद्र के और अपने बहुत सारे राज और फंसाई गई लड़कियों के नाम उगल दिए. सारिका ने सबकुछ अपने मोबाइल में रिकौर्ड कर लिया.
मगर इतने सुबूत से सारिका संतुष्ट नहीं थी. उस की फिजिक्स लैब के सामने ही बायो की लैब थी. सारिका को आइडिया था कि कावेंद्र कब और किस समय लड़कियों के साथ मौजमस्ती करता है. एक दिन सारिका ने चुपके से अपने मोबाइल का कैमरा औन कर के कावेंद्र के कैबिन में किताबों की आड़ में लगा दिया. उस में इतना कुछ रिकौर्ड हो गया कि यह कावेंद्र की असलियत सब के सामने लाने के लिए काफी था.
सारिका ने प्रिंसिपल मैडम आशा को पहले ही अपने विश्वास में ले रखा था. उस ने ज्योति वाला औडियो और कावेंद्र वाला वीडियो जब आशा मैडम को सुनाया और दिखाया तो वे चौंक कर बोली, ‘‘अरे सारिका, मेरे स्कूल में यह सब चल रहा था और मु?ो कानोंकान खबर नहीं. यह बायो लैब तो सैक्स लैब ही बन गई थी.’’
उसी समय आशा मैडम ने सुबूत सहित मैनेजमैंट से बात की और अगले दिन ज्योति और कावेंद्र का स्कूल से पत्ता साफ हो गया. दोनों को बहुत बेइज्जत कर के स्कूल से निकाला गया.
दोनों औडियो और वीडियो सारिका ने अपनी मम्मी को भी भेज दिए. पता चला दोनों में बहुत घमासान हुआ. कावेंद्र का सूपड़ा वहां से भी साफ हो गया.
सारिका की मम्मी ने उस से माफी मांगी लेकिन सारिका ने पिघलने से मना कर दिया. वह मजबूती से अपने लिए रास्ता बनाने और जमाने को खुद को तैयार कर चुकी थी और उस ने यह कर के दिखा दिया. अब वह अपनी मम्मी का सहारा पा कर खुद को कमजोर नहीं बनाना चाहती थी.
